Daily News
Saturday, 19 May, 2012
 |   |   |   |   |   |   |   |   |   |   | 
प्रभु पर भरोसा
Tuesday, January 31, 2012, 09:23 hrs IST
Email Print Comment min  max | Bookmark and Share
ईश्वर को जब तक नहीं माना जाए तब तक तत्व ज्ञान की खोज नहीं हो सकती और तत्व ज्ञान की खोज के बिना ईश्वर के तत्व का ज्ञान नहीं होता और ज्ञान बिना कल्याण नहीं हो सकता, जीवन सुखी नहीं हो सकता। ईश्वर को न मानने से कृतघ्नता का दोष आ जाता है, क्योंकि जो मनुष्य सर्व संसार के उत्पन्न तथा पतन करने वाले सबके सुह्वद उस परमपिता परमात्मा को नहीं मानते, वे यदि अपने को जन्म देने वाले माता-पिता को भी न मानें तो कोई आश्चर्य बात नहीं है।

जन्म से उपकार करने वाले माता-पिता को न मानने वाले के समान दूसरा कौन कृतघ्न है? ईश्वर को न मानने से मनुष्य की आध्यात्मिक स्थिति नष्ट हो जाती है और उसमें पशुपन आ जाता है। संसार में जो लोग ईश्वर को नहीं मानने वाले हैं, गौर करके देखने से उनमें यह बात प्रत्यक्ष देखने में आती है। ईश्वर के अस्तित्व में प्रमाण पूछना कोई बुद्धिमत्ता की बात नहीं है।

इस विषय में प्रश्न करना साधारण है। स्थूल बुद्धि से समझ में न आने वाले विषय में समझदार मनुष्यों को भी शंका हो जाती है, फिर साधारण मनुष्यों की तो बात ही क्या है? विचारने की बात है कि जो परमात्मा स्वत: प्रमाण है और जिस परमात्मा से ही सब प्रमाणों की सिद्धि होती है, उसके विषय में प्रमाण पूछना आश्चर्य है। जैसे किसी मनुष्य का अपने ही संबंध में शंका करना कि "मैं हूं या नहीं" व्यर्थ है, वैसे ही ईश्वर के अस्तित्व के बारे में पूछना व्यर्थ है।
More Stories Top News
vichar news आत्मविश्वास
vichar news ईष्र्या पर विजय
vichar news ईष्र्या की आग
vichar news राम का महत्व
vichar news प्रभु का स्मरण
vichar news ईमानदारी
vichar news धर्म के रूप
vichar news जरूर करें दान
vichar news संवेदनशीलता
vichar news दान का महत्व
Copyright © Daily News. All rights reserved.