जयपुर। हाईकोर्ट ने प्रमुख शिक्षा सचिव, निदेशक माध्यमिक शिक्षा, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा और एनसीटीई के क्षेत्रीय निदेशक को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों ना राज्य में कार्यरत 7669 अप्रशिक्षित विद्यार्थी मित्रों को हटाने के आदेश दिए जाएं ?
न्यायाधीश अजय रस्तौगी ने यह अंतरिम आदेश प्रार्थी जसवंत सिंह व अन्य की याचिका पर दिए। एडवोकेट तनवीर अहमद ने बताया कि राज्य में वर्तमान में कार्यरत 15994 विद्यार्थी मित्रों में से 7669 अप्रशिक्षित हैं, जबकि कानूनी तौर पर केवल बीएड और बीसीएसटीसी डिग्री धारक ही विद्यार्थी मित्र हो सकते हैं। यदि वर्तमान स्थिति जारी रही तो प्रारंभिक शिक्षा को कभी ना पूरा होने वाला नुकसान होगा। याचिका में सभी अप्रशिक्षित विद्यार्थी मित्रों को हटाने और बीएड व बीएसटीसी प्रशिक्षित प्रार्थियों को ही नियुक्ति देने की गुहार की गई है।
विद्यार्थी मित्र नहीं जाएंगे डार्क जोन में
माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत विद्यार्थी मित्रों को शिक्षक तबादलों के लिहाज से प्रतिबंधित आठ जिलों में नहीं जाना पड़ेगा। गत दिनों प्रारंभिक स्कूलों में विद्यार्थी मित्रों को प्रतिबंधित जिलों (डार्क जोन) में भेजे जाने का निर्णय किया गया था। इसके बाद प्रमुख शासन सचिव अशोक सम्पतराम के पास इस संबंध में अपनी फाइल भिजवाई थी, लेकिन उन्होंने फाइल को मंजूरी नहीं दी। उप सचिव (मा.) महावीर प्रसाद वर्मा के अनुसार माध्यमिक स्कूलों में विषय अध्यापकों की कमी को देखते हुए यह निर्णय किया गया है कि विद्यार्थी मित्र अपने गांव-कस्बे से संबंधित स्कूलों में ही काम करेंगे, उन्हें प्रतिबंधित जिलों में नहीं भेजा जाएगा।
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