हर मनुष्य को कोई न कोई जिम्मेदारी वहन करनी ही होती है। कोई अपने परिवार के प्रति जिम्मेदार है, तो कोई किसी अन्य कार्य के लिए। जिम्मेदारी संभालना और जिम्मेदारी लेना मनुष्य में गुणों की उत्पत्ति करता है। जो व्यक्ति सफलता और सरलतापूर्वक जिम्मेदारी निभाता है, वह दिनोंदिन प्रगति के पथ पर अग्रसर रहता है। कई लोग जिम्मेदारी से घबराते हैं, क्योंकि वे यह सब नहीं जानते। जिम्मेदारी उन्हें तनावग्रस्त कर देती है। उनका मन सतत जिम्मेदारी से दबा-सा रहता है। कुछ लोग नींद का भी सुख नहीं ले पाते। वे तनावयुक्त रहते हैं यह देखकर कि फलाना व्यक्ति उनकी बात ही नहीं सुनता या मेरा बच्चा मेरी बहुत अवज्ञा करता है। नि:संदेह जिम्मेदारी कइयों की नींद हराम कर देती है। ऎसे में क्यों न हम अपने जीवन के कुछ ठोस सिद्धांत बना लें। उदाहरण के लिए कोई भी कार्य में भूल होना संभव है। इसलिए हम छोटी-मोटी भूल को गंभीरता से न लें। जब कुछ बड़ा कार्य चल रहा हो, तो उसमें पांच प्रतिशत या सात प्रतिशत नुकसान तो होगा ही। यदि आपके साथ दस लोग काम कर रहे हैं, तो आप इस तरह का मापदंड अपनी बुद्धि में रखें कि दस में से दो व्यक्ति तो अति योग्य और बुद्धिमानी होंगे। छह व्यक्ति सामान्य होंगे और दो व्यक्ति आप से ज्यादा चिंतित न हों। यही बातें एक परिवार पर भी लागू होती हैं। प्राय: हर परिवार में एक न एक व्यक्ति इसी श्रेणी का होता है। हमें उसे स्वीकार कर अपनाना होगा। आपके इस संगठन में कोई एक ऎसा भी हो सकता है, जो आपकी अवज्ञा करे। उसे भी आपको बुद्धिमानी से ठीक करना होगा। सभी को सहयोग देकर अपना सहयोगी बनाते चलें, तभी आप तनावमुक्त जीवन का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर सकेंगे। वरना जीवन भर तनावग्रस्त ही रहेंगे और सब कुछ होकर भी चैन से नहीं जी सकेंगे। सहयोग देकर दूसरों को अपना बनाइए।
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