नई दिल्ली। रिश्तों में विफलता पुरूषों को भावनात्मक रूप से असुरक्षित बना देती है। प्रेमिका से जुदाई उनमें चिड़चिड़ापन पैदा कर उन्हें अवसाद की ओर धकेलती है। ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में स्पष्ट हुआ है कि कम उम्र के पुरूष इतने मजबूत नहीं होते कि वे असफल रिश्तों के दर्द से जूझ सकें। सर्वेक्षण रिपोर्ट कहती है कि जब युवक उम्र के 20वें वर्ष में प्रवेश करते हैं उस समय उनके पास ऎसे लोगों की कमी होती है जिन्हें वे अपना दुख बता सकें।
यदि वे केवल अपनी प्रेमिका या साथी से ही अपना दुख कह सकते हैं तो उनके दूर हो जाने पर वे भावनात्मक रूप से अधिक कमजोर हो जाते हैं। "यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन" में समाजशास्त्र विषय की प्रोफेसर मिलैनी बर्टले कहती हैं कि जब एक रिश्ता गलत साबित होता है तो इससे पुरूषों की पहचान पर, उनके लायक होने पर असर पड़ता है।
पुरूष महिलाओं जितने ही संवेदनशील बर्टले बताती हैं कि पुरूष महिलाओं जितने ही संवेदनशील होते हैं लेकिन महिलाओं के पास अपने दुख बांटने के लिए परिवार में और दोस्तों के बीच एक बड़ा समूह होता है जबकि पुरूषों में दोस्तों के बीच प्रतियोगिता ज्यादा होती है और वे एक-दूसरे का ख्याल नहीं रखते। यह एक तथ्य है कि पुरूष अपनी भावनाएं दूसरों के साथ नहीं बांटते हैं, ऎसा इसलिए है कि उनकी सांस्कृतिक परवरिश ही ऎसी होती है। वे इन भावनाओं को अपने भीतर ही समेटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि कम उम्र के पुरूषों में अपने रिश्तों के साथ बहुत ज्यादा प्रयोग करने की प्रवृत्ति होती है और जब वे असफल होते हैं तो असफलता से जूझने के लिए संघर्ष करते हैं और अवसाद में चले जाते हैं।
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