जयपुर। जान लेवा बीमारी कैंसर से लड़ना उस समय आसान हो जाता है, जब अपनों के साथ के साथ खुद पर विश्वास हो। ऎसे में जिंदगी की दौड़ में कैंसर की जंग को हराया जा सकता है। यह कहना कैंसर सरवाइवर्स का। बुधवार को कैंसर सरवाइवर्स डे है। इस मौके पर मेट्रो मिक्स ने बात की शहर के उन लोगों से जिन्होंने अपने आत्मविश्वास और सही ट्रीटमेंट के चलते कैंसर जैसी बीमारी को हराया और पूरी से तरह क्योर हुए। उनका आत्मविश्वास बना सबसे बड़ी दवाई। हम बता रहे हैं उनके अनुभव उन्हीं की जुबानी।
इन्होंने जीती जंग अपनों का साथ मिला छह साल पहले जब मेरी टेस्ट रिपोर्ट मुझे मिली और उसमें क्लियर हुआ कि मुझे ब्रेस्ट कैंसर है, तो मेरी वाइफ और बेटी उस समय मेरे साथ ही थी। बस उस दिन मैंने अपने दिल को मजूबत कर लिया और अपने परिवार वालों के साथ छह साल के ट्रीटमेंट में खुद को पूरी तरह क्योर कर लिया। यह कहना है दिनेश द्विवेद्वी का। दिनेश बताते हैं कि मुझे बे्रस्ट कैंसर हुआ जो पुरूष्ाों में बहुत ही कम होता है रहा और जिंदगी में इस कैंसर की जंग को आखिर जीत ही लिया।
खुद पर विश्वास रखें मुझे कैंसर की सैंकड स्टेज के समय कैंसर का पता चला। फिर क्या था जिस दिन रिपोर्ट मिली उसके अगले दिन ही बिना देरी के ऑपरेशन करवा लिया। करीब दो साल तक कीमोथ्ौरेपी और ट्रीटमेंट चला और फिर अपने विश्वास से मैंने इस बीमारी से निजात पा ली। यह कहना है अजमेर रोड निवासी गृहणी कल्पना टंडन का। कल्पना का मनाना है कि जब तक आप खुद के साथ डॉक्टर और भगवान पर विश्वास नहीं रखेंगे, तब तक बीमारी से निजात नहीं मिलेगी।
जीवन के प्रति पॉजिटिव रहें कैंसर जैसी बीमारी से भी बचा जा सकता है। सही समय पर सही उपचार और पेशेंट्स के जीवन के प्रति सकारात्मक रवैये से कैंसर के ठीक होने के चांस बढ़ बढ़ जाते हैं। कई ऎसे पेशेंट्स हैं, जो कैंसर से पूरी तौर पर क्योर हुए हैं और कई पेशेंट्स उपचार से तेजी से ठीक हो रहे हैं, इसलिए स्वास्थ्य पर हमेशा ध्यान देने और डॉक्टर से नियमित रूप से चैकअप करना सही होता है। फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉ. नरेश कुमार सोनी ने बताया कुछ उपाय-
यह करें... हैल्दी लाइफ स्टाइल फॉलो करें स्क्रिनिंग प्रोग्राम में पार्टिसिपेट करें वेेजिटेरियन बनें और फल-सब्जी को अपनी डाइट मेंं शामिल करें लोगों को इस रोग के प्रति अवेयर करें मेंटल और फिजिकल फिटनेस पर ध्यान दें जीवन के प्रति सकारात्मक रवैया रखें।
इनसे बचें... तंबाकू का इस्तेमाल नहीं करें हैल्थ चैकअप में अनियमित नहीं रहें। नकारात्मक सोच नहीं रखें। नॉन वेज अवॉइड करें।
इनसे लें प्रेरणा लीजा रे 2009 में लीजा रे को पता चला कि उन्हें मल्टीपल मायेलोमा हो गया है। यह सफेद रक्त कोशिकाओं का कैंसर होता है। लीसा इस बीमारी से लड़ी और जीत हासिल की और फिर से काम में सक्रिय हुई।
लांस आर्मस्ट्रॉन्ग फेमस साइक्लिस्ट आर्मस्ट्रॉन्ग 12 कैंसर ट्यूमर से लड़े और 3500 किमी लंबी दुनिया की सबसे कठिन रेस टूर दी फ्रांस के विजेता बने। उन्होंने अपनी किताब इट्स नॉट अबाउट द बाइक- माई जर्नी बैक टु लाइफ में इस बारे में विस्तार से बताया है।
बारबरा मोरी 29 साल की उम्र में बारबरा मोरी को ब्रेस्ट कैंसर हो गया था। अपनी जिंदादिली से बारबरा इस बीमारी से लड़ी और उनके इस जज्बे को कैंसर ने हरा दिया।उन्होंने "1 ए मिनट" डॉक्यूमेंट्री फिल्म में इसके बारे में जिक्र किया है।
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