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Tuesday, 07 February, 2012
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सैकड़ों आंधियों पर भारी एक चिराग
Sunday, September 05, 2010, 23:40 hrs IST
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जयपुर । देश और समाज के हित में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों की श्ृंखला तो लंबी है, लेकिन इन्हीं में से कुछ शिक्षक ऎसे हैं, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में भी अपना धर्म निभाया है। इन शिक्षकों ने कुछ हटकर करने की ठानी और शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल कायम की। देश के लिए इन्होंने बड़ा योगदान दिया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर पेश है ऎसे ही कुछ शिक्षकों के उल्लेखनीय योगदान पर एक रिपोर्ट-

दिल और फेफड़ा खराब, फिर भी सेवा का जज्बा

राष्ट्रीय और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित रूपनारायण काबरा ने अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित कर दिया। 1930 में जन्मे काबरा इंटर की पढ़ाई ही पूरी कर पाए थे कि लंबी बीमारी के कारण उन्हें ढाई साल तक अस्पताल में रहना पड़ा। इन ढाई सालों के दौरान ही उन्होंने जीवन में कुछ हटकर करने की ठान ली थी, जिसकी शुरूआत अस्पताल में लाइब्रेरी की स्थापना के साथ हुई। 1957 से 1988 तक राजकीय सेवा में रहने के दौरान और उसके बाद भी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वाले काबरा को 1974 में पूर्व राष्ट्रपति स्व. जाकिर हुसैन से राष्ट्रीय स्तर का शिक्षक सम्मान प्राप्त हुआ।

60 वर्ष की आयु में एक फेफड़ा और दिल क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन आज भी काबरा शहर की एक निजी स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं। काबरा की 400 से भी अधिक रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनका कहना है कि हमें केवल सेवा देने का भाव रखना चाहिए, इससे आत्मसंतुष्टि मिलती है।

प्रदेश में शुरू किया पहला सरकारी अंग्रेजी स्कूल

वर्ष 1960 में तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में करियर की शुरूआत करने वाले आरआर हर्ष की योग्यता और कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से हो जाता है कि पूरे देश में हाल ही में शुरू किए गए माध्यमिक शिक्षा महाभियान को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने हर्ष की सेवाएं लीं। वर्ष 1991 में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान और 1992 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त कर चुके हर्ष ने प्रदेश का पहला अंग्रेजी माध्यम का सरकारी स्कूल शुरू किया। पोद्दार स्कूल के प्रधानाचार्य के पद पर काम करते हुए ही उन्होंने यह स्कूल शुरू किया था। हर्ष बालिका शिक्षा फाउण्डेशन के प्रथम सचिव और डीपीईपी के पहले उपनिदेशक भी रहे।

देहदान का लिया संकल्प

जयपुर जिले के खोराबीसल गांव में साधारण परिवार में पैदा हुए उमेश चंद गुप्ता ने 1971 में राजस्थान विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में एमएससी की उपाधि प्राप्त कर दरबार स्कूल से शिक्षक जीवन शुरू किया और पूरा जीवन सामाजिक और शैक्षिक कार्याें में समर्पित कर दिया। वर्ष 1971 से 1985 तक विभिन्न स्कूलों में उनकी कक्षाओंं का परिणाम संख्यात्मक और गुणात्मक दृष्टि से श्रेष्ठ रहने पर उन्हें कई बार सम्मानित किया गया। उन्हें 1998 में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान और 2004 में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने केंद्राधीक्षक की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया। गत वर्ष सेवानिवृत्त हुए गुप्ता ने नेत्रदान और देहदान का भी संकल्प लिया है।

कांग्रेस करेगी 135 शिक्षकों का सम्मान

प्रदेश कांग्रेस के शिक्षक प्रकोष्ठ की ओर से सोमवार को शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए 135 शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रामगोपाल शर्मा ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में होने वाले समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत होंगे।

गवर्नर व सीएम ने दीं शुभकामनाएं

राज्यपाल शिवराज पाटिल और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिक्षक दिवस पर राज्य के शिक्षकों को शुभकामनाएं दी हैं। राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षा ही मनुष्य को सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय सरोकार से जोड़ती है। मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने संदेश में कहा कि बिना शिक्षा के कोई भी समाज और राष्ट्र उन्नति नहीं कर सकता। शिक्षा से व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे वह शोषण और अत्याचार का दृढ़ता से मुकाबला कर सकता है।

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