जयपुर । राजस्थान विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति के लिए गठित कमेटी बैठक शुरू होने से पहले ही विवादों में आ गई है। जानकारी के मुताबिक चयन समिति में शामिल एक सदस्य का चयन विवि संविधान के अनुरूप नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय शिक्षक इसके विरोध में खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि जब समिति के सदस्य का चयन ही संविधान के अनुरूप नहीं हुआ है तो कुलपति के चयन में पारदर्शिता भला कैसे रह सकती है।
गौरतलब है कि राजस्थान विश्वविद्यालय के स्थाई कुलपति के चयन के लिए 8 सितम्बर को नई दिल्ली में कुलपति चयन समिति की बैठक होनी है। तीन सदस्यीय इस समिति में एक सदस्य राज्यपाल के प्रतिनिधि, एक विश्वविद्यालय सिंडीकेट और एक सदस्य का चयन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से किया जाता है।
राज्यपाल ने अपने प्रतिनिधि के रूप में महाराष्ट्र के शिक्षाविद् शिवराज नाकड़े, विश्वविद्यालय की सिंडीकेट ने जोधपुर विश्वविद्यालय के एसएम टॉक का नाम समिति के सदस्य के रूप में दिया जिस पर किसी को एतराज नहीं था लेकिन जैसे ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने राजस्थान विश्वविद्यालय के ही पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. फुरकान कमर को आयोग की ओर से सदस्य नियुक्त किया पूरी समिति विवादों में आ गई।
विश्वविद्यालय के संविधान के मुताबिक राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त करने के लिए बनाई जाने वाली समिति में विश्वविद्यालय के किसी पूर्व कुलपति को सदस्य के रूप में शामिल नहीं किया जा सकता, यहां तक विश्वविद्यालय का कोई शिक्षक भी इस समिति का सदस्य नहीं बन सकता है। जबकि आयोग ने जिस व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि चुना है वह तो स्वयं कुछ माह पूर्व राजस्थान विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति रह चुके हैं। विरोध कर रहे शिक्षकों का कहना है कि ऎसा किए जाने से कुलपति के चयन को लेकर पक्षपात की संभावनाओं को जन्म देगा। इसलिए फुरकान कमर के स्थान पर किसी अन्य को समिति का सदस्य बनाया जाना चाहिए।
राज्यपाल को देंगे ज्ञापन
नियमों के विपरित जाकर किए गए इस चयन के विरोध में विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों ने अब इस संबंध में राज्यपाल को ज्ञापन देने का मानस बनाया है। इन शिक्षकों का कहना है कि वह कुलाधिपति से मांग करेंगे कि वह कमेटी की ओर से प्रस्तावित किए गए नाम पर अपनी स्वीकृति नहीं दें।
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