फिल्म "फोर्स" में एक चुलबुली लड़की का किरदार निभाकर उन्होंने हर किसी से वाहवाही लूटी। अब उन्हें लगता है कि "जाने तू...या जाने न" वाली इमेज फिर वापस आ रही है। उनकी आने वाली फिल्म "तेरे नाल लव हो गया" में वह रितेश देशमुख के अपोजिट कुछ ऎसा ही किरदार निभाने जा रही हैं। पेश है हाल ही हुई उनसे बातचीत के मुख्य अंश-
"तेरे नाल लव हो गया" में आपका किरदार काफी हद तक "जाने तू...या जाने न" जैसा लगता है? इस फिल्म में मेरा किरदार एक ऎसी लड़की का है, जो बहुत जोशीली है, ऊर्जावान है और जिंदगी से भरपूर है, मगर यह "जाने तू.." से अलग है। "जाने तू..." के मेरे किरदार ने मेरी इमेज धूमिल कर दी है। मैं जो भी करती हूं उसकी तुलना उसी से की जाती है। यदि फिर तुलना की बात है, तो "तेरे नाल..." का किरदार उससे बिल्कुल हट के है।
जैसा कि नाम से लगता है "तेरे नाल..." की कहानी पंजाब पर आधारित है। पंजाबी आती है आपको? मैं केरल की लड़की का किरदार निभा रही हूं, इसलिए मुझे अधिक पंजाबी नहीं बोलनी थी। मुझे जो भी करना था, उसमें मैंने काफी मजा लिया। हमने इस फिल्म की शूटिंग लगातार पंजाब में की थी। जब भी हमें निर्माता-निर्देशक का बुलावा आता, तो दिन हो या रात हम अगले ही दिन वहां पहुंच जाते थे। फिल्म की स्क्रिप्ट अच्छी थी, पूरे यूनिट में बहुत ऊर्जा थी, इसलिए यह फिल्म इतनी तेजी से पूरी हो गई।
फिल्म ट्रेड में ऎसी फिल्म को "क्विकी" कहा जाता है, क्या लगातार दिन-रात शूटिंग करना तनावपूर्ण था? हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को स्टार्ट-टू-फिनिश शेड्यूल अपना लेना चाहिए, क्योंकि इससे स्टार्स और निर्देशकों को स्पष्टता मिलती है। इससे समय और पैसे की बचत होती है और फिल्म निर्माण आसान होता है। यह अभिनेता-अभिनेत्रियों के लिए अच्छा है, क्योंकि उन्हें फिल्म के किरदारों को जीने और उनमें जान फूंकने का अवसर मिलता है। जब आप एक स्टार्ट-टू-फिनिश फिल्म करते हैं, तो इससे आपके जोश में कमी नहीं आती।
आप और रितेश ऑनस्क्रीन करीब 7 साल बाद इकटे आ रहे हैं। आप दोनों ऑफस्क्रीन अच्छा साथ निभाते हैं। क्या इससे ऑनस्क्रीन कैमिस्ट्री को बढिया बनाने में भी योगदान मिलता है? हम दोनों अच्छे मित्र हैं। रितेश एक सीरियस परफॉर्मर है, इसलिए मैं हमेशा शॉक्ड होती हूं। वह बीच-बीच में पंच मारता रहता है और मैं शब्दहीन हो जाती हूं।
सोलो व मल्टीस्टारर फिल्मों में से किसे वैल्यू देती हैं? मैंने अधिकतर सोलो प्रोजेक्ट्स ही किए हैं। "जाने तू..." और "फोर्स" जैसी सोलो लीड वाली फिल्मों के बाद मेरा यह मानना है कि मैं किसी भी फिल्म की जिम्मेदारी अकेले अपने कंधों पर उठा सकती हूं।
अब तक निभाए अपने किरदारों में से कौन-सा आपका पसंदीदा किरदार है? मेरे द्वारा निभाए गए विशेष किरदारों में "जाने तू..." का अदिति का किरदार मेरा पसंदीदा है, क्योंकि वह मुझसे बहुत मिलता-जुलता था।
|
|
|
|
|
|
|