जयपुर। आम जरूरत की खाने-पीने की चीजों की शुद्धता व ताजगी जांचने के लिए सरकारी कार्यालयों की लंबी प्रकिया और अधिकारियों के चक्कर काटना अब ज्यादा दिन नहीं। राज्य सरकार जल्द ही जनता को ऎसा किट मुहैया कराएगी, जिससे आम लोग खुद किसी भी खाने-पीने की चीज को खरीदने के बाद उसकी शुद्धता को जांच सकेंगे। साथ ही उनकी जांच की अधिकारिक मान्यता भी रहेगी।
हाल ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देशों के बाद मुख्य सचिव टी. श्रीनिवासन ने अधिकारियों को इसकी तैयारी करने को कहा है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि लोगों को न केवल खाद्य सुरक्षा मिले, बल्कि शुद्ध व ताजा चीजें ही मिलें। इस किट को तैयार करने के पीछे सरकार की मंशा है कि लोगों को शुद्ध खाने-पीने का अधिकार दिया जाए।
अभी यह है हाल
* बाजार में पेट्रोल, दूध आदि की शुद्धता जांचने के उपकरण तो हैं लेकिन वे आम जनता के लिए सहज उपलब्ध नहीं। * सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच की लंबी प्रक्रिया। * जानकार लोग और अनुभवी गृहिणियां फिलहाल खाने-पीने की चीज की खुशबू संूघकर, रंग देख, गाढ़ापन आदि को जांच कर ही संतुष्ट हो लेते हैं।
किट ने अशुद्ध बताया तो माल वापस
किट से जांच को सरकार मान्यता देगी, ताकि अशुद्ध साबित होने पर दुकानदार बिका हुआ माल वापस लेने से इनकार न कर सके। किट बनाने के लिए मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (जयपुर) सहित विभिन्न संस्थानों के इंजीनियरिंग विशेषज्ञों की सलाह ली जाएगी। तमिलनाडु में ऎसा किट बन चुका है।
क्या-क्या जांचेगा, कब तक मिलेगा
इस किट में मैकेनिकल, कैमिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। यह रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों घी, दाल, बेसन, आटा, दूध, तेल जैसी चीजों की शुद्धता जांचेगा। किट अगले कुछ महीनों में तैयार होने की उम्मीद है। इसे ऎसा बनाया जाएगा ताकि हर व्यक्ति इसका उपयोग कर सके।
कितने का होगा
आधिकारिक तौर पर अभी कीमत तय नहीं, लेकिन माना जा रहा है कि इसके बदले सरकार लोगों से केवल लागत वसूलेगी। इसके दाम सामान्य ही रखे जाएंगे, ताकि आम लोग खरीद सकें।
उपेन्द्र शर्मा.
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