शहर की ये नई लड़कियां अपने कायदे खुद गढ़ रही हैं। पुराने नियम टूट रहे हैं। काम, प्रोडक्शन, गति, गुणवत्ता सबको लेकर इनका अपना फंडा है, अपनी राय है अपनी शैली है। वे नतीजों पर भरोसा करती हैं। काम के घंटों पर नहीं। आज की ये लड़कियां अपने "ओल्ड स्कूल रूल्स" को बेहद समझदारी से बदलने में कामयाब हो रही हैं ठहराव बोरियत भरा हो सकता है चाहे वह आपका हेअर स्टाइल ही क्यों न हो। कुछ ही समय में वह ऎसा लगने लगता है जैसे एक युग पुराना हो, और आप उसे चुपके से बदल देना चाहती हैं।आज की शहरी लड़की भी पुराने कायदे चुपचाप बदल रही है। संशयी, बुद्धिजीवी और आपको परंपराएं सिखाने वाले संस्कार कहीं दुबक रहे हैं। वे नतीजे देने वाली साबित हो रही हैं। काम को गहराई से समझने के लिए उलझे रहना कतई जरूरी नहीं ओल्ड स्कूल नियम किसी काम में जितना इन्वॉल्व होओगे उतना ही गहराई से समझोगे। स्पीड तो बहुत जरूरी है। समय सीमित, काम भी ज्यादा। पुराने तरीकों से एक दिन में कितने टास्क हो पाएंगे? न्यू स्कूल नए लोग स्पीड के प्रति इतने आसक्त नहीं हैं।जरूरी है हाथ के काम को पूरा करना । यह एक नई तरह की प्रोडक्टिविटी है जिसमें काम या चीज की क्वालिटी का महत्व ज्यादा है। सिर्फ मीटिंग्स और प्लानिंग ही करते न रह जाएं ओल्ड स्कूल नियम योजनाओं के लिए ढेरों मीटिंग्स और प्लानिंग ज्यादा अहम है। न्यू स्कूल नियम मीटिंग्स-प्लानिंग्स भूल जाएं, यह सिर्फ समय की बर्बादी है। कार्यकुशलता का नंबर बाद में, काम को शुरू करना कहीं ज्यादा बड़ी चुनौती है। पेपरवर्क आउट, तकनीक इन ओल्ड स्कूल नियम सेटेलाइट चैनल्स के जमाने में स्लो मोशन । उस जनरेशन के समय कंट्रोल प्लस ऑल्ट प्लस डिलीट के ऑप्शन कहां थे। कितने लकी हैं ना हम। न्यू स्कूल नियम तकनीक के साथ चल रही हैं। आज काम पेपरलेस होते जा रहे हैं। क्योंकि हर चीज दिनों दिन डिजिटल हो रही है। मल्टी टास्किंग नहीं, मल्टी प्रोजेक्ट-सिंगल टास्क बनें ओल्ड स्कूल नियम एक समय में ढेर सारे काम हाथ होने का मतलब था खुद के बारे में यह दर्शाना कि आप कितने प्रोडक्टिव हैं। न्यू स्कूल नियम मल्टी-प्रोजेक्ट और सिंगल टास्क। एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं तो उसके खत्म होने पर बॉस की प्रतिक्रिया का इंतजार। बॉस के रिएक्शन के इंतजार के दौरान टास्क बी प्रोजेक्ट पर मनन। नतीजतन एकाग्र हो कर अगले लक्ष्य पर काम हो पाता हैे। काम कम, क्वालिटी ज्यादा ओल्ड स्कूल नियम अच्छे मैनेजर वही हैं जो ज्यादा काम करें ज्याादा समय अॅाफिस में नजर आएं। फिर चाहे क्षमता से बाहर जाकर ही क्यों न काम करना पड़े। न्यू स्कूल नियम ज्यादा के चक्कर में क्वालिटी कमजोर होती चली जाती है। क्वालिटी पर ध्यान दिया जाना बेहतर संस्थान को भूल जाएं, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें ओल्ड स्कूल नियम ऑर्गेनाइज्ड रहें। वे लोग अच्छे माने जाते हैं जिनकी ड्रॉज और अलमारियां फाइलों से अटी हों। न्यू स्कूल नियम टेक्नोलॉजी से जुड़े। समय बचेगा। बेगार और सिरदर्दी से भी बचेंगे। अपना समय और मेहनत दूसरे जरूरी लक्ष्यों में लगाएं। टालमटौल से बाहर निकलें ओल्ड स्कूल नियम टालमटौल फैसला लेने में देरी की वजह है। फैसला लेने में निचले स्तर से सोचना होता है, टॉप लेवल के फैसलों में दिक्कत आती है। बड़े फैसलों में महत्वपूर्ण सूचनाओं का होना जरूरी है। न्यू स्कूल नियम आजादी, स्वतंत्रता,कोलेबोरेशन। नई सोच वाले संस्थान लड़कियों को स्वतंत्रता से काम करने की आजादी दे रहे हैं घंटों के हिसाब से काम अब जरूरी नहीं ओल्ड स्कूल नियम लंबे समय और ज्यादा काम वाले लोग संस्थान के चहेते होते थे। न्यू स्कूल नियम कुछ घंटे काम, आजादी के साथ। लड़कियां तनावमुक्त होकर काम कर रही हैं। वे काम से जुड़ने और आनंद उठाने का मौका हासिल कर रही हैं। बेहतर परिणाम प्राप्त कर रही हैं। क्या अब भी कुछ और कहने की जरूरत है? शहर अलग-अलग, धंधा एक शिप्रापथ थाना इलाके में करीब दस दिन पहले एसएफएस मानसरोवर के पॉश एरिया में मकान से आठ लोगों को वेश्यावृत्ति के आरोप में पकड़ा, इनमें सात महिलाएं हैं। 20 से 30 साल की ये युवतियां दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बनारस आदि बड़े शहरों से हैं। इनमें एक विदेशी भी थी। ये सभी पिछले सप्ताहभर से इस शहर में एक सैक्स रैकेट के लिए काम कर रही थीं। एक रूखसत, एक लापता महाराष्ट्र की रहने वाली चौबीस साल की पिंकी तनाव में थी। सुभाष चौक स्थित मकान में तनु के साथ रहती थी। रविवार सुबह पिंकी की तबियत बिगड़ी तो तनु पड़ोसी युवक के साथ उसे अस्पताल लाई। कुछ देर में पिंकी की मौत हो गई, तब से तनु लापता है। एक सप्ताह पहले ही किराए पर रहने आई थीं। वह बार डांसर थीं। उसकी शादी भी टूट चुकी थी। इसी तनाव में वह नशा करने लगी थी। देर शाम घर आतीं। शनिवार को भी देर से आई थीं। पुलिस को कमरे से नींद की गोलियां व अन्य दवाएं मिली हैं। पुलिस ने दवा के ज्यादा सेवन से मौत होने की आशंका जताई है। शादी के झांसे पर एतबार वह झांसी की रहने वाली थी। जयपुर के रामगंज इलाके में अपनी बहन के यहां रहनेे आई और बाद में यहीं किसी क्लिनिक में बतौर नर्स काम करने लगी। इसी क्लिनिक के कंपाउंडर मशकूर से उसे प्रेम हो गया। मशकूर ने उसे फूटा खुर्रा में एक कमरा भी दिला दिया और शादी का झांसा देकर उससे संबंध बनाए। साल भर तक मामला यूं ही चलता रहा अब जब युवती ने शादी के लिए कहा तो वह मुकर गया। भारी पड़ा भरोसा तेईस साल की बैंककर्मी के साथ उसके सहकर्मी और दोस्त ने दुष्कर्म का प्रयास किया। न्यू सांगानेर रोड निवासी युवती अपनी सहेली से मिलने शास्त्रीनगर गई थी। देर होने पर उसने सहकर्मी मुकेश चौधरी को घर छोड़ने के लिए बुला लिया। मुकेश उसे घर छोड़ने की बजाय खातीपुरा निवासी दोस्त पिंटू के घर ले गया जहां पिंटू ने उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। विरोध करने पर धमकाया और फिर सुबह साढ़े चार बजे उसे उसके कमरे पर छोड़ दिया।
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