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Tuesday, 07 February, 2012
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जो मैं पहले जानती
Sunday, September 05, 2010, 10:48 hrs IST
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आखिर मैं उन्हे कंप्यूटर रूम में ले गया। गूगल सर्च में जाकर पार्शियल बर्थ अबॉर्शन की साइट खोल दी। दिखा, कैसे डॉक्टर ने गर्भाशय का मुंह चौड़ा कर अंदर एक फोरसेपस डाली और उससे बच्चे की दोनों टांगें पकड़कर बाहर खींच ली। बच्चे का सिर आ कर अटक गया। यह हुआ पार्शियल बर्थ अबॉर्शन।

एक कहानी छोटी-सी
हाउस सर्जन ने पूछा कि कल जिसका एमटीपी किया था, वह ठीक है क्या? उसको डिस्चार्ज कर दें, तो मैडम ने कहा, कर दो लेकिन जाने से पहले उसे उसकी वीडियो दिखा देना। लैपटॉप और सी डी ले जाना, कहना जाने से पहले देख ले। हाउस सर्जन नर्स के साथ उसके कमरे में गई। वह खूब खुश थी, कह रही थी वह बिलकुल फिट है, बिदांस, नहाकर नाश्ता कर चुकी है और अगर छुट्टी कर दें तो वह सीधा अपने ऑफिस चली जाए। उसने बड़ी खुशी से लैपटॉप और अपनी एमटीपी की सीडी ली और देखने लगी। हाउस सर्जन उसका डिस्चार्ज टिकट बनाने चली गई। लैपटॉप के रंगीन स्क्रीन पर नन्हे शिशु का चित्र उभरा। कई एंगल से उसे दिखाया गया। पलकें ढंकी, बन्द आंखे, हिलते डुलते हाथ-पांव, जैसे शिशु अंगड़ाई ले रहा हो। महिला मेरा बच्चा के भाव से अभिभूत हो गई। उसे याद आया जब उसने पहली बार उसकी हलचल महसूस की थी। उसकी इच्छा हो रही थी उंगली से उसके प्यारे होंठो का छुए। तभी नीचे से औजार आता दिखा। वह चौंककर आगे झुक गई। देखती रही कैसे औजार के छूते ही बच्चा अपने हाथ-पांव हटा लेता था, कैसे एक बार तो उसने उसे अपनी मुट्ठी में ही पकड़ लिया। और फिर जो दिखा उसको देख उसकी आंखे फटी रह गई, मुंह सूख गया, स्क्रीन पर आते-जाते औजार और छटपटाहट के बाद शांत होते-होते उसने जोर से सिस्टर को पुकारा और एमरजेंसी बैल का बटन दबा दिया।

सिस्टर और हाउससर्जन भागकर आईं तो कहने लगी, यह क्या है? यह क्या किया? यह तो सरासर मर्डर है। हाउस सर्जन ने कहा, वे जो चाहती थीं वही तो किया गया, दूसरी तिमाही के गर्भपात में तो यही होता है। आप तो सब जानती थीं। चीफ सर्जन आईं तो वह उनका हाथ थामें रोने लगी। कह रही थी वह तो मूर्ख थी, अज्ञानता का अहंकार था, पर वे तो जीवन दाता थीं फिर उन्होंने...काश वह पहले जानती। अपने बच्चे की हत्या का अपराध बोध उसे जीवन भर सालता रहेगा। वह कैसे जीएगी इस अपराध बोध के साथ। सर्जन क्या कहती, सलाह दी कि वह किसी अनचाही छोड़ी गई बच्ची को गोद ले और पाले।

पार्शियल बर्थ अबॉर्शन
सरकार के रिटायर्ड अफसर, वे अक्सर इतवार को सवेरे घूमने के बाद चाय पीने और गपशप करने मेरे घर आ जाते हैं। उस रोज आए तो आते ही प्रश्न किया-यह पार्शियल बर्थ अबॉर्शन क्या होता है? वे जनसंख्या नियत्रंण, नसबंदी और गर्भपात के कट्टर हिमायती हैं। अनचाहे गर्भ को गिराने की पूर्ण स्वतंत्रता के समर्थक। इसके खिलाफ वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं, उसे देशद्रोह तक कह डालते हैं। व्यर्थ की बहस से बचने के लिए मैंने पूछा- क्यों क्या हुआ? कहने लगे प्रेसिडेन्ट बुश ने अमेरिका में पार्शियल बर्थ अबॉर्शन पर रोक लगा दी है, कहा है किसी सभ्य समाज में यह मान्य नहीं होना चाहिए। ईराक में लाखों मासूमों की हत्या करने वाले, गर्भपात के हिमायती अमेरिका में यह कौन सी नई सभ्यता जागी है? क्या है यह पार्शियल बर्थ अबॉर्शन? मेरे यह कहने पर कि ये दूसरी तिमाही मे गर्भपात की विधियों में से एक है, तो वे पूछने लगे उसमें ऎसा क्या है जो सभ्य समाज के लिए जघन्य है? पहले मान्य था अब क्या हुआ जो निçष्ाद्ध करना पड़ा? कहते हैं मीडिया ने जब सचित्र इसे उजागर किया तो सभ्य समाज की संवेदनाएं जाग गई? उन्होने चाय को हाथ तक नही लगाया, जिद पकड़ ली कि बताऊं यह क्या होता है।

आखिर मैं उन्हें कम्प्यूटर रूम में ले गया। गूगल सर्च में जाकर पार्शियल बर्थ अबॉर्शन का साइट खोल दी। दिखा कैसे डाक्टर ने गर्भाशय का मुंह चौड़ा कर अंदर एक फोरसेपस डाली और उससे बच्चे की दोनों टांगें पकड़कर बाहर खींच ली। बच्चे का सर आ कर अटक गया। यह हुआ पार्शियल बर्थ अबॉर्शन। एक कैंची लेकर उसमें छेद किया, घुमाया और दिमाग के लुगदे को सक्शन कर बाहर निकाला, खोपड़ी पिचक गई तो टांगों से खींच बाहर कर दिया। यह हुआ अबॉर्शन। उनका चेहरा फक हो गया। चेहरे के वितृष्णा के भावों को छुपाते हुए उन्होने पूछा कि हमारे यहां तो इस विधि से अबॉर्शüन नहीं होते? तब मैने दूसरी तिमाही के गर्भपात में हमारे यहां काम में ली जाने वाली विधि का साइट खोल दिया। यह उससे भी अधिक वीभत्स था। टेलीफोन बज उठा तो मैं उसे सुनने चला गया। वापस आया तो वे जा चुके थे। छह महीने हो गए, वे चाय पीने घर नहीं आए।
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