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Wednesday, 08 February, 2012
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मैंने चुन लिया
Wednesday, June 23, 2010, 10:46 hrs IST
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लड़का कन्फ्यूज है लड़की भी कम परेशान नहीं। शादी के लिए कौन और क्यों सही है? कैसे लें फैसला? लड़की गजनी की नायिका कल्पना जैसी हो जो सबकी मदद करने में खुद को ही भूल जाती है या फिर मुन्नाभाई की वह बात ध्यान रखी जाए कि लड़का अगर वैटर के साथ ठीक से पेश नहीं आता तो उसे रिजेक्ट कर दो। बड़े ही पेचीदा हैं ये मसले।
यंग जनरेशन को समर्पित यह कवर बता रहा है कि मुंडे दे वास्ते कौन है सोणी कुड़ी और कुडी दे वास्ते कौन है सबतो चंगा मुंडा

इनकी विनयशीलता छू गई
"चलते-फिरते गूगल" पर फिदा
"सर, इंटरनेट बंद है। आप हेल्प करेंगे?" जब भी उनके पास गई, कभी ना सुनने को नहीं मिला। टीवी एंकर सहबा जलाल कहती हैं कि ऑफिस में और भी लोग थे, लेकिन हमेशा मदद के लिए तैयार रहने वाले मुजीब मन को छू गए। इनकी जनरल नॉलेज देखकर मैंने इनका नाम "चलता-फिरता गूगल" रख दिया। शादी के बाद कई ऎसे पल आए, जब महसूस हुआ कि ये मुझसे इतना प्यार करते हैं। पिछले साल मेरे जन्मदिन पर मुझे ऑफिस जाना पड़ा। इन्होंने छुट्टी ली थी पर विश तक नहीं किया। यकीन नहीं हो रहा था कि ये भूल सकते हैं। शाम को लौटी तो किचन बिखरा हुआ था। कुकरी कॉलम्स पढ़कर इन्होंने मेरे लिए केक बनाया था। सच मानिए, उस प्यारभरे डरावने केक की याद ताउम्र रहेगी।

शादी अरेंज है, लेकिन
"लव मैरिज है या अरेंज?" इस सवाल का बड़ा प्यारा जवाब है एमबीए स्टूडेंट नताशा गोयल के पास। वे कहती हैं कि शादी तो अरेंज है, लेकिन हमने लव को अरेंज नहीं किया। प्रदीप अपनी फैमिली के साथ मुझे देखने आए, तब किसी का ध्यान कच्ची जमीन पर रेंग रहे कीड़े-मकोड़ों पर नहीं गया। सभी उन पर पांव रखकर आगे बढ़ रहे थे, लेकिन प्रदीप थे कि टेढ़े-मेढ़े होकर चल रहे थे। पहले तो कुछ समझ नहीं आया पर जब मालूम हुआ कि ऎसी चाल कीड़ों को बचाने के लिए है तो अच्छा लगा। यहीं शादी का फैसला कर लिया।

याद करते ही हाजिर
सहेली के दूर के रिश्ते के भाई का हेल्पिंग नेचर इतना पसंद आया कि उन्हें जीवनसाथी बनाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो गई। दूसरी फ्रैंड्स के भाई जहां फ्लर्टिग करने गल्र्स कॉलेज आते थे, वहीं तेज जरूरत के समय हमेशा साथ नजर आए। हाउसवाइफ चांदनी सैनी कहती हैं कि कॉलेज टाइम में सहेली के भाई ने मेरी भी बहुत मदद की। मुसीबत में होते तो तेज एक फोन पर हाजिर हो जाते। अपनी बहन के लिए इतनी केअर मैंने नहीं देखी थी। गल्र्स के लिए रेस्पेक्ट की भावना ने मुझे इनका दीवाना बना दिया।

रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए
एक ही कैब में घर लौटते हुए देखा कि अमित रोते हुए बच्चों को बड़े प्यार-से चुप करवाने में लगे हैं। तब सोचा कि ये कैसा लड़का है? बॉयज तो बच्चों से जल्दी इरिटेट हो जाते हैं। कुछ समय और बीता तो जाना कि अमित इतने इमोशनल हैं कि आंसू नहीं देख पाते। फाइनेंशियल सेक्टर में जॉब कर रही प्रीति कंवर कहती हैं कि छोटी-सी बात ने महसूस करवाया कि मुझे मेरा हमसफर मिल गया है। जो बच्चों से इतना प्यार करे, वो बढिया इनसान होगा ही।

दिल छू गया चरण छूना
सवाल-जवाब वही थे, जो आमतौर पर लड़के लड़कियो से करते हैं, लेकिन बड़ों को चरण स्पर्श करने के अंदाज ने मुझे काफी इम्प्रेस किया। वीडियो एडिटर नीरू चलाना कहती हैं कि लड़के वाले आ रहे हैं। हंसना नहीं, ज्यादा बोलना नहीं, ये नहीं करना-वो नहीं करना...लड़कियों को कितना सिखाया जाता है। बड़ों का आदर करते समय लड़के फॉरमेलिटी के लिए सिर्फ घुटनों को हाथ लगाते हैं, लेकिन मैंने गौर किया कि धीरज पूरी रेस्पेक्ट के साथ दोनों हाथों से सभी बड़ों के चरण छू रहे हैं। संपन्न परिवार से होने के बावजूद उन्होंने शादी के बाद जॉब करने के मेरे फैसले पर सहमति जताई। ऎसी छोटी-छोटी बातों ने ही मेरा मन जीत लिया।

प्रपोजल जो थोड़े गड़बड़ा गए
मेरी पत्नी अपने परिवार के बेहद करीब है इसलिए मैंने तय किया कि उसके रिश्तेदारों के सामने ही प्रपोज करूंगा। उसके पेरेंट्स ने एक पार्टी रखी, यही अच्छा मौका था मेरे पास, सभी के सामने मैंने उससे कह दिया, मुझसे शादी करोगी। संयोग से वहां उसका पुराना दोस्त भी मौजूद था, उसे देखकर वह थोड़ा अपसेट हो गई थी और एकांत में जाकर रोने लगी। बाद में मुझे एहसास हुआ कि सरप्राइज देने का यह तरीका ठीक नहीं था, पहले मुझे उसे विश्वास में लेना चाहिए था।

प्रपोज करने से पहले
मैंने सारी तैयारियां कर ली थी, इतंजार कर रहा था कि अंगूठी बनकर आ जाए तो बताऊं। एक दिन घर जाने के बाद उसका फोन आया, कहने लगी कि जूअलरी स्टोर से फोन था कि अंगूठी तैयार हो गई है। हालांकि उसने बुरा नहीं माना कि मैंने उससे छुपाया। मानता हूं कि अचानक पता चलने पर वह कहीं ज्यादा खुश होती।

अफसोस नहीं
पापा के दोस्त अच्छे परिवार का रिश्ता लेकर आए। लड़का भी साथ था। हमें अकेले बात करने के लिए समय दिया गया। और बातों के के साथ ही मैंने उससे तनख्वाह के बारे में पूछ लिया। "बाद में जवाब दे देंगे" कहकर वे हमारे घर से विदा हो गए। फिर पता चला कि यह रिश्ता नहीं हो पाएगा। वजह थी मेरा मुखर होना। लेकिन मुझे कोई पछतावा नहीं है।

वह लड़की छा गई दिलो-दिमाग पर
दी मेरी फेवरिट बुक
मैं और रिया पहली बार साथ बाहर गए, बातों ही बातों में मैंने जिक्र किया कि मैं अपनी पसंदीदा बुक का पहला एडिशन चाहता हूं। दो साल बाद मेरी सालगिरह पर हम डिनर पर गए, मैं चकित हुआ जब उसने मेरी पसंदीदा किताब गिफ्ट की। मैं भूल चुका था कि पहली मुलाकात में मैंने क्या कहा लेकिन उसने न सिर्फ याद रखा बल्कि उसे जुटाया भी। कुछ महीने बाद मैंने उसकी बहन की मदद से खूबसूरत अंगूठी खरीदी और उसे प्रपोज किया।

नहीं किया शक
मेरी पिछली गर्लफ्रेंड्स चिंतित रहती थीं कि उधमी लड़कों के साथ मैं दूसरे शहर में किसी बखेड़े में न पड़ जाऊं। वे नजर रखने के लिए किसी न किसी को मेरे पीछे भेजती थीं। एक बार दोस्तों के साथ ट्रिप पर मियामी गया। रश्मि पहली ऎसी लड़की थी जिसने मुझे कहा कि मैं खूब एंजॉय करूं। उसकी बात दिल को छू गई। मैं उसे मिस करने लगा। सही मायनों में रश्मि से वह आजादी मिली जो पिछली गर्लफ्रेंड्स नहीं दे पाई थीं। मेरा भरोसा बढ़ता गया और वापस लौटते ही उसे प्रपोज कर दिया।

उसने निभाई अहम भूमिका
जेनी के साथ डेटिंग को एक साल होने को आया था। उन्हीं दिनों मां को सर्जरी से गुजरना पड़ा था। एक दिन मां ने मुझे बुलाया और जेनी को खूब थेंक्यू कहने को कहा। मुझे बताए बिना जेनी ऑफिस जाने से पहले मां की देखभाल करती, मां के कपड़े धोती, नाश्ता बनाती, सफाई करती। उसने यह मुझे प्रभावित करने के लिए नहीं किया था, बल्कि मुझे तो इसकी जानकारी भी मां से ही मिली। यह जानकर मुझे जो खुशी मिली उसी दिन तय कर लिया कि शादी करनी है तो इसी लड़की से।

हंसमुख है
ऑफिस पार्टी में मैं उसे साथ ले गया। सहयोगियों से परिचय कराया। कुछ देर के लिए बॉस के पास था, लौटा तो पाया कि लोग उसके पास हैं, हंस रहे हैं। बुजुगोंü ने मजाकिया बातों पर उसे आशीर्वाद भी दे डाला। मैं चकित था कि उसके जीवंत व्यक्तित्व के इस गुण से मैं अनजान कैसे रहा। तभी तय कर लिया कि अब इसे दूर नहीं जाने देना है।

नीलम और श्यामली
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