काठमांडू । नेपाल में रविवार को होने जा रहे प्रधानमंत्री पद के छठे दौर के चुनाव के पहले जारी एक ऑडियो टेप में विपक्षी माओवादी पार्टी के नेताओं के सांसदों की खरीद-फरोख्त के लिए चीन के "दोस्तों" से 50 करोड़ नेपाली रूपए मांगने के खुलासे के बाद माओवादी एक नए विवाद में घिरते नजर आ रहे हैं। माओवादियों और काठमांडू स्थित चीनी दूतावास दोनों ने टेप को फर्जी बताते हुए इस आरोप से इंकार किया है। नेपाली भाषा के भारतीय चैनल नेपाल-1 के शुक्रवार को यह आडियो टेप जारी करने के बाद ताजा विवाद पैदा हुआ।
20 मिनट का टेप
करीब 20 मिनट के टेप में पूर्व सूचना और संचार मंत्री और सांसद तथा माओवादी पार्टी के विदेश मामलों के प्रभारी कृष्ण बहादुर म्हारा तथा एक अज्ञात व्यक्ति का वार्तालाप दर्ज है। उस व्यक्ति को चीनी मध्यस्थ माना जा रहा है। म्हारा ने चीनी मध्यस्थ से कहा कि रविवार को प्रधानमंत्री पद के चुनाव में माओवादी पार्टी की जीत के लिए करीब 50 अन्य सांसदों की आवश्यकता है।
अतिरिक्त सांसदों का समर्थन जुटाना कठिन काम है क्योंकि कुछ सांसद दूसरों के निर्देश पर चल रहे हैं। उनका इशारा तराई की पार्टियों के सांसदों की ओर था जो इससे पहले प्रधानमंत्री पद के लिए हुए पांच बार के मतदान में तटस्थ थे। माओवादी पार्टी के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल "प्रचंड" और नेपाली कांग्रेस के नेता राम चंद्र पौडयाल में से कोई भी आवश्यक बहुमत हासिल करने में सफल नहीं हो पाया।
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