बचपन से लेकर अब तक, आपको कितने मच्छर डंक चुभा चुके हैं? हजार, 10 हजार या लाख? यदि संख्या लाख में है, तब भी यकीन मानिए कि वे आपके खून का बहुत ज्यादा कुछ नहीं बिगाड़ सके हैं, क्योंकि वैज्ञानिकों का आकलन है कि औसत कद-काठी के स्वस्थ मुनष्य का सारा खून चूसने के लिए लगभग 12 लाख मच्छरों द्वारा एक-एक बार "काटा" जाना जरूरी होगा। यह तो कम ही है।
कनाडा के वैज्ञानिकों ने अपना चेहरा छोड़कर लगभग सारा शरीर खुला छोड़कर मच्छरों को बाकायदा बुलावा देकर देखा। एक मिनट में नौ हजार तक मच्छरों ने उनका खून चूसा। इसके बाद गणना की गई कि अगर इसी दर से मच्छर खून चूसें, तो शरीर का आधा रक्त खत्म होने में दो घंटे लगेंगे। और हां, यह सारा कमाल मादा मच्छरों का ही होगा, क्योंकि बेचारे नर मच्छर तो बड़े शाकाहारी टाइप के जीव हैं और फूल-पत्तियों-पौधों का रस पीकर सुखी रहते हैं। वे तो मादा मच्छर हैं, जो अंडे देने के लिए प्रोटीन प्राप्त करने की खातिर इंसानों और जानवरों का खून पीती हैं।
वे भी क्या करें, यह तो उनकी मजबूरी है। और शुक्र मनाइए कि आप आधुनिक युग में हैं। करोड़ों साल पहले मच्छर आज की तुलना में तीन गुना बड़े होते थे। सोचिए, वे कितना ज्यादा परेशान करते होंगे।
लेकिन आकार छोटा हो जाने से उसकी मारक क्षमता कम नहीं हुई है। हर साल लाखों लोग मच्छरों की वजह से मारे जाते हैं। अकेला मलेरिया ही अफ्रीका में सालाना 10 लाख लोगों की बलि ले लेता है। फिर, डेंगू, पीत ज्वर और पश्चिमी नील विषाणु जैसी खतरनाक बीमारियां भी मच्छरों की भेंट हैं। पर सचमुच शुक्र है कि मच्छरों के काटने से एड्स नहीं फैलता। मानवीय रक्त में मौजूद एचआईवी मच्छर के पेट में पहुंचकर पचने के बाद नष्ट हो जाता है।
मच्छर रात के अंधेरे में भी खूब काटते हैं। आखिर वे हमारी मौजूदगी का पता कैसे लगा पाते हैं? दरअसल, मच्छर के सिर पर बड़ी-बड़ी आंखें होती हैं। बेशक, "बड़ी" मतलब उसके सिर के अनुपात में बड़ी। ये आंखें उसके सिर का अधिकांश हिस्सा घेरे रहती हैं और किसी के शरीर से निकलने वाली गर्मी को ताड़कर इन्फ्रारेड छवियां बनाती हैं।
मच्छर आपकी सांसों को भी पहचानते हैं। जब कसरत करते वक्त हम ज्यादा तेजी से सांस लेते हैं, तो मच्छरों को हमारा पता ज्यादा आसानी से लगता है। सोते समय भी वे सांसों के जरिए हमारी मौजूदगी ताड़ते हैं। जाहिर है, आप उनसे छिप नहीं सकते। लेकिन हां, दौड़कर उनकी पहुंच से दूर तो जा ही सकते हैं। छुटके मच्छर अपनी साइज के हिसाब से महज डेढ़ मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ते हैं।
ऋतु गुप्ता
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