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धीरज धरिए, सुखी रहिए
Sunday, July 25, 2010, 10:54 hrs IST
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daily05
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हर मुश्किल से बाहर आने में मददगार है- धीरज, लेकिन 21वीं सदी की तेजी से आगे बढ़ती दुनिया में यही अमूल्य गुण हम खोते जा रहे हंै। विपरीत परिस्थतियों से अगर हमें कुछ उबार सकता है तो वह धीरज ही है। कई बार फैसला लेने की घड़ी में हम पशोपेश में पड़ जाते हैं, ऎसी परिस्थतियों मेें धीरज ही वह गुण है जो हमें उस समय सचाई से वाकिफ कराता है और सही फैसले में मदद करता है। वाकई बहुत बड़ी पूंजी है धीरज।

गहराई से अभ्यास करें तो हम अपनी ही आदतों का स्वरूप पहचान पाएंगे और आने वाली मुश्किलों का अंदाज लगा पाएंगे, साथ ही ज्यादा व्यावहारिक हो पाएंगे। धीरज रखें तो कोई भी अनदेखा डर या मुश्किलें आपको कुंठित या निराश नहीं कर सकता और हमारे मौलिक सवाल हमें सकारात्मक रवैया कायम कर पाने और संभावनाओं का आधार तैयार करने में मददगार साबित होते हैं।
... तो कैसे धैर्य को किस तरह खुद में विकसित किया जाए कि जरूरत होने पर हम इससे होने वाले लाभ उठा सकें। काम की पांच बातें....

जानिए करीब से
सबसे पहले यह पहचानना जरूरी है कि आपका दिमाग किस बात पर ज्यादा केंद्रित है ताकि इसके अनुसार सोच निर्धारित की जा सके। जिंदगी से जुड़ी बातों को अलग-अलग पहलुओं से देखने की जरूरत है यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी बात पर तुरंत प्रतिक्रिया जाहिर न करें। यह रवैया हमें अपनी बड़ी पहचान कायम करने में मदद करेगा। अधीरता तब हमारे मानस पर हावी होने लगती है जब हम सोच नियम विपरीत हो और हम उसके बारे में जिद पर अड़ जाते हैं लेकिन जैसे ही हमें ज्ञान होता है कि कहीं कुछ गलत है तो दोबारा देखने पर जान पाते कि असल में बात क्या है।

जुड़ाव
गहरी सांस लें और अंदर से महसूस करने की कोशिश करें कि कैसा लग रहा है। आपकी सांसे, दिल, पेट, दिमाग और शरीर के दूसरे हिस्से कैसे संकेत दे रहे हैं। कभी कभार हम बिना बात धीरज खो बैठते हैं क्योंकि हम नहीं जान पाते कि धरातल के नीचे की सच्चाई क्या है। ऎसे में तनाव काम करता है और अप्रत्यक्ष रूप से यह दिमाग को ऎसा करने के लिए संकेत देता रहता है। इससे बचने के लिए सबसे पहले यह जान लें कि वाकई में बात क्या है और दिमाग में क्या चल रहा है। जब हम ज्यादा जागरूक होने लगते हैं तो हम मानसिक तनाव को जल्द पहचानने और उससे बाहर आने में सक्षम हो जाते हैं। जब हम बैठे होते हैं और तनाव है तो कंधे, पीठ के निचले हिस्से आदि में कसावट महसूस करते हैं वहीं अगर काम के दौरान तनाव होता है तो हमारी भौंहे तनी रहती हैं। इसलिए अधीरता से दूर रहते हुए काम के दौरान तनाव को खुद पर हावी न होने दें।

कल हो ना हो
आज में जीएं। जागरूक रहते हुए अपने विवेक का इस्तेमाल करें और दिमाग को बेकार की बातों का ढेर बनने की बजाए काम की बातें ही पहुंचाएं। संवेदनशील रहते हुए जागरूकता का स्तर बढ़ाने की कोशिश सतत जारी रहनी चाहिए। जीवन के मुश्किल पलों में भी यह कोशिश चलती रहे।
छोटी से छोटी बातों पर गौर करें

आप शॉपिंग पर हैं, ड्राइविंग कर रहे हैं या फिर ऑफिस में हैं, छोटी-छोटी बातों के बारे में भी सतर्क रहें। सजग रहने से कई बार आने वाले खतरे का आभास किया जा सकता है और समझदारी व धैर्य से इसका सामना करके सुरक्षित बना जा सकता है। यह छोटी चीजें जीवन में हर समय घटित होती ही रहती हैं और अभ्यास से इन्हें सुगम बनाया जा सकता है। इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह और अनुभव बताते हैं कि यह छोटी-छोटी बातें हमें जागरूक होने में मदद करती हैं। इसलिए इन पर ध्यान दें।

बदलाव के अनुसार चलें
परिवर्तप का दूसरा नाम जिंदगी है। जिंदगी में होने वाले हर बदलाव को जानें। जागरूक रहें। यह शुरूआत बाहरी चीजों में हो रहे बदलावों को नोटिस करने से की जा सकती है लेकिन उनसे जुड़ने की जरूरत तभी है जब वे आप पर असर करती हों। हम जानते हैं कि आज हर चीज बदल रही है लेकिन उनमें से हम हर चीज पर ध्यान नहीं देते। समझदारी से इन बदलावों पर नजर रखें, जब हम खुद इनसे गुजरने का अनुभव लेते हैं तो यह हम पर गहरा प्रभाव छोड़ जाते हैं।
धीरज के जादू से अपनी जिंदगी को संवारिए, खुशनुमा बनाइए, और फिर देखिए जिंदगी को लेकर आपके तमाम गिले-शिकवे कैसे गायब होते हैं।

सुमन कछावाह
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