क्रिसमस के मौके पर थोड़ी बोल्ड और बहुत कलरफुल खूशबू...
पहला एस है स्पिरिचुअलिज्म यानी अध्यात्म और दूसरा है काम। क्या आध्यात्मिकता आपको गृहस्थ लाइफ से दूर करती है जबकि सच्चाई यह है कि जब दोनों मिलते हैं तब जिंदगी दोबारा मिलने का एहसास होता है।लौकिक और अलौकिक का यह मेल जिंदगी में खुशियों के लिहाज से कु बेर का खजाना हासिल करने जैसा ही है
जब आप प्रेम के दौर में होते हैं तो हर चीज, हर जगह प्रिय को महसूस करते हैं। ठीक ऎसे ही जब आप आध्यात्मिक होते हैंतो भी आपको समूचा जगत प्रेममय नजर आता है
आप आध्यात्मिक हैं और सोचते हैं कि ऎसा होने के लिए गृहस्थ जिंदगी से किनारा करना जरूरी है तो शायद आपको दोबारा सोचने की जरूरत है। आपके ये शुद्ध आध्यात्मिक विचार जीवन के अच्छे पलों को एंजॉय करने की राह में बाधा बन सकते हैं। ऎसा है तो कुछ समय के लिए मधुर तरंगों को अपने पास आने की इजाजत दें। फर्क तुरंत महसूस कर पाएंगे कि अध्यात्म और काम दोनों ही एक दूसरे के पूरक ही नहीं है बल्कि ये आपकी जिंदगी में खुशी, सौहाद्रü, स्वस्थ और जीवंत रिश्तों के लिए भी जरूरी हैं। स्पिरिचुअलिटी आपकेगृहस्थ जीवन को और ज्यादा सफल बनाती है। ओशो ने भी तो यही कहा है।
थोड़ा सा रूमानी हो जाएं हçष्ाüता और अजय दोनों नौकरी खो चुके थे और निवेश के कुछ बुरे फैसलों की वजह से भयंकर आर्थिक संकट में थे। बिना भुगतान किए बिलों की संख्या बढ़ रही थी, बिजली और टेलीफोन लाइनें कट चुकी थीं। हर पल तनाव, क्रोध से गुजर रहे थे। हçष्ाüता गुरू की शरण में गई, उसने मेडिटेशन शुरू कर दिया। एक शाम घर लौटने पर अजय ने घर के शांत वातावरण में मोमबत्ती की लौ की रोशनी में आंखें बंदकर एकाग्रता से मेडिटेशन करती हçष्ाüता को देखा। आत्मविश्वास और चमक से भरपूर चेहरे को देखकर वह प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाया। यही पल था जिसने उनकी जिंदगी को बदलकर रख दिया। वह उसे ज्यादा सम्मान देने लगा। इस बदलाव से हçष्ाüता और अजय के जीवन में एक नई उमंग और जोश का संचार हुआ।
नो प्लीज, वी आर स्पिरिचुअल आध्यात्मिकता और काम। एक दूसरे के पूरक ही तो हैं। मेडिटेशन अलौकिकता का एहसास कराता है वहीं काम लौकिक जगत की अद्भुत घटना है। यह वह एहसास है जो जीवन के प्रति आपके नजरिए को और ज्यादा विस्तृत बनाता है, आज इनकी प्रासंगिकता और बढ़ जाती है क्योंकि लोग तनावमुक्ति और शांति के लिए आध्यात्मिकता की चाह लिए गुरूओं की शरण में जा रहे हैं। बिना आध्यात्मिकता को सही रूप में जाने। आज भी आध्यात्मिकता को पुराने अर्थो में ही लिया जा रहा है जहां सिर्फ कहा गया था कि वी आर स्पिरिचुअल। जहां पति-पत्नी एक ही राह के हमसफर हों वहां तक तो ठीक है लेकिन अगर इसके विपरीत स्थिति है तो उनके लिए बस दुआ ही की जा सकती है।
बेहद संवेदनशील विष्ाय है यह। पहला वाला व्यक्ति रिजेक्टेड नहीं होना चाहेगा, वहीं दूसरा उसकी तरह वॉयलेटेड नहीं होना चाहेगा। दोनों के दृष्टिकोण कितने अलहदा हैं, एक प्रेम की आकांक्षा रखता है तो दूसरा स्पिरिचुअल निर्वाण की चाह। दोनों का अपना चार्म है। दोनों ही अपनी-अपनी समझ से सही हैं। ऎसे में दोनों को टकराव की जगह एकदूसरे की स्थिति को समझने की कोशिश करनी होगी।
एनर्जी को परखें योगी या गुरूओं की दिल और दिमाग की शुद्धता की बात को गलत तरीके से ग्रहण किया जाता है। उनके विचारों को अलग अर्थ में लिया जाता है। दरअसल, हमारे यहां काम को अशुद्ध माना गया है। जबकि यह सही नहीं है, काम अशुद्ध बिलकुल नहीं है। आपका मन शुद्ध है, प्रेम को इजहार के एक तरीके के रूप में लेते हैं। इसमें अशुद्धता जैसा क्या हुआ। एक यंग स्वामी जी ने प्रवचन में कहा, जब मेरी शादी हुई थी तो मुझे हर ओर हर चीज में रोमांस नजर आता था। मैं कविता करता, हर चीज खूबसूरत और बहुत स्पेशल नजर आती। ईट, प्रे एंड लव की एलिजाबेथ गिल्बर्ट भी इससे बहुत साम्यता रखती हैं। वे लिखती हैं, मैं और फिलिप एकदूसरे के लिए बहुत परफेक्ट थे, जेनिटिकली इंजीनियर्ड, हमारे शरीर का कोई पार्ट ऎसा नहीं था जिससे दूसरे के शरीर को किसी तरह की कोई प्रॉब्लम हो। कोई खतरा नहीं। कोई मुश्किल नहीं, रिफ्यूज करने लायक कुछ नहीं। सब कुछ कॉçम्प्लमेंटेंड।
आनंद की खोज हमें लगता है कि हमें अपने गुरू या योगियों को धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने शादी, काम और रिलेशनशिप्स से इतर एक अलग तरह के सुख और खुशी का मार्ग दिखाया है। अन्यथा उन लोगों के लिए तो मुश्किल ही खड़ी हो जाती जो इन रास्तों से विलग रहने की ख्वाहिश रखते हैं। उन लोगों के लिए जो सिंगल रहना चाहते हैं। आध्यात्मिकता की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें आप दैवीय रोशनी, खुशी और अलौकिकता का अहसास कर पाते हैं जो आत्मा से निकलती प्रतीत होती है। आप विस्तार पाते हैं, डर, ईष्र्या, जलन, क्रोध, लालच, घृणा, दर्द, प्रतिस्पर्घा जैसी चीजों से मुक्त हो अपने चारों ओर एक विशेष्ा प्रकार की सॉफ्ट रोशनी महसूस कर पाते हैं। मेडिटेशन के माध्यम से समूचे आसमान को थाम सकने का एहसास पाया जा सकता है, यह सच है
दूसरे को भी स्वीकार करें वास्तविकता यह है कि दैहिक और आध्यात्मिक दोनों पहलुओं में काफी समानता है। जब आप प्रेम के दौर में होते हैं तो हर चीज, हर जगह प्रिय को महसूस करते हैं। ठीक ऎसे ही जब आप आध्यात्मिक होते हैं तो भी आपको समूचा जगत प्रेममय नजर आता है। दोनों को अलग रूप में ग्रहण न करें। एक के चक्कर में दूसरे को बर्बाद क्यों करना। जब आप ऎसा कर पाएंगे तो रिलेशनशिप्स को स्वीकार करना और आसान होगा।
सवाल करें फिजिकल पर्सन काम के माध्यम से प्रेम प्रदर्शन के लिए अपने पार्टनर का साथ चाहता हूं ताकि अपनी दैहिक एनर्जी पा सकूं । क्या ये मेरी चाहत वास्तव में प्रेम है या फिर सिर्फ अपने वर्चस्व की चाह?
स्पिरिचुअल पर्सन क्या वाकई मेरी चाह ताउम्र ब्रह्मचारी रहने की है? क्या मैं जबरदस्ती खुद को कृत्रिम तरीके से प्रस्तुत कर रहा हूं? क्या यह अपने पार्टनर को जानबूझकर तंग करने की कोशिश तो नहीं है? ये तमाम सवाल बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि काम कभी यह नहीं कहता, अध्यात्म से दूर हो जाओ। ना ही अध्यात्म गृहस्थ कर्म से दूर करता है। यह किसी का भी बेहद निजी फैसला हो सकता है।
अपने विचारों को जानें रिश्ते बहुत पवित्र होते हैं। विचार व्यक्त करने के कई खूबसूरत तरीके हैं, शब्दों का चयन ध्यान से करें। यह आपके रिश्ते को ऊर्जा से भरपूर बना देंगे। आप लव ओरियंटेड होंगे और यह आपको आध्यात्मिकता का अहसास कराने वाला होगा। ओशो कहते हैं, काम पाप नहीं है। इसका दमन पाप है। काम प्राकृतिक है, यह जन्मजात है। इसकी निंदा न करें, इसे लेकर कोई फैसला न करें। इससे डरें नहीं, ना ही इससे लड़ें। ज्यादा आध्यात्मिक होते हुए इस तक पहुंचना आसान होगा।
प्यार पर केंद्रित रहें समय बदल रहा है, बुद्धिमानी से इसके साथ आगे बढें। क्योंकि अब रिलेशनशिप का आशय मात्र काम कतई नहीं है। प्यार दोनों की ही जरूरत है। कभी फिजिकल नेचरल और सहज होता है , तो कभी ब्रह्मचर्य। दोनों ही ठीक हैं, दोनों खूबसूरत हैं, जब आप दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं।
बातें काम की प्यार का प्रतिफल हमेशा काम नहीं होता, यह स्वयं प्रेम भी हो सकता है। दिन की शुरूआत और अंत प्यार से ही करें। प्यार में होने का एहसास आपको हर पल ही आध्यात्मिकता का एहसास कराएगा। बिना किसी प्रतिफल, आकांक्षा और मांग के एक दूसरे को प्रेम करें। प्रकृति की शांत खूबसूरती को साथ निहारें, उससे एकाकार हों। आप में से एक को दूसरे की जरूरत है और दूसरा ब्रह्मचर्य को निबाहना चाह रहा है, ऎसे में जरूरी है कि आप दोनों ही समान धरातल पर आएं और एक-दूसरे को समझें, सीखें। राधिका
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