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Wednesday, 08 February, 2012
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देंगे नहीं, भेजेंगे
Sunday, July 11, 2010, 11:11 hrs IST
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यदि सकारात्मक सोचें तो इन वांछित अपराधियों की मांग और आपूर्ति दोनों देशों के मध्य फेविकोल का काम करती है। ज्यों ही कभी जोड़ ढीला होने लगता है, भारत हाथ फैलाते हुए अपने अपराधी मांगता है और पाकिस्तान अंगूठा दिखाते हुए मना कर देता है। मांग खारिज अत: गुंजाइश बरकरार।

भारत का मानना है कि उसके कई मोस्ट वांटेड अपराधी पाकिस्तान में सादर निवास कर रहे हैं। वैसे ही जैसे कई भारतीय नेताओं का काला धन स्विस बैंकों में जमा है। एकदम सेफ। कतई नॉट रिफंडेबल। यदि सकारात्मक सोचे तो इन वांछित अपराधियों की मांग और आपूर्ति दोनों देशों के मध्य फेविकोल का काम करती है। ज्यों ही कभी जोड़ ढीला होने लगता है, भारत हाथ फैलाते हुए अपने अपराधी मांगता है और पाकिस्तान अंगूठा दिखाते हुए मना कर देता है। भारत सरकार पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देती है,"हम हजार दफा अंतिम बार अपराधी मांग चुके हैं। हमें हमारे अपराधी सौंप दो वरना...।" देश की जनता सरकार को बीच में ही पूछ लेती है, "वरना क्या?" भारतीय सरकार बताती है,"वरना हम अंतिम बार अपराधी मांगते रहेंगे।" जनता सवाल करती है,"भारत सरकार क्यों बार-बार अपराधियों की मांग करती है। यह जानते हुए भी कि पाकिस्तान कदापि देगा नहीं?" सरकार जनता को समझाती है,"हमें भी मालूम है कि वह कभी हमारे अपराधी देगा नहीं। लेकिन इस बहाने मांगने का रियाज तो बना रहता है।" भारत सरकार मांग करती है,"हमारे तमाम गुनहगार हमें सौंपो।" पाकिस्तान सरकार हंसते हुए पूछती है,"क्या करोगे लेकर?"

भारत सरकार आक्रोश व्यक्त करती है,"हम चुनाव लड़वाएंगे, तुम्हें इससे क्या?" पाकिस्तान सरकार कहती है, "देखो हम तुम्हें सौंप तो देंगे, तुम्हारा इनके रख- रखाव पर करोड़ो खर्च होगा जबकि हमारे यहां सब अपराधी जीरो मेंटीनेंस पर रहते हैं। उल्टा कमाकर और देते हैं।" भारत की ओर से फिर मांग दोहराई जाती है, "भाई मेरे, अब तो दे दे हमारे अपराधी।"
पाकिस्तान,"कहां रखोगे ले जाकर?"
भारत,"हजारों को पहले से खिला रहे हैं, इन्हें भी पाल लेंगे।"
पाकिस्तान,"गलतफहमी हो गई है। यहां कोई अपराधी नहीं है।"
भारत,"क्यों मजाक कर रहे हो, ओसामा बिन लादेन तक तो तुुम्हारे यहां ही है।"
पाकिस्तान, ओसामा का तो इंतकाल हुए ही सालों गुजर गए।"
भारत,"ऎसा तुम किस आधार पर कह रहे हो?"

पाकिस्तान,"दस मिनट पहले वजीरे आजम को खुद ओसामा ने बताया है।"
भारत, "ओसामा की तुम और अमेरिका जानो। हमे तो हमारे वाले दे दो।"
पाकिस्तान,"ना, देंगे नहीं।"
भारत, "तो?"
पाकिस्तान,"भेजेंगे।"

भारत, "तो फिर भेज-भाज कर नक्की करो।"
कई अपराधियों की तो हम कंधार तक होम डिलीवरी दे कर आए हैं। एक और मजे की बात है। भारत अपराधी मांगते समय और पाकिस्तान इंकार करते समय अपने-अपने मुंह अमेरिका की दिशा में रखते हैं। उसी प्रकार जैसे आमने-सामने बैठे पति-पत्नी अनबन के वक्त परस्पर निवेदन और मनाही अपने छह माह के शिशु के मार्फत करते हैं।
पति कहता है,"चीनू, अपनी मम्मी से बोलो कि चाय बनाए।"
पत्नी बोलती है,"मना कर दे चीनू कि दूध फट गया है।"

वस्तुत भारत द्वारा बार-बार अपने अपराधी मांगने पर भी पाकिस्तान के इंकार के मूल में उसकी भारतीय जनता के प्रति सद्भावना है।
कुछ समय पूर्व भारत के एक बड़े नेता पाकिस्तान गए थे (हालांकि, गए तो थे वह जिन्ना की कब्र पर फूल चढ़ाने किन्तु अपनी पर चढ़ा आए)। उन्होंने वहां आदतवश पाकिस्तान से मांग कर डाली कि वह भारत के कम-से-कम बीस मोस्टवांटेड अपराधी तुरंत भारत को सौंपे। पाकिस्तान ठहरा भारत का शुभचिंतक पड़ोसी। उसने साफ मना कर दिया। शायद यह सोचकर कि यदि बीस अपराधी भारत को सौंप देंगे, तो सारे के सारे भारतीय संसद- विधानसभाओं में होंगे।

संपत सरल
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