जयपुर । अवाप्ति के समय जमीन की पूरी कीमत चुकाने के बाद भी मकान के बदले मकान, एक वर्ष तक 3 हजार रूपए मासिक भत्ता और अवाप्ति के बाद जमीन बिल्डर को बेचने पर 10 साल तक आय में 20 फीसदी हिस्सा राशि जमीन मालिक को मिलेगी। भूमि अवाप्ति के लिए केन्द्र सरकार की ओर से लाए जा रहे नए बिल में इस संबंध में प्रावधान हैं और किसानों के लिए रोजगार या अतिरिक्त दो लाख रूपए तक देने का भी प्रस्ताव है।
अनुसूचित जाति के किसान को और अधिक लाभ मिलेंगे। इस बिल के पास होने के बाद किसानों की बल्ले-बल्ले हो जाएगी लेकिन राज्य सरकारों के लिए जमीन अवाप्ति प्रक्रिया लोहे के चने चबाने के समान होगी। जमीन पांच वर्ष तक उपयोग में नहीं लेने पर एक चौथाई राशि लेकर किसान को लौटानी पड़ेगी।
केन्द्र सरकार ने इस "राष्ट्रीय भूमि अवाप्ति एवं पुनर्वास तथा पुन:स्थापना बिल-2011" को अंतिम रूप देने से पहले सभी राज्य सरकारों से सुझाव मांगे हैं। राजस्थान सरकार को भी जल्दी सुझाव भेजने के लिए कहा गया है। इसके बाद नगरीय विकास विभाग ने नए बिल का अध्ययन कर सुझाव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने स्थानीय निकाय विभाग, जयपुर-जोधपुर विकास प्राधिकरण और नगर विकास न्यासों से भी इस संदर्भ में जानकारी मांगी है।
पुनर्वास, पुन:स्थापन जरूरी
भूमि अवाप्ति अधिनियम में अब तक जमीन अवाप्ति के बदले डीएलसी दर से मुआवजा देने या फिर विकसित भूमि देने का प्रावधान था। लेकिन नए बिल में पुनर्वास और पुन:स्थापना को भी शामिल किया गया है। ऎसे में जमीन अवाप्ति के लिए किसी को उजाड़ा जाता है तो उसका पुनर्वास व रोजगार देना भी अनिवार्य होगा। मकान टूटा तो मकान बनाकर देना होगा। पुनर्वास के मामलों की सुनवाई के लिए राज्य स्तर पर राज्य आयुक्त नियुक्त किया जाएगा।
20 फीसदी लाभांश राशि मिलेगी
शहरी क्षेत्र में जमीन अवाप्त करने पर 20 प्रतिशत भूमि विकसित देनी होगी। इसके अलावा यदि भूमि किसी बिल्डर या कम्पनी को बेची जाती है तो उस पर मिलने वाले लाभ में से 20 फीसदी किसान को हिस्सा राशि मिलेगी। यह लाभ किसान को जमीन की खरीद फरोख्त पर 10 साल तक मिलेगा। शहरों में मकान के बदले मकान और रोजगार देने या फिर 2 लाख रूपए देने का भी प्रावधान है।
3 हजार मासिक भत्ता
जमीन देने वालों को अवाप्ति की राशि के अलावा सरकार को प्रभावित परिवार को सालभर तक 3 हजार मासिक भत्ता देना होगा। फिर 20 वर्ष तक 2000 रूपए वार्षिक भृत्ति देनी होगी। जमीन अवाप्ति में दी जानी वाली 30 फीसदी तोषण निधि भी बढ़ाकर 100 फीसदी कर दी गई है।
विवाद निपटान प्राधिकरण
विवादों के निपटारे के लिए केन्द्र सरकार के स्तर पर विवाद निपटान प्राधिकरण तथा राष्ट्रीय निगरानी सामिति बनेगी, जो सुनवाई करेंगी। राज्य स्तर पर भूमि अवाप्ति के मामलों के लिए विवाद निपटान प्राधिकरण अलग से बनेगा। एक समिति भी बनेगी जो जमीन अवाप्ति के उद्देश्य को तय करेगी।
सुनील सिंह सिसोदिया
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