नई दिल्ली । भारत के सबसे सफल एथलीट उड़न सिख मिल्खा सिंह ने कार्डिफ (वेल्स) में 1958 में हुए ब्रिटिश एंपायर एवं राष्ट्रमंडल खेलों में पहला स्थान हासिल कर भारत को इन खेलों में पहला स्वर्ण पदक दिलाया था। मिल्खा ने 440 गज (402.336 मीटर) की दौड़ में 46.71 सै. का समय लेकर दक्षिण अफ्रीका के मैलकम क्लाइव स्पेंस को पछाड़ सोने का तमगा जीता था और यहीं से उनके स्वर्णिम कैरियर ने नई ऊंचाइयां छूनी शुरू कर दी थी। आठ अक्टूबर 1935 को जन्मे मिल्खा 1960 रोम ओलंपिक और 1964 टोक्यो ओलंपिक में भाग ले चुके हैं।
वे रोम में स्पेंस से 0.1 सैकंड से कांस्य पदक से चूक गए थे। उन्होंने 1958 टोक्यो एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक हासिल किए थे। कार्डिफ में राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार भारत को दो सोने के तमगे मिले। यहां ट्रैक एंड फील्ड स्पर्द्धा पुराने नियमों के मुताबिक ही हुई थी और यह इन खेलों में अंतिम बार पुराने नियमों से आयोजित हुई। मिल्खा के अलावा पहलवान लीलाराम ने हैवीवेट 100 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।
फराह खेलों से हटे
लंदन। ब्रिटेन के 5000 मीटर और 10000 मीटर दौड़ के यूरोपीय चैंपियन मो. फराह ने 3 से 14 अक्टूबर तक होने वाले दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों से खुद को अलग कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वे इस वर्ष किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेंगे। फराह ने कहा कि मेरे लिए 2010 का सत्र काफी अच्छा रहा, लेकिन अब मैं थकान महसूस कर रहा हूं।
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