जयपुर । नगर निगम अधिकारी शायद महापौर के अधिकारों से अनभिज्ञ हैं। इस कारण महापौर ने यूओ नोट (कार्यालय टिप्पणी) जारी कर अधिकारियों को अपने अधिकारों से रूबरू कराया है। यही नहीं नोट में महापौर ने सभी अधिकारियों को इनकी पालना के निर्देश भी दिए हैं।
बताया जाता है कि पिछले दिनों जेटिंग मशीन खरीद मामले में नगर निगम के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरसहाय मीणा ने अपने स्तर पर ही नियम बनाकर फाइल निविदा जारी करने के लिए भेज दी। महापौर व सीईओ को जब इसका पता चला तो उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि फाइल राज्य सरकार के पास स्वीकृति के लिए भिजवाई गई है, लेकिन इस मामले के बाद महापौर ने यूओ नोट के जरिए अधिकारियों को अपने अधिकारों की याद दिलाई है।
ये लिखा है यूओ नोट में
यूओ नोट में लिखा गया है कि महापौर नगरपालिका के वित्तीय और प्रशासन पर निगरानी रखेगा। किसी भी बैठक में विचाराधीन किसी मामले के संबंध में स्पष्टीकरण देगा, लेकिन उसमें "उस" पर मत नहीं डालेगा या उस पर कोई प्रतिपादन नहीं करेगा। तकनीकी अधिकारियों का काम भी अध्यक्ष के अनुमोदन से होगा। नगरपालिका, नगर निगम या नगर परिषद का शासन अध्यक्ष के अधीन होगा। अध्यक्ष के पास ही अधिकारियों का अधीक्षण और नियंत्रण होगा।
सीईओ को लेनी पड़ी थी अनुमति
पूर्व महापौर पंकज जोशी ने भी कुछ लोगों का स्थानांतरण कर दिया था। इसके बाद सीईओ ने महापौर की अनुमति लिए बिना कुछ लोगों के स्थानांतरण में बदलाव कर दिया। इस पर महापौर ने आपत्ति जताई तो सीईओ को महापौर की अनुमति लेनी पड़ी। यह तो नियमित प्रक्रिया है। महापौर सबसे बड़ा पद है और अधिकारियों को इसका ध्यान रखना पड़ता है। पूर्व महापौर भी इस तरह के निर्देश देते आए हैं। ज्योति खण्डेलवाल, महापौर
|
|
|
|
|
|
|