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Tuesday, 07 February, 2012
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पिटती हैं पत्नीयां
Wednesday, August 04, 2010, 11:33 hrs IST
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Khushboo
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तो क्या हुआ? गलती करेंगी तो पिटेंगी नहीं?
यूं भी तो ढोल, गंवार, पशु और नारी कब सराहना के योग्य माने गए हंै?
पत्नियों को भी लगता है कि पिटने के बाद रिश्ता और मजबूत होता है।
लगता है कि पति ने अपना हक समझा है। पिटनेवाला ही जब इस
मानसिकता का हो तो कोई क्यों ना उस पर हाथ उठाए।
आखिर यही तो मर्दानगी है कि हम जोरू के नहीं, जोरू हमारी गुलाम है। गुलामी की इसी दास्तां पर खुशबू की खास रपट
एक सनसनीखेज रिअलिटी शो के जरिए राहुल महाजन की दुल्हन बनी डिंपी गांगुली को अपने पति के हाथों पिटना पड़ा। मारपीट के बाद डिंपी राहुल का घर छोड़कर चली गइंü। लेकिन फिर राहुल के ही घर लौट आई। डिंपी कोलकाता की मॉडल हैं। मोबाइल पर महज एक मैसेज आने की बात को लेकर राहुल ने डिंपी को बुरी तरह पीटा। डिंपी कहती हैं कि छोटी-छोटी बातों को लेकर हाथ उठाना राहुल की आदत है। डिंपी राहुल की दूसरी पत्नी हैं। पहली पत्नी श्वेता सिंह के साथ भी राहुल यही सब कर चुके हैं। श्वेता राहुल के बचपन की दोस्त थीं लेकिन पत्नी बनते हीशुरू हुई मार-पीट के कारण वह तलाक ले चुकी हंै।
यह कहानी केवल एक डिंपी की नहीं, बल्कि ना जाने कितनी डिंपी हर रोज इस तरह हिंसा का शिकार होती हंै। अपने अहम् के चलते पति कभी सहन नहीं कर पाता कि पत्नी उसकी अधीनता से मुक्तहो। कोई दूसरा पत्नी की तारीफ भी करे तो पति शक की नजर से देखने लगता है। अनबन का सिलसिला शुरू हो जाता है और फिर एक दिन वह हाथ भी उठा देता है। लेकिन एक भारतीय नारी के लिए वह सिर्फ एक देवता ही बना रहता है। एक-दो बार की पिटाई तो वे मान के ही चलती हैं लेकिन चेतना तब लौटती है जब खतरा जान का बन जाता है।
हर स्त्री की चिंता
घरों में महरी का काम करने वाली सुशीला कहती है, "मारता है। बहुत मारता है, लेकिन जब नशा करता है तब। मैं भी सोचती हूं कि होश में नहीं है। हां बुरा तो जरूर लगता है, लेकिन यह तो सबके साथ होता है। अब एक मार के पीछे घर कौन बरबाद करे।" रेखा का पति तो थाली फैंककर मारता है। वह बताती है "पहले-पहल तो बहुत डरती थी। अब कोशिश करती हूं कि कोई गलती ना करूं । ऎसे ही चल रही है जिंदगी।" कहकर उसकी आंखें नम हो जाती हैं।
मेल ईगो हावी
राजस्थान राज्य महिला आयोग की सदस्य सचिव द्रौपदी मलिक का कहना है कि आज भी नारी को पैर की जूती ही समझा जाता है। हमारे पास करीब पचास फीसदी मामले महिला हिंसा के आते हैं, जिनमें महिलाओं के साथ उनके पति मारपीट करते हैं। समाज पर पुरूषों का वर्चस्व होने कारण पत्नी पर हाथ उठाना वे अपना हक समझते हैं। पुरूषों का मेल ईगो हावी रहता है। महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली रत्ना जैन कहती हंै कि महिलाओं की रक्षा के लिए कानून तो बना दिए गए है। लेकिन इन मामलों में महिलाएं स्वयं इन कानूनों का सहारा लेना नहीं चाहतीं। वे नहीं चाहती कि उनके पति को कोई सजा मिले। वे चाहती हैं कि आपसी समझाइश से काम हो जाए और उनका घर बसा रहे।
वह आजाद है?
पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली स्त्री उनकी सहयोगी तो हो सकती है, लेकिन उनकी पत्नी हो यह पुरूषों को स्वीकार नहीं। यह कहना है समाजशास्त्री डॉ. निशा वर्मा का। निशा वर्मा के अनुसार अपनी जरूरतों को पूरा करने और बढ़ती महंगाई के कारण पति-पत्नी दोनों नौकरी करते हैं। पर जब कार्यक्षेत्र में पत्नी पति से आगे बढ़ती नजर आती है और जब पत्नी की तारीफ हो तो यह पति के बर्दाश्त से बाहर होता है। वह उस पर शक करने लगता है, दोनों के बीच झगड़ा होने लगता है और बात मारपीट तक पहुंच जाती है। डॉ. वर्मा कहती हंै औरतें कितनी ही आगे बढ़ जाए, लेकिन आज भी परिवार वालों और पति के लिए वह घर में कैद नारी ही है।
दिखावे पर विश्वास
मनोचिकित्सक डॉ. कृष्णा शर्मा के अनुसार पति का पत्नी पर बार-बार हाथ उठाना किसी तरह की कोई मानसिक बीमारी नहीं है। लेकिन वह जानबूझ कर एक तरह के मनोवैज्ञानिक विकार को अपने ऊपर हावी कर लेता है। ऎसा ज्यादातर उन लोगों के साथ होता है। जिनको बचपन से ही मां-बाप, बहन व परिवार के सदस्यों ने लाड़ला बेटा, लाड़ला भाई मानकर सिर-आंखों पर बिठाया हो। पत्नी से भी उसकी यही अपेक्षा होती है। अगर पत्नी किसी बात का विरोध कर देती है तो वह अवसादग्रस्त हो जाता है। पत्नी पर हाथ उठाता है। जितना ज्यादा वह अवसाद में होता है उसका व्यवहार उतना ही क्रूर होता जाता है। केवल सम्मान और आपसी समझ से ही ऎसे व्यवहार पर काबू पाया जा सकता है। साइकोलॉजिस्ट राकेश कुमावत कहते हैं कि ग्लोबलाइजेशन के इस युग में सभी रिश्तों के बीच दिखावा आ गया है। फिर चाहे वह रिश्ता पति-पत्नी का ही क्यों ना हो। पति चाहता है कि आदर्श पत्नी की तरह उसकी सेवा करे, प्यार भरी बातें करें और जब उसके दोस्त आएं तो चेहरे पर मुस्कान रखे। ऎसा करने में थोड़ी भी चूक हो जाती है तो पति के ख्वाबों की दुनिया चूर-चूर हो जाती है। वास्तविकता स्वीकार नहीं पाता। एक तरह का मनोविकार हावी हो जाता है जिसे शांत करने के लिए वह बार-बार पत्नी पर हाथ उठाता है।
मुश्किल से उठता है कदम
महिला थाना दक्षिण के एसएचओ जसपाल सिंह का कहना है कि दहेज संबंधी जितने मामले आते हैं, उनमें पति की मारपीट का उल्लेख होता है। हालांकि महिलाएं कठोर कदम बहुत मुश्किल से ही उठाती हंै लेकिन इन सबमें वह झगड़े को खत्म करने का प्रयास भी नहीं करती। वह रोज मार खा लेगी पर बहस जारी रखेंगी। पति भी चुप नहीं रहता। तर्क-वितर्क करता रहता है। लड़की ससुराल की तुलना बात-बात में मायके से करने लगती है, झगड़े और भी बढ़ जाते हंै।
दरअसल, अन्याय उसी के साथ होता है जो अन्याय सहता है। जिस दिन स्त्री के आत्मसम्मान को कुचलने का पहला प्रयास होता है, प्रतिकार भी तब ही होना चाहिए। मारने की अमानवीय परंपरा को खुद स्त्री ही पालती-पोसती आई है। वह भीतर से कमजोर है। लता की तरह जिसे हमेशा सहारा चाहिए। कौन होगी पहली स्त्री जिसने पहली बार पिटाई का स्वाद चखा होगा और फिर इसे औरो के लिए भी स्वीकार्य बनाया होगा? कौन होगी वह स्त्री जिसने पिटकर भी उसे स्वामी माना होगा? ज्यादा दूर जाने की जरूरत है क्या? आसपास ही नहीं मिल जाएंगी?
पायल रोहतगी को भी मारा
राहुल के बारे में यह सब सुनकर मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ। पार्टनर बदलना उसकी फितरत है। स्वयंवर भी उसके लिए एक तिकड़म ही था। उसने मुझे इस शो में भाग लेने के लिए बड़ी राशि ऑफर की थी। मैं इसे लेकर काफी गंभीर हो गई थी, लेकिन यह मेरी मूर्खता ही थी। राहुल बहुत ही गुस्सेवाला है, वह अपना आपा खो देता है। एक बार "बिग बॉस 2" की शूटिंग के दौरान मैं 15 मिनट लेट हो गई थी। इतनी-सी बात पर उसने मुझ पर आरोप लगाया कि मेरा को-स्टार इरफान खान के साथ अफेयर चल रहा है। तब मैं और राहुल लिव-इन में थे। आठ महीने मैं उसके साथ रही। जब हम घर पहुंचे तब उसने मेरे सिर को दरवाजे पर दे मारा। सिर से खून बहने लगा। यह देख वो मुझे मनाने लगा और उसने डॉक्टर को बुलाया। उसने बताया कि बाथरूम में गिर जाने से मुझे चोट आई है।
ये जानेमाने रणबांकु रे
राहुल महाजन
राजा चौधरी
अदनान सामी
आलोक धन्वा
शक्ति कपूर
मोहसिन खान
राजेश खन्ना
आदित्य पंचोली

महिलाओं के साथ मारपीट के मामले
वर्ष 2009-10
राजस्थान राज्य महिला आयोग में दर्ज कुल 1134 मामले।
इनमें से महिलाओं के साथ मारपीट के मामले-491
महिला थाना दक्षिण जयपुर
जनवरी 2010 से जुलाई 2010 तक 117 दहेज संबंधी केस।
इनमें से सभी में मारपीट का मुख्य रूप से उल्लेख।
महिला थाना पूर्व
जनवरी 2010 से जुलाई 2010 तक दहेज संबंधी 101मामले । 95 फीसदी में मारपीट का मुख्य रूप से उल्लेख
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