वह बेहद महत्वपूर्ण क्षण था जब फ्लाइंग लेफ्टिनेंट स्नेहा शेखावत ने वायु सेना की 144 सदस्यों के दस्ते का नेतृत्व किया, जिसमें तीन वीमॅन फ्लाइंग ऑफिसर हिना पुरी, अनुपम चौधरी और पूजा नेगी शामिल थीं। उस ऎतिहासिक पल और अगली उड़ानों को खुशबू से साझा करते हुए स्नेहगर्विता स्नेहा शेखावत
मेरा लक्ष्य यहीं पूरा नहीं होता। मैं अभी और भी उड़ान लेना चाहती हूं। फ्लाइंग करियर की तो अभी शुरूआत ही हुई है, मुझे इसमें अभी और आगे बढ़ना है, यह कहना है फ्लाइंग लेफ्टिनेंट स्नेहा शेखावत का। सीकर की बेटी और जयपुर की बहू स्नेहा ने दिल्ली के राजपथ पर 63वें गणतंत्र दिवस समारोह में वायुसेना की परेड का नेतृत्व किया। इसी के साथ स्नेहा राजपथ पर सलामी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी बन गई हैं। हिंडोन एयरबेस में एयर ट्रांसपोर्ट एवरो फ्लाइ करने वाली फ्लाइंग लेफ्टिनेंट स्नेहा बचपन से ही डिफेंस में अपना करियर बनाना चाहती थीं। स्नेहा ने बताया, मैं राजस्थान की बेटी हूं, लेकिन मेरा जन्म गांधी नगर, गुजरात में हुआ है। स्कू लिंग गुजरात से ही पूरी की और बीएससी जोधपुर से। मेरा सपना डिफेंस में ही करियर बनाने का था, इसलिए मैंने गे्रजुएशन पूरी होते ही एसएसबी सर्विस सिलेक्शन बोर्ड फाइट किया। पहली ही बार 2007 में मैं एनडीए में चयनित हो गई।
एनडीए में ट्रेनिंग का समय बहुत ही अच्छा बीता। यह ट्रेनिंग बहुत टफ होती है। ट्रेनिंग के समय यह नहीं देखा जाता कि ट्रेनी मेल है या फीमेल। ट्रेनिंग शेड्यूल बहुत टाइट होता है। ट्रेनिंग के दौरान मेरी परफॉर्मेस को देखते हुए मुझे बेस्ट लेडी पायलट का अवॉर्ड भी मिला। यह मेरा पहला अचिवमेंट था। 2008 में मुझे अपनी पहली पोस्टिंग हिंडोन एयरबेस में मिली। 2009 में मैंने एयर ट्रांसपोर्ट एवरो उड़ाना शुरू किया और आज भी यही एयरक्राफ्ट उड़ा रही हूं।
पहले इनकार फिर इकरार मेरे पति सौरव जादौन एयरफोर्स में ही फ्लाइंग लेफ्टिनेंट हैं। हमारी शादी को आप लव कम अरेंज कह सकते हैं। शुरूआत में जब उनकी तरफ से शादी का प्रपोजल आया तो मैंने इंकार कर दिया था। कुछ समय निकलने पर मुझे सौरव अच्छे लगने लगें और अहसास हुआ कि वह बहुत अच्छे जीवन साथी बन सकते हैं। मैंने शादी के लिए हां कर दी। पिछले साल नवम्बर में मेरी शादी सौरव से हो गई। सौरव अभी कोयम्बटूर में पोस्टेड हैं। मेरा निर्णय एक दम सही था, वास्तव में वे बेहतरीन जीवन साथी हंै।
सपोर्ट से बढ़ते है कदम महिलाएं तभी आगे बढ़ सकती है जब वह खुद पर विश्वास रखें। इस विश्वास के साथ जब अपनों का सपोर्ट भी मिलने लगे तो कदम ऊंचाइयों को जरूर छूते हैं। पहले मुझे मम्मी-पापा और भाई का और अब इनलॉज का सपोर्ट मिल रहा है, इस वजह से ही मैं अपने देश के लिए कुछ कर पा रही हूं। मेरा मानना है कि बेटियों को आगे बढ़ाने की सोच उसी घर में जन्म लेती है, जो शिक्षित होते हैं। मेरे पिता महावीर सिंह गुजरात के राज्यपाल कार्यालय में सचिव हंै और मां जड़ाव कंवर परफेक्ट होम मैकर। भाई सीए है। मेरे ससुराल पक्ष में भी मम्मी विजय सिंह और पापा रवीन्द्र पाल सिंह दोनों जयपुर में अध्यापक हैं। देवर कैप्टन वैभव सिंह भी आर्मी में हैं।
आम आदमी से मिलता सम्मान मुझे यह देखकर बहुत खुशी होती है कि आम आदमी जब किसी महिला को अधिकारी के तौर पर देखता है तो उसे बहुत सम्मान देता है। मुझे लगता है कि महिलाएं जब आगे बढ़ती हैं, तो उन्हें कोई खास सम्मान नहीं मिलता, लेकिन जब डिफेंस से जुड़ती हैं तो उन्हें समाज में काफी इज्जत दी जाती है।
फिटनेस पर देती हूं ध्यान समय मिलने पर म्यूजिक या टीवी देखना पसंद करते हैं लेकिन मुझे इनमें दिलचस्पी नहीं है। खाली समय मिलने पर फिटनेस पर ही ध्यान देती हूं। मुझे शाम को ही थोड़ा समय मिल पाता है। इस दौरान मैं जॉगिंग व योग करना पसंद करती हूं। योग से बहुत एनर्जी मिलती है और अच्छा महसूस होता है। पिछले कई सालों से मैं योग कर रही हूं और यह मुझे कम्प्लीट वर्कआउट लगता है।
रिश्तों को न लगे नजर मेरे इनलॉज बहुत ही अच्छे हैं। वह स्थितियों और प्राथमिकताओं को बखूबी समझते हैं। जब कभी ऎसा होता है कि घर में कोई फंक्शन होता है या कोई त्योहार होता है तो घर के सभी लोग एक साथ होते हैं, लेकिन मैं नहीं पहुंच पाती। ऎसे में वह मुझसे नाराज होने के बजाय मेरी स्थितियों को समझते हैं। उन्हें मेरे काम पर गर्व होता है। यही कारण है कि मैं भगवान से हमेशा यही प्रार्थना करती हूं कि हमारे इस रिश्ते को कभी किसी की नजर न लगे।
बहू नहीं बेटी है स्नेहा स्नेहा कीसास विजय सिंह और ससुर रवींद्र पाल सिंह का कहना है कि स्नेहा हमारी बहू नहीं बेटी है। वो इतनी समझदार और जिम्मेदार है कि हमारा परिवार ही नहीं यूपी का हमारा पूरा गांव कहता है कि स्नेहा जैसी बेटी अच्छे भाग्य वालों को ही मिलती है। विजय का कहना है कि स्नेहा एयरफोर्स ऑफिसर होने के बाद भी संस्कृति की जड़ों से गहरी जुड़ी हुई है और सभी रिवाजों को मानती है। ससुर रवींद्र का कहना है कि हम चाहते हैं कि स्नेहा के सभी सपने पूरे हो।
अपने बूते बनाई यिंगलक ने सरकार घर का नाम पो यानी केकड़ा है थाई प्रधानमंत्री का यूं तो वे हमारी गणतंत्र दिवस परेड की मुख्य अतिथि थीं, लेकिन उनकी मन मोहिनी सूरत ने सबका दिल मोहा। परेड के दौरान जब वे राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से बात करती जाती तो लगता हमारे देश की संस्कृति को समझने का प्रयास कर रही हैं। एक खूबसूरत प्रधानमंत्री का बायोस्केच यिंगलक शिनावात्रा पिछले साल थाइलैंड की पहली महिला प्रधानमंत्री चुनी गईं।
थाइलैंड के इतिहास में गत साठ वर्षो में चुने गए प्रधानमंत्रियों में सबसे कम उम्र की भी हैं। वे 44 की हैं। एक और उपलब्घि जो उनके खाते दर्ज है, वो यह कि थाइलैंड के इतिहास में केवल दो बार ऎसा हुआ कि किसी एक पार्टी को इतना बहुमत मिला की वो अकेले अपने बूते सरकार बना सके। हालांकि यिंगलक के लिए यह खुशियां तकलीफ भरी राह से गुजरी हैं।
उनकी फ्यू थाई पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में इसलिए पेश किया क्योंकि उनके भाई को सैनिक क्रांति की वजह से देश छोड़ना पड़ा था। उनके भाई थाकसिन शिनावात्रा भी थाइलैंड के प्रधानमंत्री रह चुके हैं, लेकिन सैनिकों ने बगावत कर तख्ता पलट दिया और थाकसिन को मजबूरन देश छोड़ना पड़ा। देश छोड़ने के बावजूद वे लगातार अपनी पार्टी के संपर्क में बने रहें और यिंगलक को चुनावी मैदान में उतारा। यिंगलक ने चुनावी चुनौतियों का सामना किया और थाईलैंड की 28वीं प्रधानमंत्री के रूप में चुन ली गई।
राजनीति की दुनिया में प्रवेश करने से पहले यिंगलक ने बिजनस की दुनिया में भी नाम कमाया। उन्होंने अपने करिअर की शुरूआत अपने बड़े भाई थाकसिन शिनावात्रा के द्वारा स्थापित बिजनैस में एक एग्जीक्यूटिव के रूप में की। बाद में वह प्रॉपर्टी डवलपर एस असेट की अध्यक्ष बनी और एडवांस इन्फो सर्विस में मैनेजिंग डाइरेक्टर भी बनीं। यिंगलक के पर दादा सेंग सैइखू मूलत: चीनी थे।
बाद में वह चियांग माइ में बस गए। यिंगलक के पिता लेेर्ट ने यिंदी रेमिंगवोंग से शादी की जो चियांग माइ की प्रिंसेस की बेटी थीं। लेर्ट ने राजनीति के क्षेत्र में कदम रखा और चियांग माइ से एमपी बने। लेर्ट और यिंदी के नौ बच्चों में से यिंगलक सबसे छोटी हैं। उन्हें सब पो नाम से बुलाते हैं, थाई में इसका मतलब क्रेब यानी केकड़ा है।
करूणा शर्मा
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