हरा नजारा: चूलगिरी की पहाड़ी पर हरी शाम और लहरिया उम्मीद के हमकदम फोटो जर्नलिस्ट संजय कुमावत। मॉडल: सृष्टि कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है!! मैं तुझसे दूर कैसा हूं, तू मुझसे दूर कैसी है! ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है!! -कुमार विश्वास सावन भीगा दिल सूखा समाज की परंपराएं और हमारी सोच आज भी हमें खुलकर यह अहसास लेने से रोकती है। गांवों में, रूढिवादी और संयुक्त परिवारों में तो आज भी हालात यह हैं कि पति-पत्नी साथ बैठकर बात करने को भी तरसते हैं। पेशे से वरिष्ठ लेखाधिकारी कॉलेज गोइंग युवा बच्चों के पिता हैं शंकरलाल। पत्नी गांव में माता-पिता के पास रहती हैं, आज भी उनसे मिलने जाने पर दिन के उजाले में घर के चौक में ही बैठते हैं माता-पिता के पास। कपड़े वहीं मंगवा लेते हैं, खाना भी वहीं हो जाता है। यही हाल टोंक के देवा का भी है। जब शहर से गांव लौटता है तो बस दोनों एक-दूजे को कनखियों से ही निहारते रहते हैं।बुजुर्ग परिजनों के सामने अपने बच्चों को गोद में लेना शर्म की बात मानी जाती है। यहां तक कि बड़े-बुजुगोंü के होते हुए पति के घर आने पर पत्नी दरवाजा खोलने नहीं जा सकती..। बात ग्रामीण जीवन की हो या शहरी, दिलों में दूरियां बढ़ी हुई हैं। हम व्यस्त रहने की जुगाड़ में रिश्तों को खो रहे हैं। यूं कहें कि उनका महत्व नहीं समझ रहे। शादीशुदा जिंदगी के इस प्यार भरे रिश्ते की जीवंतता कायम रखने के लिए बहुत कुछ नहीं करना होता। बस एक प्यार भरी जादू की झप्पी ही कमाल कर जाती है। इसके जादू से अनजान हैं ऎसे परिवार। रोजमर्रा की जिंदगी यूं भी नीरस होती जा रही है और ऎसे में बड़े होते बच्चे पति-पत्नी के बीच फासले को और बढ़ा देते हैं। आप भी इसी दौर में हैं और पुराने दिनों की बातों को याद कर खुश हो लेते हैं। यही बातें हैं जो नजदीकियों के बिना भी आप को जोड़े हुए हैं और खुशी देती हैं। पेश है कुछ नए सावनी सिंगार स्पर्श प्यार का बढ़ रही दूरियों को दूर करें, वह भी एक साधारण से स्पर्श से। स्पर्श ही वह शक्तिशाली औजार है जो आप दोनों के बीच भावनात्मक नजदीकियां बढ़ाता है। स्पर्श...वह प्यार भरी छुअन, जो आनंद का अहसास कराती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि छुअन का अहसास होते ही शरीर रासायनिक प्रतिक्रिया देने लगता है। शरीर में हार्मोüस और दूसरे केमिकल्स का प्रवाह स्तर तेज हो जाता है, जो स्त्री-पुरूष को शारीरिक और भावनात्मक रूप से जोड़े रखने के लिए जिम्मेदार होते हैं। एक साधारण स्पर्श या झप्पी रिलेशनशिप की ताजगी को कायम रखती है। यह दोनों के बीच आत्मीयता को बढ़ाने के साथ ही आपके आत्मसम्मान को भी ऊंचा बनाए रखती है। झडियां सावन की हैलो/गुडबाय गले मिलना, होंठों पर छोटी सी किस या फिर हाथ थामकर विदा लेना। कुछ भी ऎसा जो सुबह-सुबह आप दोनों को करीब होने का अहसास दे। फिर देखें यह अहसास पूरे दिन आपके मानस पर छाया रहेगा, शाम को फिर से मिलने तक आप दोनों खुशी और उमंग महसूस करेंगे। गुड मॉर्निüग या गुड नाइट किस रात को सोते समय और सुबह जागने के समय साथी को दें एक प्यार भरी किस। यह आपकी फिजिकल और इमोशनल बांडिंग को मजबूत बनाने का काम करती है। हाथों में हाथ हाथों में हाथ थामने के दिन उम्र के साथ लद थोड़े ही गए हैं। प्यार से हाथ थामें उनका। यह न सिर्फ आपको भावनात्मक रूप से करीब होने का अहसास देगा बल्कि सुरक्षा का भी अहसास कराएगा। जो किसी भी रिश्ते के लिए जरूरी है। तो सार्वजनिक रूप से साथी का हाथ थामने में झिझक कैसी। हग या किस जब भी साथी आपके लिए कुछ करे, उन्हें धन्यवाद जरूर कहें। चाहे फिर वह आपकी किचन में मदद हो, शॉपिंग पर ले जाएं या घर के काम में मदद करें। गले लगकर हर बार तहेदिल से शुक्रिया अदा करें। स्पेशल होने का एहसास पैर, पीठ या सिर की मसाज या पेडिक्योर या मेनीक्योर। इसी से आप उन्हें वह सुकून दे सकती हैं जो आप दोनों को एक दूसरे के लिए स्पेशल होने का अहसास कराता है। यह उन्हें आपके प्रति संवेदनशील, लविंग और केयरिंग बनाता है। प्यार भरा स्पर्श कभी भी किस करके चौंका दें। उनकी शर्ट की कॉलर को सीधा करें। बालों में अंगुलियां फिराएं। या कुछ और प्यार भरी शरारतें ..। जो उन्हें रोमांचित कर दे। एहसास बॉडी में उन केमिकल्स का प्रवाह बढ़ाते हंै जो जोड़ों में नजदीकियों के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह छोटे-छोटे काम हमने बंद क्यों कर दिए हैं? गोद में सिर रखकर सो जाएं एकांत के फुर्सत के पलों में उनकी गोद में सिर रख दें। यह सिंपल और नॉन-सेक्सुअल स्पर्श आपके अंदर तक एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर जाता है जो आपके इस प्यारभरे रिश्ते के लिए बेहद जरूरी है। ओढ़ा धरती का लहरिया सावन में लहरिया क्यों पहनते हैं? और जब निगाह हरे-भरे बागों, खेत खलिहानों और पहाड़ों पर जाती है तो जवाब अपने आप मिल जाता है। प्रकृति के श्ाृंगार का मौसम है यह। धरती ने हरियाली का लहरिया ओढ़ लिया है। हवा चलती है तो लहर में, पानी में तरंगे उठती हैं तो लहर में। उसी हरियाली, हवा और तरंग की लहर को अपने लिबास में उतार लिया है हमने लहरिये के रूप में। बाजार से अभी-अभी लौटी है अंकिता, हाथ में खूब सारे शॉपिंग बैग्स। थकान के बावजूद चेहरे से खुशी और उमंग जैसे टपक रही है। सावन और तीज इससे पहले भी आए हैं उसके जीवन में लेकिन यह तीज कुछ खास है, सगाई के बाद से ही वह तीज के मौके पर ससुराल से आने वाले सिंजारे का इंतजार कर रही है। तीज भी नजदीक है और उससे पहले सारी तैयारी कर लेना चाहती है अंकिता। वह अकेली नहीं है, हर युवा लड़की को इंतजार रहता है सावन का। नवविवाहिताओं, कुंआरी लड़कियों और प्रौढ़ वय महिलाओं तक, हर कोई इस समय लहरिया पहनने, हाथों में मेहंदी रचाने, श्ाृंगार करना चाहती हैं। प्रकृति ने ही इस महीने को खास बनाया है तभी हर महिला और युवतियों के लिए सावन विशेष महत्व रखता है, यही वजह है कि इसे श्ाृंगार का महीना कहा गया है। लोकरंग लहरिया हर ओर जहां देखो लहरिए की बहार है। हरा, गुलाबी, रानी, नीला, चंपई, लाल और भी न जाने कितने रंगों के कॉम्बिनेशन में लहरिया छाया हुआ है। मौसम का आनंद दोगुना करता लहरिया हर युवती की पसंद बना हुआ है। न सिर्फ साडियां बल्कि सलवार सूट और दुपट्टे भी लहरियामय हो रहे हैं। शादी के बाद जिनका पहला सावन है वह मायके में हाथों में मेहंदी रचाए लहरिया पहनकर सहेलियों की चुहलबाजियों के बीच सावन का आनंद उठा रही हैं। लहरिये का जिक्र हो तो जरूरी नहीं कि केवल साड़ी ही पहनी जाए, कामकाजी महिलाएं पसंद और आराम के हिसाब से लहरिया सूट-कुर्ते पहनकर शौक फरमा रही हैं। शेष पृष्ठ 18 पर लहरिया के साथ मोठड़ा भी काफी पसंद किया जाता है। चटख रंग पसंद करने वाली महिलाओं के लिए यह पर्व इन परिधानों की वजह से भी कुछ खास बन जाता है। आप भी लहरिया और मोठड़ा लेने का मन बना रही हैं तो एक नजर बाजार पर डाल लें क्योंकि हर बार इनके पैटर्न बदलते रहते हैं। इस सीजन में लहरिया और मोठड़ा में टे्रडिशन विद मॉडर्न डिजाइन्स का फ्यूजन चलन में है। मेहंदी-श्रंृगार और गहने लहरिया अकेला नहीं है सावन में, अवसर के हिसाब से मेकअप भी साथ है। मेहंदी, काजल, सिंदूर, लाली, महावर। नख से शिख तक सब कुछ खास। मेहंदी रचे हाथ खुद ब खुद उनकी खुशी को बयां करते नजर आते हैं जैसे। वैसे तो पूरा सावन ही श्रृंगार का मौसम है लेकिन सिंजारे-तीज पर मेंहदी लगाने और श्रंृगार का खास महत्व है। इनके साथ ही ऎसेसरीज का भी उतना ही महत्व बना हुआ है। बाजार में उपलब्ध मैचिंग और इन दिनों प्रचलित विक्टोरियन जूअलरी खास डिमांड में है। टीवी सीरियलों ने जूअलरी की मांग में कुछ ज्यादा ही इजाफा कर दिया है। सास का दुलार
झूले नहीं तो क्या.... शादी के बाद पहले सावन में युवतियां मायके में सहेलियों की हंसी-ठिठोली के बीच झूले झूलते हुए विरह का समय बिताया करती थी। वक्त के साथ सावन के झूले भले ही अब बीती बात हो चले हैं लेकिन त्यौहारों के बुनियादी रूप नहीं बदल पाएं हैं। पिछले साल दिसंबर में दुल्हन बनी सुप्रिया का यह पहला सावन है और वह पूरा महीना बिताने मायके आई हुई है। वह बताती हैं, परंपराएं आज भी उसी रूप में मानी जा रही हैं। माना जाता है कि सास और बहू पहला सावन साथ नहीं रहती, इसलिए उसे पहले सावन के लिए मायके जाना होता है। सुप्रिया जैसी कई नवविवाहिताएं और भी हैं जो इस परंपरा का निर्वाह करने मायके आई हुई हैं।
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