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Thursday, 09 February, 2012
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अच्छे दोस्त!
Wednesday, July 28, 2010, 11:32 hrs IST
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Khushboo
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फ्रेंडशिप-डे की अग्रिम बधाई के साथ एक एसएमएस मिला। जरा गौर फरमाइए। एक लड़का अपनी मृत्यु से तीन मिनट पहले एक एसएमएस टाइप करता है-"बाय, मैं जा रहा हूं।" अपनी लवर और फ्रेंड को मैसेज भेजने के बाद उसकी नजरें मोबाइल स्क्रीन पर टिक जाती हैं। पहले लवर का जवाब आता है-"कहां जा रहे हो? थोड़ी बिजी हूं। कुछ देर में बात करती हूं।" उसके बाद फ्रेंड का मैसेज मिलता है-"अबे कमीने, अकेला कहां चला। रूक मैं भी आ रहा हूं। यह दोस्ती है।"
बात जब बेस्ट फ्रेंड की हो तो सेम सेक्स पर ही आकर सुई क्यों अटक जाती है? लड़का और लड़की भी तो अच्छे दोस्त हो सकते हैं। जरूरी तो नहीं कि हम-तुम की दोस्ती हर बार प्यार में ही बदले। इश्क-विश्क, प्यार-व्यार से दूर ये यंग्स्टर्स दिल को सचमुच पागल मानते हैं। इनकी शेयरिंग देखते ही बनती है तो कहीं ये भूल भी जाते हैं कि दोस्त लड़का है या लड़की और यहीं से शुरू होते हैं एकदम प्योर फ्रेंडशिप के मजेदार किस्से...
कल किसने देखा है जी...
स्टेज पर सालसा करते सृष्टि और सौरभ पर सभी की नजरें ठहर जाती हैं। यूं लगता है कि जैसे दोनों एक-दूजे के लिए बने हों, लेकिन यह सारे भ्रम कुछ ही मिनट में टूट जाते हैं। स्टेज से नीचे आते ही दोनों लड़ने-झगड़ने लगते हैं। "बेवकूफ, थोड़ी प्रेक्टिस और करते तो ज्यादा अच्छा होता।" सृष्टि के इतना कहते ही सौरभ की त्यौरियां चढ़ती हैं-"मेकअप में पूरा घंटा लगा दिया, वो भी तो देख।" महारानी कॉलेज से बीबीए कर रहीं सृष्टि और कौटिल्या इंजीनियरिंग कॉलेज के बीटेक स्टूडेंट सौरभ की पहली मुलाकात सालसा क्लास में हुई। आज दोनों बेस्ट फ्रेंड हैं। सृष्टि कहती हैं-"लड़का बेस्ट फ्रेंड होने के कई फायदे हैं। किसी मुसीबत में हैं तो वह आपकी मदद करेगा। कोई चीज सलेक्ट करनी है तो एकदम सही राय उसी से मिलेगी।" सृष्टि की बात बीच में काटते हुए सौरभ कहते हैं-"इन लड़कियों की यही प्रॉब्लम है। हमेशा खुद का फायदा देखती हैं। देखा, कैसे दोस्ती में भी प्लस पॉइंट्स ढूंढने लगी। मैं अपनी 60 परसेंट बातें सृष्टि से शेयर करता हूं और ये वही बातें होती हैं, जो मम्मी और दीदी से बांटता हूं।" कभी लगा कि दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो सकता है? इतना पूछा तो सृष्टि मुंह बनाते हुए बोलीं-"प्यार और इससे, कभी नहीं। मेरे सपनों का राजकुमार तो सबसे अलग होगा।" सौरभ का जवाब-"हां, हां वो तो सबसे अलग ही होगा। दो नाक, चार आंखें...।" दोनों खिलखिलाकर हंसते हैं। अपनी दोस्ती का फ्यूचर कहां देखते हैं? जब शादी हो जाएगी...सौरभ बीच में बोलते हैं-"कल किसने देखा है जी। शादी के बाद भी कॉन्टेक्ट में रहेंगे। कोशिश रहेगी कि हर साल फ्रेंडशिप-डे दोनों साथ सेलिब्रेट करें।"
प्यार में आंसू तो दोस्त का कंधा
प्यार होता है तो लगता है कि सब-कुछ मिल गया। हर बात अपने लवर से शेयर करने लगते हैं। अपनी सारी दुनिया को वहीं सिमटा देते हैं। किसी ने जरा-सा कुछ कहा, आंसू आए तो बस प्रेमी का साथ नजर आता है, लेकिन जिसे आप अपनी सारी दुनिया मानने लगे, वही आंखों में आंसू ला दे तो मन हल्का करने के लिए सिर्फ एक ही कंधा नजर आता है और वह कंधा होता है दोस्त का। राजस्थान यूनिवर्सिटी से एमए कर रही ललिता कहती हैं-"प्यार में सौ उलझनें हैं, लेकिन दोस्ती एक-दूजे की खुशी के लिए कुछ भी कर गुजरने का नाम है। मैं अपने बेस्ट फ्रेंड सिद्धार्थ से हर बात शेयर करती हंू। फैमिली प्रॉब्लम्स हों या पर्सनल, सभी बताती हूं। कभी नहीं लगा कि वो लड़का है, इसलिए उससे कुछ शेयर नहीं कर पाऊंगी। बॉयज की चॉइस मुझे नहीं पता, इसलिए जब भी अपने बॉयफ्रेंड को गिफ्ट देना होता है, तब सिद्धार्थ ही हेल्प करता है।" सिद्धार्थ कहते हैं-"मेरी ड्रीम गर्ल कैसी होगी, यह ललिता मुझे बताती है। उसे मालूम है कि कैसी लड़की मेरी लाइफ पार्टनर बन सकती है। ललिता जरा ज्यादा बोलती है तो उसे चुप रहने को कहता हूं। वह अपनी हर बात शेयर करती है, लेकिन इस मामले में उससे पीछे हूं। कुछ बातें ऎसी हैं, जो मैं किसी से शेयर नहीं कर पाता..." ललिता बात काटती हैं-"वो कुछ बातें हैं जैसे कोई लड़की पसंद आई तो प्रपोज करने में जनाब टाइम लगाएंगे।" आपके बॉयफ्रेंड को सिद्धार्थ से प्रॉब्लम नहीं होती? ललिता कहती हैं-"प्यार अपनी जगह और दोस्ती अपनी जगह। बॉयफ्रेंड को थोड़ी प्रॉब्लम होती है, लेकिन कोशिश के बाद समझ जाता है।"
दोस्ती सा पाक रिश्ता नहीं
दस साल पहले रवींद्र मंच पर हुई छोटी-सी मुलाकात राज मिर्जा और श्रद्धा को आज भी याद है। समय बीतने के साथ दोस्ती और भी गहरी होती गई। थियेटर आर्टिस्ट श्रद्धा कहती हैं-"मैं हिंदू हूं और राज मुस्लिम। इस कारण दोस्ती और मजबूत हुई। हम दोस्त से बढ़कर कुछ होते तो शायद बहुत-सी मुश्किलों का सामना करना पड़ता। हम ईद और दीवाली साथ मनाते हैं।" राज बताते हैं-"पहले हम नॉर्मल फ्रेंड थे। सालों पहले मेरा ब्रेकअप हुआ तो मुझे टूटने से श्रद्धा ने ही बचाया। उसने समझाया कि दोस्ती से पाक रिश्ता कोई नहीं। इश्क के चक्कर में पड़ूंगा तो रोने-धोने के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा। जिस तरह एक डॉक्टर अपना इलाज खुद नहीं कर सकता, उसी तरह हमें भी जिंदगी जीने के लिए एक डॉक्टर की जरूरत होती है और दोस्त से अच्छा डॉक्टर कोई और नहीं ।" इतनी कम उम्र में बिजनेस कैसे शुरू हुआ? श्रद्धा बताती हैं-"इसका क्रेडिट भी राज को जाता है। दो साल पहले मेरी ग्रेजुएशन चल रही थी कि राज ने एक्टिंग इंस्टीटयूट खोलने का प्लान बनाया। थियेटर का शौक तो था ही। हमारी टयूनिंग भी गजब की है। बस यहीं से हम दोस्त के साथ बिजनेस पार्टनर भी बन गए।" राज कहते हैं-"मुसीबत में हम साथ होते हैं। लड़का या लड़की होने से थोड़ा फर्क पड़ता है, लेकिन दोस्ती निभानी हो तो इतना मुश्किल नहीं है। हम दोनों की शेयरिंग की कोई लिमिट नहीं है। शादी के बाद भी दोस्ती कायम रहेगी। हां, हम दो से चार दोस्त हो जाएंगे। हर साल फ्रेंडशिप-डे सेलिब्रेट करते हैं। इस बार भी स्पेशल ही होगा।"
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