इन दिनों अभिनय जगत इस कदर ग्लैमरस हो गया है कि हर क्षेत्र से जुड़े लोग इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं। अब जयपुर की आकांक्षा सिंह को ही लीजिए, फिजियोथैरिपी की पढ़ाई कर रही थीं, मगर पढ़ाई बीच में ही छोड़कर "कलर्स" पर प्रसारित हो रहे सीरियल "ना बोले तुम ना मैंने कुछ कहा" में मिसेज मेघा व्यास बन गई। यह किरदार इन दिनों काफी चर्चित हो रहा है। हाल ही आकांक्षा से खास बातचीत हुई...
सुना है कि आप फिजियोथैरिपी की पढ़ाई कर रही थीं, तो फिर अचानक उस प्रोफेशन को छोड़कर अभिनय को कॅरियर बनाने की बात क्यों सोची? हकीकत यह है कि मेरी परवरिश कला के माहौल मे हुई है। मेरी मां रेणु सेठ थिएटर से जुड़ी रही हैं। शादी के बाद वह थिएटर से दूर हो गई। इन दिनो वह एक कॉलेज में प्रिंसिपल हैं। मेरी बड़ी बहन भी थिएटर से जुड़ी रही हैं।
अब उनकी शादी हो चुकी है, जबकि मेरे पिता जियोग्राफी विषय के प्रोफेसर हैं। मैं भी बचपन से ही जयपुर में थिएटर से जुड़ी रही हूं। मैंने गिरीष कर्नाड का "नागमंडल", के अलावा "सोशियल नेटवर्क" सहित दस नाटकों के 250 से ज्यादा शो किए हैं। मेेरे नाटको के शो जयपुर के अलावा देश के कई दूसरे शहरों मे भी हुए हैं। इसके बावजूद कुछ अलग करने की चाह के चलते मैं फिजियोथैरिपी का कोर्स भी कर रही हूं, पर जब मुझे सीरियल "ना बोले तुम ना बोले हम" से जुड़ने का मौका मिला, तो मुझे लगा कि दरवाजे पर कोई अवसर आया है, तो उसे ठुकराना बुद्धिमत्ता नहीं हो सकती।
"ना बोले तुम ना बोले हम" से जुड़ने का मौका कैसे मिला? जैसा कि मैंने पहले ही बताया कि मेरे घर पर यह अवसर आया था। मुझे अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अभी तक कोई संघर्ष नहीं करना पड़ा। लगभग एक साल पहले सीरियल के कास्टिंग डायरेक्टर सुरेश शर्मा ने मेरा जयपुर में ही ऑडीशन लिया था, उसके बाद बात आई गई हो गई। आठ माह पहले मुझे मुम्बई बुलाया गया। सीरियल में मोहन भटनागर का किरदार निभा रहे अभिनेता कुणाल करण कपूर के साथ मेरा लुक टेस्ट वगैरह लिए गए, फिर दो माह पहले ही मुझे सूचना मिली कि मुझे इस सीरियल में मेघा का चरित्र निभाने के लिए चुना जा चुका है, फिर मुम्बई आ गई और अब इस सीरियल में दर्शक मुझे देख रहे हैं और पसंद भी कर रहे हैं।
चरित्र को लेकर क्या कहेंगी? मैं इसमें मेघा के चरित्र में नजर आ रही हूं,जो कि इंदौर के एक मध्यम वर्गीय परिवार में रह रही है। वह विधवा है और उसके दो बच्चे एक बेटा आदित्य व एक बेटी नविका हंै। मेघा का चरित्र आम उन भारतीय गृहिणियो की ही तरह है,जो कि घर की चार दीवारी मे कैद रहकर सिर्फ बच्चो की देखभाल करने के अलावा परिवार के हर सदस्य की सेवा करती रहती हैं। मेघा एक ऎसी गृहिणी है, जो कि सिंगल मदर होते हुए अपने बच्चो के साथ बहुत ही गहन व मजबूत सम्बंध बनाए हुए है। यह एक ऎसा चरित्र है, जिसके साथ हर आम गृहिणी अपने आपको रिलेट कर सकेगी। मेघा का चरित्र काफी यथार्थ के धरातल पर पेश किया जा रहा है।
पर यह सीरियल तो एक विधवा की प्रेम कहानी है, क्या इस कहानी को लोग पसंद करेंगे? किसने कहा कि यह विधवा की प्रेम कहानी है, यह तो ऎसे दो इंसानों के बीच के रिश्ते की कहानी बयां करता है,जो कि अलग-अलग परिस्थितियों व अलग-अलग मौके पर जब मिलते हैं, तो किस तरह एक-दूसरे के साथ रिएक्ट करते हैं। इस सीरियल मे मेघा एक नहीं, बल्कि कई मुद्दो पर लड़ते हुए नजर आएगी। यह मुद्दे सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक हर तरह के हैं। मिसेज व्यास एक तरफ जहां अपने परिवार को ढंग से रखती है, वहीं वह इस दौर मे भी अपनी जिंदगी जीना चाहती है। इस चरित्र को निभाना मेरे लिए किसी चुनौती से कम नही है।
पहले ही सीरियल में दो बच्चों की मां का चरित्र निभान रिस्की नहीं लगा, क्योंकि यहां जो इमेज बन जाती है, फिर उसी तरह के चरित्र मिलने लगते हैं? मुझे इमेज की परवाह नहीं है। मुझे इमेज में बंधने का डर नहीं सता रहा। मैं अपने आपको लकी मानती हूं कि मुझे कुछ अच्छा करने को मिला है और दर्शक इसे पसंद कर रहे हैं। मुझे तो यह भी लगता है कि आगे भी मेरा लक मेरा साथ देगा।
मिसेज व्यास का चरित्र आपकी निजी जिंदगी के कितने करीब है? दोनों में काफी फर्क है, सिर्फ इतनी समानता है कि मिसेज व्यास की तरह मेरा भी निजी जीवन में मानना है कि कुछ गलत हो रहा है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाई जानी चाहिए। निजी जिंदगी में भी मैं बहुत साधारण जिंदगी जीती हूं।
-शांतिस्वरूप त्रिपाठी
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