नई दिल्ली । प्रति दिन आठ घंटे से कम सोने और इसके कारण खाने-पीने की आदतों में होने वाले बदलाव से लड़कों की तुलना में लड़कियों में मोटापा अधिक तेजी से बढ़ता है। पोषाहार विशेषज्ञ एवं डायटिशियन संगीता राज ने बोस्टन में हाल में हुए एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि प्रतिदिन आठ घंटे से कम सोने और अधिक वसा वाले वस्तुओं के सेवन से लड़कियों में मोटापा उनकी उम्र की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ता है, जो प्रतिदिन आठ घंटे से अधिक देर तक सोते हैं। आठ घंटे से कम सोने से किशोरों के खाने-पीने की आदतों में स्वत: बदलाव आ जाता है और इससे विशेषकर लड़कियों में मोटापा बढ़ने लगता है।
नहीं सोने से ज्यादा कैलोरी होती है जमा
16-19 वर्ष के किशोरों पर बोस्टन में हुए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि निर्धारित अवधि से कम सोने वालों के शरीर में अधिक कैलोरी जमा हो जाती है जो मोटापे का कारण बनती है। किशोर अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थ बर्गर, पिज्जा जैसे फास्टफूड का अधिक सेवन करते हैं जो और अधिक कैलोरी शरीर में पहुंचाता है।
ऎसा लगातार होने पर शरीर में चर्बी की मात्रा बढ़ने लगती है और वह मोटापे का कारण बनता है। जो किशोर आठ घंटे से कम सोते हैं उनमें इससे अधिक सोने वालों की तुलना में वसा से मिलने वाली कैलोरी में 2.2 फीसदी और कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाली कैलोरी में 3.0 फीसदी की वृद्धि होती है।
लड़कों की तुलना में लड़कियां ज्यादा नींद लें
लड़के की तुलना में लड़कियों को अधिक समय तक सोना चाहिए। किशोरावस्था में उन्हें इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही वह उम्र है जब शरीर में अतिरिक्त चर्बी को एकत्रित होने से रोका जा सकता है और मोटापे से बचा जा सकता है।
ये बनता है कारण
सोने के घंटे में वृद्धि होने से अधिक खाने की आदत कम होती है, बल्कि उनमें कैलोरी की खपत भी 21 फीसदी बढ़ जाती है। लड़कों की तुलना में लड़कियों में इस तरह का मोटापा अधिक बढ़ता है। किशोर को 9 घंटे सोने की आवश्यकता होती है, जबकि अध्ययन में शामिल किशोरों में से मात्र 34 फीसदी ही आठ या उससे अधिक नियमित रूप से सोते थे।
ऎसे बचें मोटापे से
ऎसी स्थिति में नियमित व्यायाम करने के साथ ही कम कैलोरी और कम वसा वाले खाद्य पदार्थो का सेवन करना सही रहता है। इसके लिए मौसमी सब्जियों के साथ ही फलों का सेवन करना चाहिए।
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