जयपुर। बजट में शहरी निकायों को राहत देने के लिए शहरवासियों की जेब पर "करंट" लगाया है। नए उपकर से शहरी निकायों को हर साल करोड़ों की अतिरिक्त आय होगी।
शहरी इलाकों में 100 यूनिट से ज्यादा बिजली का उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं पर 10 पैसे प्रति यूनिट का उपकर खराब आर्थिक स्थिति वाली 125 से ज्यादा शहरी निकायों को "राहत" देगा। इससे प्राप्त राजस्व को एक कोष में जमा कर उससे शहरी निकायों में विकास कार्य कराए जाएंगे।
मोबाइल टावर लगाने के रजिस्ट्रेशन और यूजर चार्जेज से होने वाली आमदनी भी शहरी निकायों को मिलेगी। इसी तरह शहरी विकास संस्थाओं और हाउसिंग बोर्ड के क्षेत्र में जमीन की नीलामी से मिलने वाले राजस्व का 15 फीसदी शहरी निकायों को देने की अनिवार्यता का भी फायदा होगा। अभी ये राशि जेडीए, जोधपुर विकास प्राधिकरण, यूआईटी एवं हाउसिंग बोर्ड संबंधित शहरी निकाय क्षेत्र में कराए काम के पेटे समायोजित कर लेते हैं।
लग सकते हैं और उपकर बजट में नगरीय विकास कर को तर्कसंगत बनाने एवं राजस्थान नगर पालिका अधिनियम-2009 में संशोधन कर शहरी निकायों को पावरफुल बनाने की घोषणा की है। इसके तहत शहरी निकायों को विभिन्न उपकर लगाने के अधिकार दिए जाएंगे और रोड लाइट टैक्स, व्हीकल एंट्री टैक्स जैसे कदम शहरी निकाय उठा सकेंगे।
अभी हालात ये हैं प्रदेश में 125 से ज्यादा शहरी निकायों की हालत खराब है। ये संस्थाएं अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन और अन्य सुविधाएं नहीं दे पा रहे हैं। आवासीय योजनाओं, गंदी बस्ती सुधार, कच्ची बस्ती पुनर्वास, सीवरेज परियोजनाओं, ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत सहायता एवं अनुदान मिलता है।
केंद्र की शर्तो के अनुसार योजना की लागत का कुछ हिस्सा राज्य सरकार और कुछ हिस्सा संबंधित शहरी निकाय को वहन करना होता है, लेकिन शहरी निकाय अपने हिस्से की राशि का इंतजाम नहीं कर पाने के कारण इन योजनाओं का फायदा नहीं उठा पा रही हैं।
इस समस्या के समाधान के लिए 400 करोड़ का फंड बनाया है। इसमें सरकार की ओर से 150 करोड़ रूपए का अंशदान देने की घोषणा की है। इस फंड से ये शहरी निकाय ऋण लेकर अपने हिस्से की राशि का इंतजाम कर सकेंगी।
|
|
|
|
|
|
|