नई दिल्ली । शिकार के कारण 60 के दशक में भारत के जंगलों से लुप्त हुआ चीता दोबारा दिखाई देगा। केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय ने मध्य पूर्व एशिया व अफ्रीका से 18 चीते देश में लाए जाने संबंधी 300 करोड़ रूपए के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। मीडिया रिपोर्टो के मुताबिक 6 चीते राजस्थान में जैसलमेर के शाहगढ़ इलाके में और 6-6 के समूहों में मध्यप्रदेश के कुनो पालपुर (श्योपुर जिला) व नौरादेही अभयारण्यों में रखे जाएंगे।
इसके लिए राजस्थान में पाकिस्तान सीमा के साथ लगी कई बस्तियों को हटाना पड़ेगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया व वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे सरकार ने मान लिया है। प्रोजेक्ट के तहत सभी तीनों स्थानों को अनुकूल बनाने के लिए 100-100 करोड़ रूपए खर्च होंगे व पूरा पैसा केंद्र देगा। प्रोजेक्ट सफल रहा तो और चीते लाए जाएंगे।
ईरान से लाने की बात
उत्तरी अफ्रीकन प्रजाति के इन चीतों को ईरान, अफ्रीका या नामीबिया से लाया जा सकता है। मंत्रालय ने इस संबंध में ईरान से बात भी की है, ताकि अगले दो-तीन साल में चीते भारत लाए जा सकें।
मैदानों का पारिस्थितिक तंत्र सुधरेगा रमेश ने बताया कि बाघ से जंगल, बर्फीले तेंदुए से पहाड़ों, डॉल्फिन से नदियों और चीते से मैदानों का पारिस्थितिक तंत्र सुधरता है। विश्व के सबसे तेज भागने वाले जानवर चीते को दोबारा भारत लाने से फायदा होगा। वन्यजीव ट्रस्ट के अधिकारी एमके रंजीतसिंह ने बताया कि चीते को वापस लाने के बाद भारत विश्व का एकमात्र ऎसा देश बन जाएगा, जहाँ बड़ी बिçल्लयों की आठ में से छह प्रजातियां पाई जाएंगी।
अंतिम बार 1967 में दिखा था
देश में अंतिम बार चीता 1967 में छत्तीसगढ़ में देखा गया था। ब्रितानी शासनकाल के दौरान शिकार के कारण इनकी संख्या बहुत कम हो गई थी और बाद में ये भारत से लुप्त हो गया।
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