डेक्कन 360 के प्रमुख कैप्टन गोपीनाथ की बेटी पल्लवी से मिलना दिलचस्प है, उसकी उड़ान काबिलेतारीफ है, उसके इरादे नेक है और जाहिर है बडे भी...
भारत की पहली सस्ती एयरलाइन एयरडेक्कन के जन्मदाता कैप्टन गोपीनाथ आज डेक्कन 360 के प्रमुख हैं। यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने लम्बा सफर तय किया है। उनके शानदार घर के बिलकुल सामने एक बैलगाड़ी खड़ी है जो उस संघष्ाüभरी यात्रा की निशानी है जिसे वे खुद और उनका परिवार कभी नहीं भूल सकते।
हमें इंतजार है उनकी बड़ी बेटी पल्लवी का जो साल भर पहले अपने पिता की सहायक मैनेजर बनी थीं। पल्लवी भारत की उस युवा प्रोफेशनल जमात से हंै जिनके पिता उनके हाथों में कमान सौंपने की सोच रहे हैं। पल्लवी के बारे में उनके पिता कहते हैं कि मैंने कभी उसे किसी विशेष्ा पेशे को अपनाने के लिए नहीं कहा। मैं चाहता था कि वो खुद अपने सपने देखे पर उसने पहले ही अपने लिए कु छ चुन रखा था। मैं केवल इतना चाहता था कि वो जो भी करे पूरे समर्पण के साथ करे। मेरे पिता की सलाह आज भी मेरे जेहन में ताजा है, वो कहते थे कि चाहे तुम जूते बनाने वाले ही बनो पर वह भी ऎसे बनो कि आप से अच्छा आसपास ना हो। मैंने तो उसे कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने को भी कहा था अगर वो चाहे तो। उसे इस प्रकार की लगन की जरूरत थी कि वो चाहे जो भी करे, पूरी तल्लीनता से करे। मुझे यह भी पता था कि वो कॉलेज में साहित्य पढ़ रही है, मेरा मानना था कि इससे वो यकीनन मानवता का पाठ पढ़ेगी।
हम उनसे बात कर रहे हैं, इसी बीच पल्लवी आ जाती है। मॉडल्स की तरह दुबली- पतली, रंग थोड़ा सा सांवला, आंखें चमकीली और चाल में घुड़सवारी की झलक। पल्लवी के पास साहित्य में स्त्रातकोत्तर और मीडिया में एमफिल की डिग्री के अलावा एयर बस एसएएस फ्रांस में काम का तजुर्बा भी है। पल्लवी बताती हैं कि वो हर विष्ाय पर अपने पिता से सलाह मशविरा करती हैं। जब वो फ्रांस में थीं तब एक बार वो अपने पिता के साथ डिनर पर किरण राव और जॉन लिही से मिली। किरण राव ने मुझे खुद के संचार विभाग में इंटर्नशिप करने को कहा। मुझे वो काम बेहद उबाऊ लगा इसलिए मैं मार्केटिंग में आ गई। मुझे यहां ज्यादा अच्छा लगता है। मैंने मार्केट का अध्ययन भी किया है। इसी समय उनके पिता कैप्टन गोपीनाथ ने एयर डेक्कन लांच कर दी थी। उस समय तक पल्लवी ने उड़ान को अपना करिअर बनाने की नहीं सोची थी। इसी दौरान उन्होंने एविएशन में एमबीए किया। उनके एमबीए के दौरान ही कैप्टन ने डेक्कन 360 शुरू कर दी। कैप्टन उन्हें इस कंपनी के शेयर में भागीदारी देना चाहते थे मगर बाद में उन्हें लगा कि यदि वो चाहेगी तो वह अपने बूते पर ही कंपनी की सीईओ बन जाएगी। सभी की तरह पल्लवी ने भी आवेदन किया और प्रवेश परीक्षा दी। आज वो एसोसिएट मैनेजर हैं। गोपीनाथ कहते हैं कि मैं चाहता हूं कि वो अलग-अलग तरह के लोगों से मिले और उनके साथ काम करे। उसकी गिनती हमारे संस्थान की सबसे प्रतिभाशाली लोगों में है। मैंने उसे बताया है कि प्रतिभा का कोई उपयोग नहीं जब तक कि हम लगातार कोशिश न करते रहें।
पल्लवी उन खुशकिस्मत लोगों में से हैं जिसे एक ही घर में दो अलग-अलग उद्यमियों का साथ मिला। उनकी मां भार्गüवी पिछले दस सालों से एक बेकरी चला रही हैं जो काफी सफल रही है। अपने माता-पिता के बारे में बताते हुए पल्लवी बताती हैं कि मेरी मां बहुत विनम्र हैं पर पापा कठोर हैं। मैं शायद अपनी मां के जैसी हूं। मैं तब तक चैन नहीं लेती जब तक कि मैं अपनी मनमर्जी का पूरा ना कर लूं। मेरे माता-पिता दोनों ने मुझे सिखाया है कि दूसरों का सम्मान करो और विनम्र बनो। मुझे अपने पिता पर गर्व है पर मैं यह भी जानती हूं कि ऎसा हमेशा नहीं रहेगा। जब हम छोटे थे तो हमें ज्यादा जेब खर्ची नहीं मिलती थी पर पापा ने सिखाया था कि शिकायत नहीं करनी है। उन्होंने यह भी सिखाया था कि हमें केवल उपभोक्ता बनकर समाज में नहीं रहना। अगर साधन नहीं हैं तो हमें खुद उनको पैदा करना होगा। हमारे सपनों का कोई ना कोई मकसद जरूर होता है। सत्ताइस साल की पल्लवी क्या अपने पिता के व्यवसाय क ी सफल वारिस होंगी? यह पूछने पर पल्लवी कहती हैं कि मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करूंगी। यानी उन्होंने अपनी उड़ान शुरू कर दी है। साभार : सोसाइटी
अनुपमा बिजूर
|
|
|
|
|
|
|