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Tuesday, 07 February, 2012
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महिलाओं को सेना के अयोग्य ठहराने वाला नियम दिखाइए
Tuesday, July 27, 2010, 00:30 hrs IST
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नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेना को यह निर्देश दिया कि वह महिला सैन्य अधिकारियों को स्थाई कमीशन देने से रोकने संबंधी सरकारी अधिसूचना का दस्तावेज एक सप्ताह के भीतर उसके समक्ष पेश करे। जस्टिस जेएम पांचाल एवं ज्ञान सुधा मिश्रा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रक्षा मंत्रालय को उस अधिसूचना को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसके तहत सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन से रोका गया है।

सेना की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पराग त्रिपाठी ने दलील दी कि सेना महिलाओं को कमांडिंग पोजीशन पर रखने का पक्षधर नहीं है। त्रिपाठी ने कहा कि सेना महिलाओं को केवल न्यायिक एवं शिक्षा विभागों में ही स्थाई कमीशन देती है। कोर्ट ने पूछा कि जब भारतीय वायुसेना ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के अनुरूप महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन देने की सहमति प्रदान कर दी है, तो सेना इस पर अमल करने से क्यों पीछे हट रही है। इस पर त्रिपाठी ने कहा कि वायुसेना और थल सेना के कामकाज की तुलना कतई नहीं की जा सकती।

दोनों के कामकाज के तौर-तरीके अलग-अलग हैं। उन्होंने दलील दी कि सेना अधिनियम की धारा 12 के तहत महिला सैन्य अधिकारियों को स्थाई कमीशन देने पर रोक है। उल्लेखनीय है कि सेना ने महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन देने के हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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