ये हमेशा साथ चिपकी रहने वाली मां-बेटी की जोड़ी नहीं है। सिंगल मदर-सिंगल चाइल्ड रिलेशनशिप को लेकर भी उन्हें कोई मलाल नहीं है। वे दोस्तों की तरह नजर आती हैं, हंसती हैं, बातें करती हैं, गपशप करती हैं, और तो और एक दूसरे की खूब मजाक बनाती हैं। मसाबा मजाक में कहती हैं, मैं डिजाइनर हूं और मॉम मेरी अकाउटेंट। टेलेंटेड बेटी को गर्व से निहारते हुए नीना के चेहरे के भावों को आसानी से पढ़ा जा सकता है। बीस साल पहले बिना शादी बच्चे को जन्म देने का फैसला आसान नहीं था, यह दौर था जब महिला सशक्तीकरण की सिर्फ बातें ही की जा रही थीं। बेशक यह ऎसा पहला मामला था। नीना और उनकी बेटी इसी वजह से आज भी दूसरों का अटेंशन अपनी ओर खींच ही लेती हैं। मसाबा के जन्म के बाद मीडिया पागलपन की हद तक उनके पीछे पड़ गया था। कुछ झक्की पत्रकारों ने मामले की तह में जाकर बच्ची के जन्म प्रमाण पत्र में वेस्ट इंडीज क्रिकेटर विवियन रिचड्र्स के नाम को सार्वजनिक रूप से अखबारों में मसालेदार खबर के रूप में छापा था। जबकि नीना हर बार कहती थीं यह सिर्फ मेरी बेटी है और मैं इसकी सिंगल मां हूं। वह कहती हैं, इसके पीछे कुछ कारण हैं जो मुझे पता हैं किसी को उन्हें जानने की जरूरत नहीं है। नीना को अपने इस फैसले पर कभी कोई पछतावा नहीं रहा। वह कहती हैं, हम पुरूष प्रधान समाज में रहते हैं जिसमें सिंगल मां बनने जैसी बातों पर लोगों की भृकुटियां तन जाना स्वाभाविक ही है। लेकिन मेरे परिवार का सपोर्ट मेरे साथ रहा उन्होंने मुझे अपने फैसले पर कायम रहने का हौसला दिया। मसाबा ने मुझे संपूर्ण होने का अहसास दिया है। यही साफगोई मां-बेटी के रिश्ते को मजबूती दे रही है। मसाबा कहती हैं, मां ने मेरे जन्म से जुड़ी हर सच्चाई मुझे बताई है। मैं जानती हूं कि मेरी मां और पापा की शादी नहीं हुई थी और यह बात मुझे प्रभावित नहीं करती। अब शादीशुदा हूं वर्ष 2008 में उन्होंने दिल्ली निवासी चार्टड अकाउंटेंट विवेक मेहरा से शादी कर ली। वे आश्चर्य प्रकट करती हैं कि एकदम गुप्त रूप से यह शादी हुई थी इसके बावजूद मीडिया को इसकी भनक कैसे लग गई। शादी को दो साल हो चुके हैं, वे खुश हैं संतुष्ट हैं कि हर चीज अपने आप आकार लेती जा रही है। हम पिछले छह सालों से एक दूसरे को जानते हैं लेकिन वे तब शादीशुदा थे और पत्नी से उनका अलगाव चल रहा था। हम एक फ्लाइट में मिले, तभी एहसास हुआ कि हम एक दूसरे के अच्छे साथी बन सकते हैं। नीना ने पहले ही साफ कर लिया था कि उनकी जिंदगी में मसाबा प्राथमिकता पर रहेगी। वह कहती हैं, उम्र के साथ-साथ आप ज्यादा शांत और समझदार होते जाते हैं, सहनशीलता और धैर्य बढ़ता जाता है। हां, मेरे साथ बुरी बात यह है कि मैं लंबे समय से अकेली रही हूं इसलिए अब किसी के साथ रहने की आदत डालने में परेशानी महसूस होती है। साधारण सी बाते हैं, विवेक मेरे पुराने एसी और गैजेट्स बदलना चाहते हैं। अच्छी फीलिंग है यह मेरे लिए। रोमांस इस उम्र में शारीरिक नजदीकियों का उतना महत्व नहीं है। यह मन का रिश्ता है। इस उम्र में प्यार ज्यादा आत्मिक हो जाता है। जब मैं मसाबा और विवेक को साथ देखती हूं तो मुझे उन पर ज्यादा प्यार आता है। कैसे पिता हैं विवेक मुझे याद है मेरी मां ने मेरा पूरा साथ दिया। वह जितना मेरे लिए कर सकती थीं उन्होंने किया। कहती हैं मसाबा। एक समय था जब मीडिया ने उनके सिंगल पेरेंट होने के मसले को खूब उछाला, उन परिस्थतियों से डील करना मां के लिए वाकई कठिन रहा होगा। नीना कहती हैं, कई पल ऎसे आए जब मसाबा को इन बातों से बुरा लगता था मैं उसे समझाती थी। मसाबा विवियन से मिलने के लिए आजाद थी, वह अपने पिता के करीब है, विव अपनी जिंदगी और काम में मसरूफ हैं। वे फोन पर अपनी बेटी से बात करते हैं। विवेक मेहरा के बारे में मसाबा कहती हैं, वे बहुत अच्छे, गर्मजोश और हंसमुख इंसान हैं। मैं मां और उनके लिए खुश हूं। वह वाकई बहुत अच्छे फैमिली मैन हैं। सिंगल मदर नीना बताती हैं, घर पर मैं पूरी तरह मसाबा की मां थी वहीं दूसरी तरफ मुझे काम के लिए बाहर भी जाना होता था। कभी-कभी कोफ्त होती थी कि मैं अपनी जिम्मेदारियां ठीक से पूरा नहीं कर पा रही हूं। शादीशुदा महिलाओं को सलाह देना चाहूंगी कि कितनी भी मुश्किल हो शादी को न तोड़े, खुद के लिए न सही, बच्चों के लिए ही सही। जिंदगी में किसी बात का कोई पछतावा? नीना कहती हैं, मैं चाहती थी मसाबा के भी भाई या बहन हो, पहले इस बारे में सोचा नहीं और अब देर हो चुकी है। नीना और मसाबा इन दिनों नीना मसाबा के काम को एंजॉय कर रही हैं और मसाबा अपने करिअर को सही दिशा देने में। मसाबा बताती हैं, मैं चाहती थी कि एक पैशन ऎसा हो जिसे सफल करिअर का रूप भी दिया जा सके। फैशन डिजाइनिंग के चक्कर में मैं बस यूं ही संयोग से आ गई और अब यह मेरी जिंदगी बन चुका है।
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