अस्सी के दशक में जब वे बीसवें साल में थीं, फिल्मों से विदा ले शादी कर ली । तब वे करिअर के शिखर पर थीं। वे कहती हैं मैंने अनिल से शादी के बारे में कभी सोचा भी नहीं था, पता नहीं कैसे सब कुछ अपने आप होता चला गया। जिंदगी भी अपने तरीके से कैसे-कैसे सरप्राइज देती है... इन दिनों वे अपनी नई हिंदी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं। सेट पर वह आज भी उतनी ही खूबसूरत नजर आती हैं जितनी पच्चीस साल पहले नजर आती थीं। ये चार्मिüग एक्ट्रेस रति अग्निहोत्री हैं जो अपनी पहली ही हिंदी फिल्म एक दूजे के लिए से लोगों के दिलों पर छाने में कामयाब रही थीं। जीवन के पचासवें वर्ष में चल रही हैं रति। उनके पच्चीस बरस के विवाहित जीवन की कहानी भी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कुछ कम रोचक नहीं है। घर संसार में प्रवेश का फैसला रति ने तब किया जब वे करिअर के शिखर पर थीं। फिल्मों से अलविदा कहने का उनका यह औचक फैसला लाखों प्रशंसकों के दिलों को तोड़ने वाला था। सोलह सालों तक सुनहरे पर्दे से दूर रहने के बाद अब वे फिर से फिल्मी दुनिया में सक्रिय हैं। हाल ही उनकी शादी को पच्चीस साल पूरे हुए हैं। खुशहाल शादीशुदा जिंदगी के उत्साह को चाहकर भी छुपा नहीं पाती हैं वे। रति कहती हैं आज जब पीछे मुड़कर देखती हूं तो मेरा यह यकीन और भी मजबूत हो जाता है कि मुकद्दर हमारी जिंदगी में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मैंने अनिल से शादी के बारे में कभी सोचा भी नहीं था, पता नहीं सब कुछ कैसे अपने आप होता चला गया। जिंदगी भी अपने तरीके से कैसे-कैसे सरप्राइज देती है। लव हुआ सही समय पर शादी करने के लिए रति की हमेशा सराहना की जाती रही है। अस्सी के दशक में जब वे बीसवें साल में थीं तब ही उन्होंने फिल्मों से विदा ले ली थी, हालांकि यह शादी उन्होंने तब की जब वे करिअर के शिखर पर थीं। वे बताती हैं मुझे आज भी याद है अनिल से पहली मुलाकात। यह परिवार का छोटा सा गेट-टुगेदर था। उनका और हमारा परिवार लंबे समय से एक दूसरे से अच्छी तरह परिचित था। अच्छी दोस्ती की वहज से हम अकसर संडे को लंच पर मिला करते थे। रविवार को करीबी दोस्तों को लंच पर घर बुलाने की रस्म थी हमारे यहां। शूटिंग में मैं कितनी व्यस्त हूं इस बात से किसी को कोई मतलब नहीं था, सबके साथ लंच में मेरा शामिल होना जरूरी था। बस ऎसे ही मैं और अनिल दोस्त से ज्यादा होते चले गए और फिर वह समय जल्द ही आ गया जब हमने महसूस किया कि अब रिलेशनशिप को दूसरे मायने दिए जाएं। मैं पहले ही तय कर चुकी थी कि जब भी शादी करूंगी फिल्मों से दूर हो जाउंगी। करिअर का अच्छा दौर था वह पर मैं फैसले पर कायम रही व शादी के बाद पूरा ध्यान मैंने अपनी गृहस्थी पर लगाया। वह सबसे अहम दिन था जिंदगी का दो साल की कोर्टशिप के बाद 9 फरवरी 1985 को रति और अनिल विरमानी शादी के अटूट बंधन में बंध गए। शादी का यह मौका साधारण ही रहा, क्योंकि शादी से मात्र एक महीने पहले रति के पिता का देहांत हो गया था। बडे अरमानों से उनके पिता ने शादी की तारीख मुकर्रर की, लेकिन बिटिया को दुल्हन बनते न देख सके। उनकी इच्छा को पूरा करने के लिए परिवार के लोगों ने शादी को उसी दिन संपन्न कराया, लेकिन यह सब धूमधाम से न हो पाया। रति बताती हैं, शादी से जुड़े हर काम का जिम्मा पापा ने ले रखा था। शादी का दिन चुनने से लेकर अरेंजमेंट्स उन्होंने किए, इसलिए हम शादी को नहीं टालना चाहते थे। मेरे लिए यह बहुत मुश्किल था, एक तरफ उन्हें खोने का दर्द था, दूसरी तरफ उनकी इच्छा और सपने को पूरा करना था। हमने इस दिन को बेहद से साधारण तरीके से पूरा करना तय किया। हनीमून दो महीने के हनीमून का पूरा समय हमने यूरोप में बिताया। मेरा फिल्मों से संन्यास लेने का फैसला सही था। मैं शादीशुदा जिंदगी को समय देना चाहती थी। वे मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। मुझे उनसे अच्छा जीवनसाथी मिल ही नहीं सकता था। सोलह सालों बाद मैंने फिल्मों में लौटने का फैसला किया तो उन्हें कोर्ई प्रॉब्लम नहीं हुई। पहले परिवार 1987 में रति ने अपने इकलौते बेटे तनुज को जन्म दिया। तनुज के जन्म के साथ ही रति का पूरा ध्यान उसके पालन-पोषण में रहा, साथ ही वह अनिल के आर्किटेक्चर के काम में भी रूचि लेने लगीं। घर परिवार में वह बेहद खुश हैं। 25 साल बाद भी रोमांस उनके रिश्ते में कायम है और यह खुशी पढ़ी जा सकती है रति के चेहरे और चमकती आंखों में।
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