कोलकाता के सेंट जेम्स स्कूल में लड़कों को कुकिंग सिखाने के लिए स्पेशल कक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन अनूठी कक्षाओं को लगाने का उद्देश्य लड़कों को कुकिंग सीखने के अलावा लैंगिक समानता का पाठ भी पढ़ाना है। गली क्रिकेट और फुटबॉल को भूल जाइए। सेंट जेम्स स्कूल के यह छोटे लड़के अब कुकिंग सीख रहे हैं। सधे हाथों से खीरे, टमाटर और प्याज की बारीक स्लाइस काटने और इन्हें लेट्यूस के पत्तों व ब्रेड के साथ ठीक से अरेंज भी कर पा रहे हैं ये। चौथी पांचवी कक्षाओं के ये छोटे बच्चे लिटिल शैफ बनने की प्रक्रिया में हैं। न सिर्फ यहां बल्कि घर पर भी उन्हें किचन में काम करने में आनंद आ रहा है और वे खुशी से स्नैक्स और डायनिंग टेबल तैयार करने में अपनी मांओं की मदद कर रहे हैं। नमन जैन कहते हैं, जन्म दिन पर मैंने अपने दोस्तों के कॉर्न चाट खुद बनाई। वहीं आर्यमन ने एक वीकेंड पर पूरे परिवार को फू्रट सलाद बनाकर खिलाया। जो उन्होंने स्कूल में बनाना सीखा था। काम के लिए सम्मान इन्हें कुकिंग सिखाने का प्रयोजन न सिर्फ उन्हें सही मूल्यों से परिचित कराना है बल्कि शुरू से ही लड़कियों या महिलाओं के प्रति सम्मान को विकसित भी करना है। इस प्रोग्राम के तहत बच्चे स्वस्थ और सही फूड के कांसेप्ट के बारे में सारी बातें सीख पाते हैं। वे स्वस्थ और नुकसान कारक भोजन में अंतर जान पाते हैं। वह सीख रहे हैं कि अब तक कायम यह धारणा बकवास है कि खाना बनाना पुरूषों का काम नहीं है। टेबल सजाने, कटलरी-क्रॉकरी अरेंज करने व नैपकिन फोल्ड करना भी सीख रहे हैं। यह होशियार बच्चे एक कदम आगे बढ़कर रेसिपी बुक के लिए भी तैयारियां करने लगे हैं।
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