फीफा वल्र्ड कप 2010 के दो विजेता रहे, एक तो स्पेन और दूसरे पॉल बाबा... विक्टर ह्यूगो की किताब ट्रेवेल्यर्स दे ला मेर का अहम किरदार ऑक्टोपस आदिकाल से ही अपनी अजीब बनावट के कारण शैतानी आत्मा माना गया। पुराने जमाने में ही समुद्री यात्रियों ने इसे शैतान का नाम दे दिया था। हवाई मान्यताओं में माना गया है कि यह ब्रह्मांड एक श्रृंखला की अंतिम कड़ी है जिसका जन्म पिछले ब्रह्मांड़ के दुर्भाग्य के कारण हुआ है। ऑक्टोपस ही एकमात्र ऎसा जीव है जो पिछली कड़ी से लेकर अब तक जीवित है। इस शानदार प्राणी का दुर्भाग्य ही है कि इसे हमेशा गलत समझा गया और मनहूस माना गया है।
समंदर का गिरगिट मूल रूप से ऑक्टोपस सिफालोपोडा कक्षा के ऑक्टोपोडा परिवार से है। सिफालोपोडा का अर्थ होता है सिर से जुड़े पैर। ऑक्टोपस के पैर उसके सिर से ही जुड़े होते हैं इसलिए इसको इस नाम से नवाजा गया है। इसके आठों पैर इसके मुंह के चारों ओर सिर से जुड़े होते हैं। आठ पैरों वाले इस जीव में कंकाल नहीं होता जिससे इनका शरीर बेहद लचीला होता है। अपने जैली जैसे शरीर के कारण ये छोटे-मोटे छेदों से भी आसानी से निकल जाता है। कठोरता के नाम पर केवल इनके मुंह के पास एक चोचनुमा बनावट होती है जिससे यह चबाने का काम करते हैं और हां, मौका पड़ने पर इससे शिकार पर जहर भी फैंकते हैं। इस कमाल के शिकारी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गिरगिट की तरह रंग बदल कर अपने चारों ओर के वातावरण में ही गायब हो जाता है। बाहरी कठोर आवरण और कठोर कंकाल के न होने पर भी ये आसानी से शिकारियों से बच निकलते हैं क्योंकि ये छिप जाने की, तेजी से भाग जाने की, स्याही फैंकने की और अपना रंग भी बदल लेने की कला में भी माहिर होते हैं। दूसरे ऑक्टोपस को चेतावनी देने के लिए भी ये अपना रंग बदलते हैं। समंदर के कई भागों में रहने वाला ऑक्टोपस विशेष रूप से मूंगें की चट्टानों में रहता है। एकांत पसंद यह जीव दिन के उजाले में बहुत फुर्तीला रहता है।
इनसे टक्कर मत लेना इसकी बुद्धि को लेकर जीव विज्ञानियों में खासा विवाद है पर समस्या समाधान टेस्ट बताते हैं कि इनकी याददाश्त कमाल की है जो बड़ी और छोटी अवधि, दोनों तरह की होती है। इनका ज्ञान स्वअर्जित ही होता है क्योंकि ये अपने माता- पिता के संपर्क में कम ही रहते हैं। इनका जटिल तंत्रिका तंत्र इनके दिमाग में स्थित होता है। प्रयोगशालाओं में हुए प्रयोगों के बाद ये सामने आया है कि ये अलग-अलग चीजों में अंतर कर सकते हैं और खेल भी खेल सकते हैं। इनकी देखने और महसूस करने की क्षमता भी कम नहीं है। ये कुछ रंगों की पहचान करने के साथ ही साथ कड़वे, मीठे और खट्टे स्वाद को भी पहचान लेते हैं। इसके हर पैर पर लगभग 1600 चूषक होते हैं जिनसे इन्हें स्वाद का पता चलता है। इन्हीं की सहायता से ऑक्टोपस अपने आस-पास की चीजों को भी महसूस करता है। इतनी खासियतों के बावजूद भी बेचारा ऑक्टोपस बहरा होता है। रात के इस शिकारी का पसंदीदा खाना है केकड़ा। इन्हें पालतू बनाना आसान नहीं है क्योंकि अपने लचीले शरीर और समस्याओं को सुलझाने की आदत के कारण ये कई बार वाटर टैंक से भाग छूटते हैं और मालिक के लिए परेशानी पैदा कर देते हैं।
जहर और ऑक्टोपस लगभग सभी ऑक्टोपस जहरीले होते हैं पर छोटा नीला ऑक्टोपस ही मानव के लिए खतरनाक होता हैं। गोल्फ की गेंद के आकार के इस प्राणी का जहर धरती पर पाए जाने वाले किसी भी जानवर से ज्यादा घातक होता है। पर फिर भी यह लोगों के खाने के मैन्यू में शामिल है। ऑक्टोपस को कई देशो में अलग- अलग तरीकों से खाया जाता है पर हवाई और भूमध्यसागरीय देशों में तो यह नियमित खाने में ही शामिल है।
जीवन और जन्म इसका जीवन बहुत ही कम होता है। कुछ छोटे ऑक्टोपस तो केवल छह महीने तक ही जिंदा रहते हैं पर सही परिस्थितियो में बड़े आकार वाले छह साल तक जी सकते हैं। इनकी मौत का मुख्य कारण प्रजनन है। नर मादा मिलन के कुछ महीनों बाद ही नर की मृत्यु हो जाती है जबकि मादा अण्डों से बच्चे निकलने के कुछ दिनों बाद ही मर जाती हैं। दरअसल जब तक अंड़ों से बच्चे नहीं निकलते, ये भूखे ही रहते हैं पर इनकी मौत का कारण भूख नहीं होता बल्कि इनके ही शरीर की दो ग्रंथियां इनकी मौत का कारण बनती हैं।
आकार गर्म पानी वाले इलाकों में इनका आकार छोटा और ठंडे पानी वाले इलाकों में बड़ा होता है। उत्तरी प्रशांत के विशाल एंटेरोक्टोपस डॉल्फिनी को सबसे बडा ऑक्टोपस माना गया है। इसके वयस्क का वजन 15 किलो तक होता है और एक पैर की लम्बाई 14 फीट तक। इस प्रजाति का अब तक ज्ञात सबसे बड़ा ऑक्टोपस 272 किलो का था जिसकी लम्बाई तीस फीट थी।
खास बातें 1. अकशेरूकिय जीवों में सर्वाधिक बुद्धिमान जीव है ऑक्टोपस। 2. तीन दिल वाले इस अजूबे जीव की मौत का सबसे बड़ा कारण होता है प्रजनन। 3. हिमोसाइनिन के कारण इनके खून का रंग नीला होता है। 4. मादा ऑक्टोपस एक बार में दो लाख तक अण्डे देती है। 5. ये शार्क की कुछ प्रजातियों को पकड़कर मारने के लिए भी जाने जाते हैं। 6. पहली स्याही जो पाई गई थी वो उस पिगमेंट से बनी थी जो ऑक्टोपस में पाई जाती है। 7. इसकी दुनिया में लगभग तीन सौ ज्ञात प्रजातियां हैं।
अर्पिता शर्मा
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