बेंगलुरू। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 पर भेजे जाने वाले कुछ पेलोड्स की लिस्ट जारी कर दी है। चंद्रयान-2 में एक ऑरबिटर, एक लैंडर व एक रोवर जाएगा। जिसे जीएसएसलवी रॉकेट से भेजा जाएगा। ये प्रक्षेपण वर्ष 2013 के अंत में होने की संभावना है। इस योजना में लैंडर रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस देगी जबकि ऑरबिटर व रोवर इसरो बनाएगा। ये पेलोड्स विशेषज्ञों की राष्ट्रीय समिति द्वारा तय किए गए हैं।
रोवर पर जाएंगे ये पेलोड्स
लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (लिब्स): इसे बेंगलुरू स्थित इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम लेबोरेटरी में बनाया जाएगा। इसके अलावा अल्फा पार्टिकल इंड्यूस्ड एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोप (एपीआईएक्सएस) भी भेजा जाएगा जिसे अहमदाबाद में बनाया जाएगा। दोनों ही पेलोड्स चंद्रमा की सतह पर घूमने वाले रोवर में लगे होंगे और वहां की सतह पर मौजूद तत्वों की जांच-पड़ताल करेंगे।
ऑरबिटर पर जाने वाले पेलोड्स
n लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (क्लास): इसे इसरो का बेंगलुरू स्थित सैटेलाइट सेंटर बनाएगा। जबकि इसके दूसरा हिस्सा सोलर एक्स-रे मॉनिटर (एक्सएसएम) अहमदाबाद बनाएगा। इससे वैज्ञानिक चंद्रमा की सतह पर मौजूद बड़े तत्वों के नक्शे बनाएंगे। n एल एंड एस बैंड सिंथेटिक अपर्चर राडार (सार): इसे अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (सैक) में बनाया जाएगा। इससे वैज्ञानिकों को चंद्रमा की सतह पर मौजूद बर्फ और पानी के तत्वों को खोजने में आसानी होगी। इससे वे चंद्रमा के अंधेरे वाले हिस्से में पानी होने की और पुष्टि करेंगे। n इमेजिंग आईआर स्पेक्ट्रोमीटर (आईआईआरएस): इसे भी अहमदाबाद के सैक में बनाया जाएगा। इससे चांद की सतह पर मौजूद धातुओं, मिनरल्स, पानी के तत्वों और हाइड्रोक्सिल ऑयन की खोज करने में आसनी होगी।
n न्यूट्रल मास स्पेक्ट्रोमीटर (सीएचऎस-2): इसे तिरूअनंतपुरम के स्पेस फिजिक्स लेबोरेटरी में बनाया जाएगा। इसका काम होगा चांद के बाहरी वातावरण का अध्ययन करना। n टेरेन मैपिंग कैमरा-2 (टीएमसी-2): इसे भी अहमदाबाद के सैक में बनाया जाएगा। ये चांद की सतह का थ्री-डायमेंशनल नक्शा बनाएगा, जिससे चंद्रमा की सतह पर मौजूद खनिज पदार्थो की संपूर्ण जानकारी मिलेगी। इसके अलावा भूगर्भ संबंधी शोधकार्य करने में आसानी होगी।
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