कैलाश बताते हैं, दिल्ली में बिजनस था मेरा, लेकिन एक सहयोगी के धोखा दे देने के बाद से सारा काम प्रभावित हो गया। मुझे बहुत धक्का लगा था। इसके बाद 2001 में मैंने तय किया कि मैं मुंबई जाऊंगा और मेरी संगीत यात्रा का सफर शुरू हो गया। मेरे पिता लोक संगीत के बेहद शौकीन रहे हैं। संगीत यह सिर्फ गाने का ही नाम नहीं है। यह मानवीय भावनाओं और उनकी नम्रता को भी दर्शाता है। मुझे अपने खुद के लिखे गीत गाना ज्यादा पसंद हैं। यह मुझे अपने संगीत की आत्मा से जुड़ने में मदद करते हैं। विश्वास सिर्फ कर्म करने और उसके प्रतिफल में है। मैं भजन नहीं गाता, लेकिन मेरा संगीत ईश्वरीय सत्ता और अलौकिकता से साक्षात्कार कराता है। इसके माध्यम से आप ईश्वर की शक्ति को पहचान पाते हैं। संगीत में वह शक्ति है जो इस संसार को शांति से रहने लायक जगह बनाती है। ईश्वर से जुड़ने के लिए जरूरी नहीं है कि आप मंदिर जाएं, संगीत आपको कहीं भी ईश्वर से जोड़ देने में सक्षम है इससे चीजें जादू की तरह काम करने लगती हैं। बॉलीवुड में जाना एकदम अद्भुद अनुभव रहा। यह इंडस्ट्री इतनी बुरी भी नहीं है जितना इसके बारे में बोला जाता है। वो लोग जिन्होंने इसे बदनाम कर रखा है उन्हें मैं कहना चाहूंगा कि अच्छा करके दिखाएं आपकी वापसी के रास्ते खुद ब खुद खुल जाएंगे। मैं अपनी शतोंü पर गाता हूं , मुझे लगता है कि गीत के बोल शर्मनाक हैं, मैं गाने से मना कर देता हूं। मैं प्रसिद्धि के लिए अश्लीलता को प्रमोट करने की सोच के बिलकुल खिलाफ हूं। परिवार परिवार में मेरी पत्नी शीतल और बेटा कबीर है। अभी वह केवल सात महीने का है। उसके आने के बाद शीतल की पढ़ाई जरा डिस्टर्ब हो गई है, लेकिन जल्द ही वह अपना कोर्स पूरा करने के लिए कॉलेज वापस लौटेंगी। परिवार को ग्लैमर की बेकार शोशेबाजी से दूर ही रखना पसंद करता हूं। प्रसिद्धि को मैंने खुद पर कभी हावी नहीं होने दिया है, क्योंकि यह आनी-जानी चीज है। डाइट मैं योगा करता हूं। मैं शाकाहारी हूं। दूध को हमेशा अवॉइड करता हूं, लेकिन दो साल पहले गंभीर रूप से बीमार होने पर मैंने फिर से नॉनवेज खाना शुरू कर दिया। इससे मुझे आसानी रहती है, विशेषकर विदेश में टूर के दौरान, क्योंकि वहां पूरी तरह शाकाहारी खाना मिल पाना मुश्किल होता है।
|
|
|
|
|
|
|