जयपुर। डॉक्टरों की हड़ताल के चलते एसएमएस अस्पताल में व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रहीं। मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं सीनियर डॉक्टरों ने भी व्यवस्थाएं संभालने के बजाय रेजीडेंट डॉक्टरों का साथ देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। धन्वंतरि ओपीडी में रोजाना की तरह सुबह 8 बजे चहल-पहल शुरू हुई, सीनियर डॉक्टरों ने मरीजों को इलाज देना शुरू भी किया, लेकिन 9 बजे बाद फिर हड़ताल का माहौल बनते ही डॉक्टरों में कानाफूसी शुरू हो गई।
सुबह 11 बजे तक सभी सीनियर डॉक्टर मरीजों को ओपीडी में छोड़कर रेजीडेंट डॉक्टरों के साथ अस्पताल परिसर में इकट्ठा हो गए। उधर ओपीडी में जो डॉक्टर मरीज देख रहे थे, उन्हें भी उनके साथी अपने साथ खींच लाए। अस्पताल के सभी आउटडोर में कोई भी डॉक्टर नहीं था। मरीज डॉक्टरों का इंतजार करते रहे। कुछ मरीजों ने निजी अस्पतालों की राह पकड़ी।
विशेषज्ञ चिकित्सक लगाए हड़ताल को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी मेडिकल कॉलेजों में 75-75 विशेषज्ञ चिकित्सक लगाए हैं। वहीं जिलों से लगाए गए डॉक्टरों ने भी काम संभाल लिया है। आपातकालीन सेवा के लिए मेडिकल कॉलेजों में अलग से एम्बुलेंस भी लगाई गई हैं। चिकित्सा मंत्री एए खान ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों में 10 महिला रोग, 10 एनस्थिसिया, 10 सर्जरी, 10 मेडिसिन, 10 बाल रोग , 5 ईएनटी, 5 नेत्र रोग, 5 रेडियोलॉजी, 2 एफएम, 2 पीएसवाई व 1 त्वचा रोग विशेषज्ञ शामिल है।
जिलों से लगाए गए डॉक्टरों में एसएमएस मेडिकल कॉलेज में 59 डॉक्टरों ने कार्यभार संभाल लिया है। इसी प्रकार जोधपुर के मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में 62 चिकित्सकों, कोटा में 15 बीकानेर में 30, उदयपुर में 11 व अजमेर के मेडिकल कॉलेज में 24 चिकित्सकों ने कार्यभार संभाल लिया है। चिकित्सा विभाग में नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है।
बालोतरा से आए मरीज को लौटाया साढे सात घंटे का सफर तय कर एसएमएस अस्पताल पहुंचे किडनी की बीमारी से पीडित बालोतरा निवासी शंकर राम (30) को अस्पताल की इमरजेंसी के दरवाजे से ही लौटना पड़ा। मरीज के परिजनों ने बताया कि वे जोधपुर में हड़ताल के कारण जयपुर आए, लेकिन यहां भी सुरक्षाकर्मियों ने हड़ताल का हवाला देते हुए वापस भेज दिया।
फिर देने लगे सफाई दोपहर दो बजे डॉक्टर इमरजेंसी इंचार्ज कक्ष में बैठकर मीटिंग करते रहे। बाहर मरीज परेशान होते रहे। आधे घंटे बाद जब बैठक खत्म हुई तो मीडियाकर्मियों को देखकर डॉक्टर इमरजेंसी में जा बैठे। बाहर आकर सफाई देने लगे कि इमरजेंसी ठप नहीं की गई है।
जाना पड़ा निजी अस्पताल एक और महिला गंभीर हालत में अस्पताल आई। परिजन उसे जैसे-तैसे इमरजेंसी में ले गए, लेकिन डॉक्टर नहीं होने से परिजन मरीज को गोद में उठाकर बाहर ले आए और ऑटो में बिठाकर तुरंत निजी अस्पताल ले गए। वहीं पैर में चोट लगने से घायल हुआ महुआ निवासी भंवर सिंह (50) अस्पताल में आया तो उसे भी गार्डों ने वापस भेज दिया।
डायग्नोस्टिक सेंटर भी रहेंगे बंद शहर के डायग्नोस्टिक सेंटर भी मंगलवार को एक दिन के लिए बंद रहेंगे। डायग्नोस्टिक सेंटर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संजीव गुप्ता का कहना है कि डॉक्टरों व मेडिकल छात्रों के साथ हुई मारपीट के विरोध में यह फैसला लिया गया है।
निजी अस्पताल व नर्सिग होम्स भी रेजीडेंट डॉक्टरों के समर्थन में एक दिन की हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। सरकार के रवैये पर निर्भर है कि वह कब तक डॉक्टरों की सुनती है। निजी अस्पताल रेजीडेंट डॉक्टरों के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल में भी शामिल हो सकते हैं। -डॉ. एसएस अग्रवाल, प्रदेश सचिव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन
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