जयपुर। त्वचा के रोगों पर काबू पाया जा सकता है, बशर्ते खानपान और रहन-सहन दुरूस्त हो। इन रोगों से कुछ हद तक दूरी भी होनी चाहिए, क्योंकि यह संक्रामक रोग है, जो छूने और हवा के संक्रमण से फैलते है। यह कहना है बिड़ला सभागार में चल रही डर्माकॉन- 2012 में आए एक्सपट्र्स का। उनके अनुसार जिस तेजी से देश में कई तरह चर्म रोगों की रफ्तार बढ़ी है, उसी तेजी से इनके खात्मे के लिए विभिन्न शोध भी चालू हुए, लेकिन सरकार की ओर से आर्थिक सहयोग नहीं मिल पाने के कारण अधिकांश शोधों की गति बेहद धीमी हो गई है। एक्सपट्र्स का मानना है कि किसी भी विज्ञापन को फॉलो करके गोरा नहीं बना जा सकता है, जबकि महज केयर और प्रपोपर डाइट चार्ट के फॉलोवर बनने से फेयर बना जा सकता है। सभी डॉक्टर्स ने यूथ को स्किन केयर के विशेष टिप्स दिए। इस चार दिवसीय कॉन्फ्रेंस का समापन रविवार को होगा।
हर कोई ऎश्वर्या नहीं मार्केट में कई सारी क्रीम है, तो दावा करती है कि ब्लैक से व्हाइट बना देंगे और आपकी किस्मत चमक जाएगी। असल में ऎसा कुछ नहीं होता है, बल्कि उसके साइड इफेक्ट्स होते हंै और झुर्रिया कम उम्र मे ही दिखने लग जाती है। यह कहना है कि जम्मू कश्मीर से आई गायनेकोलॉजिस्ट एंड डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. शफाखत रूसुल का। उनके अनुसार एकाकी परिवार की प्रथा और जंक फूड के कारण यूथ में तेजी से खूबसूरती का आकर्षण बढ़ा है और उनकी चाहत अभिनेत्री ऎश्वर्या राय और प्रियंका चोपड़ा बनने की होने लगी है। इसके कारण ब्यूटी प्रोडक्ट्स का कारोबार चल निकला है। असल में बेहतर खान-पान और संयुक्त परिवार में रहने से ही स्किन डिसीज में कमी आती है और चेहरे पर कसावट बनी रहती है।
टेंशन से होती है स्किन खराब फास्ट फूड और स्ट्रेस के कारण यंगस्टर्स इन दिनों कई स्किन डिसीज की चपेट मे अधिक आ रहे है। इससे बचाव के आसान तरीके है, लेकिन यंगस्टर्स उन्हें भी फॉलो नहीं करते है। यह कहना है लखनऊ से सीनियर डर्मिटॉलोजिस्ट डॉ. अजीत कुमार का। उनके अनुसार यहीं कारण रहता है कि वे बिना शेयरिंग के झोलाछाप डॉक्टर्स के पास ट्रीटमेंट लेने पहुंचते है। इसका उन्हे खामियाजा भी उठाना पड़ता है। बचाव के लिए फैमिली मेम्बर्स का सपोर्ट और डाइजेस्ट सिस्टम का स्ट्रोंग होना बेहद जरूरी है। ऎसे में हैल्दी फूड और संयमित एवं अनुशासित दिनचर्या उनके लिए वरदान साबित हो सकती है।
क्रीम फेयर नहीं अगली बनाती है टीनेज में इन दिनों फेयर बनने का क्रेज है, जबकि अधिकांश क्रीम उन्हें डार्क एंड अगली बनाती है। यह कहना है कि डर्मिटॉलॉजिस्ट डॉ. रोहिणी गुप्ता का। हमेशा एक्सपर्ट की सलाह को लेकर ही फेस पर क्रीम को अप्लाई करना चाहिए, क्योंकि इसमें होने वाले कई तत्व चेहरे के कलर्स एवं बनावट को खासा नुकसान पहुंचा सकते है। ऎसे में हब्र्स के बारे में उचित जानकारी कर लेनी चाहिए, तभी डार्क से फेयर बनकर स्किन डिसीज को दूर किया जा सकता है। टीनेज और यूथ को पालर्स में कैमिकल ब्लीच एवं फेशियल से भी बचना चाहिए, क्योंकि इनमें कौनसा कैमिकल उनके लिए घातक हो जाएं, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है।
इंडियन पद्धति कारगर स्किन डिसीज में अधिकांश एलिमेंट्स जेनेटिक दखल रखते हैं और पेरेन्ट्स से बच्चों को वंशानुगत आते हैं। इसके लिए यूके में रिसर्च किया जा रहा है, ताकि जेनेटिक कोड में बदलाव कर बच्चों को विभिन्न बीमारियों से बचाया जा सकें। यह कहना है यूके से आए एन्ड्रयू डेल का। उनके अनुसार इंडिया में पुरानी पद्धति ने इन रोगों में काफी कारगर रही है, जिनमे फैमिली का एक साथ रहना और फिर सभी का एक ही समय पर खाना खाना। इससे न सिर्फ आपस में इंटरेक्शन बना रहता है, बल्कि शेयरिंग भी होती है, जिससे स्ट्रेस कम हो जाता है, नतीजा इन रोगों की रोकथाम भी स्वत: हो जाती है।
एक्सपट्र्स की एडवाइज एडवर्टाइजमेंट में आए प्रोडक्ट्स को फॉलो न करें। हैल्दी फूड लें, इससे इम्युनो सिस्टम मजबूत होगा। ज्यूस को अवॉइड करें और फल खाने की कोशिश करें। रूटीन से काम करने की कोशिश करें और नशे की लत से दूर रहें, क्योंकि एल्कोहॉल से स्किन डिसीज फैलने का खतरा अधिक रहता है। बीमारियों में एक्सपट्र्स की सलाह लें और उसकी योग्यता का आकलन कर लें। स्ट्रेस को न पालें, बल्कि उसे शेयर करें और हरी घास पर मॉर्निग वॉक करें।
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