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मौत की खोह में खोई जिंदगी
Thursday, July 29, 2010, 23:30 hrs IST
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इस्लामाबाद । पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के पास घने जंगल वाले मरगला हिल्स इलाके में बुधवार सुबह भारी वर्षा के बीच एक यात्री विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से विमान में सवार सभी 152 यात्री मारे गए हैं। इसके पहले कहा गया था कि दुर्घटना में पांच लोग जीवित बच गए हैं। एयरब्लू की उड़ान संख्या 202 तुर्की से कराची के रास्ते इस्लामाबाद आ रही थी।

अचानक विमान का संपर्क हवाई अaे से टूट गया और कराची से उड़ान भरने के लगभग दो घंटे बाद सुबह 9.45 बजे वह मर्गला हिल्स के लोकप्रिय दामनकोह रिसॉर्ट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री रहमान मलिक ने इसकी पुष्टि की है कि विमान दुर्घटना में कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं बचा है।

एयरबस ए-321 में चालक दल के छह सदस्यों सहित कुल 152 लोग सवार थे। विमान का मलबा आग के गोले के रूप में बदल गया था और आकाश में घना धुंआ फैल गया था। प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी ने मंत्रिमंडल की बैठक रद्द कर दी और पंजाब, सिंध तथा ख्ौबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्रियों के साथ दुर्घटना स्थल का हवाई सर्वेक्षण किया। पाकिस्तान सरकार ने गुरूवार को शोक दिवस घोषित किया है।

बचाव कार्य में मुश्किलें

बचावकर्मियों ने शवों को निकालने के लिए तीन किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई है। विमान के मलबे को काटने के लिए भारी उपकरण दुर्घटनास्थल पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। शवों की पहचान कर पाना कठिन हो सकता है। दुर्घटना खड़ी ढलान पर ऎसी जगह हुआ है जो चारों ओर से घने जंगलों के बीच में है। वहां जाने के लिए कोई भी सड़क नहीं है वहां केवल पैदल अथवा हेलीकॉप्टर से ही पहुंचा जा सकता है।

मौत की घाटी

तुर्की से आ रहे 152 लोगों के लिए मरगला की पहाडियां मौत की खोह साबित हुई। सुबह 9.45 पर हुए विमान हादसे में मरगला की पहाडियों में जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उन्हें नहीं पता था कि जिन पहाडियों के पास दामन-ए-कोह है, वही पहाडियां मौत की खोह साबित होंगी। विश्व प्रसिद्ध शाह फैजल मस्जिद के नजदीक फैली इन पहाडियों के बारे में कई किवदंतियां सुनने को मिलती है। कोई इन्हें मौत की घाटी कहता है तो कोई चोर-लुटेरों का स्वर्ग।

मरगला यानी सपोंü का झुंड

मरगला की चट्टानें चार करोड़ वर्ष पुरानी बताई जाती हैं। कहा जाता है कि ये क्षेत्र कभी समुद्र में था, इसीलिए यहां कदम-कदम पर समुद्री जीवन के जीवाश्म और सबूत मिल जाते हैं। यहां पहुंचना काफी मुश्किल है। हरे-भरे वनक्षेत्र के बीच सर्पाकार सीढियों की भांति यह दुर्गम पहाडियां 12,605 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है। भारी उतार चढ़ाव वाली ये पहाडियां ऊपर से देखने पर सांपों झुंड की तरह लगती हैं। पश्तो भाषा में "मर" का मतलब है सर्प और "गला" यानी झुंड। यानी मरगला का अर्थ हुआ सर्पो का झुंड।

चोर-लुटेरों का स्वर्ग

स्थानी लोगों में कहा जाता है कि इन पहाडियों का नाम मरगला यूं ही नहीं पड़ा। यहां छिपे चोर लुटेरे यहां से निकलने वाले यात्रियों का गला काटकर खोहों में फेंक देते थे। इसलिए इन पहाडियों का नाम मरगला पड़ा। स्थानीय लोग आज भी यहां जाना पसंद नहीं करते।

किस्मत ने दिया दगा

इस उड़ान के लिए 159 लोगों के पास टिकट थे। इनमें से कुछ लोग देर से आने की वजह से उड़ान नहीं पकड़ सके थे, लेकिन अन्य लोग इतने नसीबवाले नहीं थे। एक युगल का विवाह केवल तीन दिन पहले हुआ था और वे हनीमून के लिए इस्लामाबाद जा रहा था। छह स्कूली बच्चे युवा संसद में हिस्सा लेने के लिए इस्लामाबाद जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि उन्होंने इस विमान को बहुत कम ऊंचाई पर उड़ते देखा था।
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