जयपुर। सांगानेरी गेट के पास फुटपाथ के नीचे मिले करीब 50 फुट गहरे प्राचीन कुएं की वास्तविक स्थिति तो पता नहीं चल पाई, लेकिन इतिहासकार व इंजीनियर कई तर्क देते हैं। छह दशक पुराने इस कुएं से पहले सिंचाई होती थी और बाद में इसे ढंक दिया गया होगा।
इतिहासकार रघुनाथ प्रसाद तिवाड़ी ने बताया कि परकोटे के बाहर पहले खेत थे। यह कुआं खेती करने के लिए ही बना था। आरयूआईडीपी के मुख्य अभियंता आर.सी. राठी ने बताया कि शहर के बाहर ऎसे अनेक कुएं थे, जो सिंचाई व पानी पीने के काम में आते थे। परकोटे के बाहर पहले मोतीडूंगरी रोड पर भी कुआं मिला था, जिसे संरक्षित कर दिया गया था।
यह खेतिहर कुआं था, जिसे समय परिवर्तन के साथ सड़क बनाते समय ढंक दिया गया होगा। नगर निगम के एक्सईएन चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि कुएं की वास्तविक स्थिति तो पता नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि पूर्व महाराजा रामसिंह ने परकोटे के बाहर रामनिवास बाग बनाया था। परकोटे व बाग के बीच खेतिहर जमीन की एक पट्टी रह गई थी। इसलिए इस कुएं का पानी सिंचाई के काम में आता रहा होगा।
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