बालासोर । बैलेस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली (बीएमडी) स्थापित करने के उद्देश्य से भारत ने स्वदेशी तकनीक पर आधारित इंटरसेप्टर मिसाइल का सोमवार को सफल परीक्षण किया। रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) सूत्रों के अनुसार परीक्षण नई तकनीकों की कुशलता साबित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।
इससे पहले भी पिछले तीन परीक्षणों में इंटरसेप्टर मिसाइल ने लक्ष्य मिसाइल को सफलतापूर्वक हवा में नष्ट किया है। हालांकि गत 14 मार्च को परीक्षण के आखिरी समय में इंटरसेप्टर मिसाइल के एक प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ी आने के बाद परीक्षण टाल दिया गया था।
ऎसे रोका हवाई हमला
* एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से 10.03 बजे सुबह सतह से सतह पर मार करने वाली पृथ्वी मिसाइल लक्ष्य के रूप में दागी गई। * इसके बाद धर्मा तट के पास स्थित व्हीलर द्वीप से दागी गई एडवांस्ड एयर डिफेंस (एएडी) के रूप में बैलेस्टिक मिसाइल। * कुछ मिनट बाद 20 किमी की ऊंचाई पर बैलेस्टिक मिसाइल ने पृथ्वी को नष्ट कर दिया।
पूर्व परीक्षण
27 नवंबर, 2007: इंटरसेप्टर मिसाइल का परीक्षण, 48 किमी की ऊंचाई पर लक्ष्य भेदने का प्रयास। 6 दिसंबर 2007: दूसरा परीक्षण, 15 किमी की ऊंचाई पर निशाना नेस्तनाबूत। 6 मार्च 2009: इंटरसेप्टर मिसाइल से लक्ष्य मिसाइल को 70 से 80 किमी की ऊंचाई पर किया था नष्ट।
भारतीय नौसेना के टोही विमान का डिजायन तैयार
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के लिए लंबी दूरी के टोही विमान पी-8आई की आपूर्ति की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव पार करते हुए अमेरिका की बोइंग कंपनी ने इस विमान का अंतिम डिजायन तैयार कर लिया है। विमान बनाने के इस चरण को अंतिम डिजायन रूपरेखा कहा जाता है।
इसका अर्थ है कि भारत को मिलने वाले 8 विमानों में से पहले विमान की राडार, वैमानिकी, नेविगेशन, कंप्यूटिंग और सेंसर प्रणाली अंतिम तौर पर तय हो गई है। अब इस विमान की एसेम्बली शुरू होगी। भारत ने आठ पी-8 आई विमानों का सौदा जनवरी 2009 में करीब दो अरब डॉलर की लागत से किया था और पहला विमान 48 महीने के भीतर दिया जाना है।
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