नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को एक तरफ जहां केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि गरीबों में मुफ्त अनाज बांटना संभव नहीं है, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की सराहना की जिसमें उसने सरकार को गरीबों के बीच मुफ्त अनाज बांटने का आदेश दिया था।
प्रधानमंत्री ने अपने सरकारी आवास पर सोमवार को संपादकों के एक समूह के साथ मुलाकात के दौरान तमाम मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने सरकार से लेकर संगठन, नक्सलवाद से लेकर कश्मीर समस्या, पाकिस्तान से लेकर चीन के साथ संबंधों और सेवानिवृत्त होने की अपनी योजनाओं तथा कैबिनेट में युवाओं को तरजीह देने के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात कही।
मुफ्त अनाज बांटना व्यवहारिक नहीं सुप्रीम कोर्ट के हाल के उस फैसले पर, जिसमें केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को दिए अपने आदेश में कहा था कि सड़ने की बजाए अनाजों को गरीबों में बांट दिया जाना चाहिए, प्रधानमंत्री ने सवालिया अंदाज में कहा कि देश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले अनुमानित 37 फीसदी लोगों के बीच कैसे मुफ्त अनाज बांटा जा सकता है? उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी तक अदालत के आदेश की प्रति देखी नहीं है लेकिन सभी गरीबों के बीच अनाज बांटना संभव नहीं है। अदालत के इस फैसले के पीछे की भावना का वह सम्मान करते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि अनाज जब सड़ रहे हों, ऎसे में जरूरतमंदों तक उसे पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए हमें एक रास्ता निकालना होगा।
सरकार व संगठन में तालमेल का अभाव नहीं कांग्रेस में सरकार और संगठन के बीच घटते तालमेल की अटकलों को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहा है कि विचारों में मतभेद में कोई बुराई नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार में शामिल मंत्रियों और पार्टी नेताओं की अलग-अलग राय में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों में मतभेद होते हैं और कुछ हद तक सामंजस्य के साथ सरकार के काम करने के लिए यह जरूरी भी है।
मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल, सेवानिवृत्ति नहीं प्रधानमंत्री ने संसद के आगामी सात नवम्बर से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र से पूर्व अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपने मंत्रिमंडल में युवकों को अधिक से अधिक प्रतिनधित्व देना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह फिलहाल सेवानिवृत्त होने का मन नहीं बना रहे हैं।
सरकार व संगठन में तालमेल का अभाव नहीं कांग्रेस में सरकार और संगठन के बीच घटते तालमेल की अटकलों को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहा है कि विचारों में मतभेद में कोई बुराई नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार में शामिल मंत्रियों और पार्टी नेताओं की अलग-अलग राय में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों में मतभेद होते हैं और कुछ हद तक सामंजस्य के साथ सरकार के काम करने के लिए यह जरूरी भी है।
मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल, सेवानिवृत्ति नहीं प्रधानमंत्री ने संसद के आगामी सात नवम्बर से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र से पूर्व अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपने मंत्रिमंडल में युवकों को अधिक से अधिक प्रतिनधित्व देना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह फिलहाल सेवानिवृत्त होने का मन नहीं बना रहे हैं।
नक्सली सबसे बड़ी चुनौती नक्सल समस्या की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती करार दिया। उन्होंने कहा कि इसका तत्काल समाधान नहीं है। इसके लिए उन्होंने आर्थिक और सामाजिक कारण बताए।
चीन से एहतियात, पाक से वार्ता चीन के साथ संबंधों में आई कड़वाहट के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत को चीन से पर्याप्त एहतियात बरतने की जरूरत है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि संबंधित मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान की कोशिशें छोड़ दी जाए। दोनों एशियाई शक्तियों के संबंध सहयोग और प्रतिस्पर्धात्मक हैं लेकिन यह प्रतिस्पर्धा शांतिपूर्ण हो, इसके प्रयास किए जाने चाहिए। डॉ. सिंह ने पाकिस्तान के साथ भी संबंधों में मधुरता बनाए रखने के लिए वार्ता जारी रखने की वकालत करते हुए कहा कि भारत-पाक संबंधों में हमेशा कोई न कोई दुर्घटना होती रहती है। मुंबई हमले के बाद उभरे जनमानस के विचारों के प्रति वह संवेदनशील हैं।
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