सर्दियों के फूलों की बात हो और रेननकुलस का जिक्र न हो तो यह इस फूल के साथ नाइंसाफी होगी।
खूबसूरत आकार और रंग रेननकुलस का फूल सुंदर आकार का होता है। बहुत कुछ अधखिले गुलाब की तरह इसलिए खूबसूरत होना स्वभाविक है। गुलाब की ही तरह अनेक रंग मिलते है इस पर्शियन रेननकुलस फूलों के। सफेद, गहरा पीला, ऑरेंज, गहरा गुलाबी और क्रीम। एक कवि ने इनकी सुंदरता पर इन्हें खिताब दिया है रंगों का उत्सव।
कहां, कब और कैसे लगाएं रेननकुलस का फूल सर्दियों के अंत और वसंत का पुष्प है इसलिए इसे रोपने का यही सही समय है। वसंत ऋतु के आरंभ से हल्की गर्मी तक इस पौधे को रोपा जा सकता है। तेज गर्मी और तेज धूप से इसे बचाना जरूरी है, तब इसमें देर तक फूल आते रहेंगे। विदेशों में वहां का गर्मी का समय इसके लिए सही है।
रेननकुलस की गांठों को दिसंबर, जनवरी के माह में रोपा जाता है, जो किसी पक्षी के पंजों के समान दिखाई देती है। अच्छी व स्वस्थ गांठों को ही रोपना चाहिए। इसे आप अच्छी नर्सरी से भी प्राप्त कर सकते हैं। नर्सरी वाले से आप अलग रंगों वाले पौधे की डिमांड करें। वे उन्हें प्रचुर मात्रा में अलग-अलग ही तैयार करते हैं, इसलिए अलग-अलग क्यारियों से चयन करें तो बेहतर होगा। रंगों के हिसाब से ही आप इन्हें रोपें।
रंगों का संयोजन लंबी क्यारियों में इन पुष्प पौधों के रंगों का अच्छा संयोजन किया जा सकता है, जैसे पीले और सफेद रंगों का संयोजन। लाल व सफेद का संयोजन बेहद आकष्ाüक होगा। आप अपनी पसंद के मुताबिक रंगों का संयोजन कर सकती हैं।
इन पौधों को आप क्यारियों व गमलों, दोनों में ही लगा सकती हैं। क्यारियों में यह समूह में शोभा पाते हैं और गमलों में भी यह खूबसूरत लगते हैं। मजबूत मौजूदगी गुलाब के पौधे की तरह। धूप इन पौधों के लिए आवश्यक है। सर्दियों में इन्हें पर्याप्त धूप मिलनी जरूरी है। गमलों को धूप और हल्की छाया वाले स्थान पर रख सकते हैं। जिस समय फूलों पर कलियां आती हैं, उस समय इन्हें खाद भी दी जा सकती है। इससे कलियां बड़ी और स्वस्थ होंगी। फूलों का आकार भी बेहतर होगा।
खाद पौधों को रोपने से पहले मिट्टी में खाद को अच्छी तरह मिला लें। मिट्टी में चूना आवश्यक तत्व है, इसलिए सुपरफास्फेट मिट्टी में मिलाया जा सकता है या एक कप चूना 2 गुना 2 फीट के दायरे में मिला दें, अच्छे परिणाम मिलेंगे। इस तरह आप अपनी बगिया को रेननकुलस के फुलों से संवारें और तारीफ पाएं।
कट फ्लावर में रेननकुलस के फूल 12 से 15 सेमी ऊंची स्वस्थ टहनी पर लगते हैं और कई दिनों तक अपना वजूद बनाए रखते हैं। यही वजह है कि इन्हें ड्रॉइंगरूम की शोभा बढ़ाने के लिए फूलदान में उचित स्थान मिलता है। फूलदान का पानी रोजाना बदलना जरूरी है। डॉ. देशबंधु अंगिरा
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