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Saturday, 19 May, 2012
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उनमें मुझसे ज्यादा पेशेन्स है
Sunday, January 22, 2012, 09:56 hrs IST
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FM Doordarshan
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भारतीय टेलीविजन की दुनिया में कुमकुम के नाम से जानी जाने वाली जूही परमार ने बिग बॉस सीजन 5 में एक करोड़ रूपए जीतकर यह साबित कर दिखाया कि टीवी दर्शकों में वह सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। शो का फाइनल जूही के चेहरे पर भारी मुस्कुराहट और वहां मौजूद उनके परिवार के सदस्यों के लिए बड़ी खुशियां लेकर आया, क्योंकि जूही अकेली ऎसी प्रतिभागी थीं, जो घर में शुरू से लेकर आखिर तक रहीं। कोई भी यह कह सकता है कि वही जीत की ट्राफी की असली हकदार थीं। श्वेता तिवारी के बाद बिग बॉस जीतने वाली वह दूसरी महिला हैं। एफएम ने जूही से की खास बातचीत...

बिग बॉस में आप क्यों गई थीं?
असल में मैं कई बातें साबित करना चाहती थी। पहली तो यह कि मैंने करीब एक साल तक कोई नया शो नहीं किया था, क्योंकि मेरा वजन बढ़ गया था लेकिन मुझे इस बात की कोई शर्म नहीं है। थायराइड की समस्या के कारण मेरे लिए वजन घटाना भी बड़ा मुश्किल का काम था। दूसरा कारण ये था कि दर्शकों ने अब तक हमेशा जूही को गुस्से में ही देखा था और इसके लिए मैं रिएलिटी शो (पति पत्नी और वो) को धन्यवाद देना चाहूंगी, जिसमें मैंने काम किया। मैं यह महसूस करती थी कि बिगबॉस ऎसा शो है, जिसमें मैं यह साबित कर सकती हंू कि मैं नाच सकती हंू, खाना पका सकती हंू, मजाक कर सकती हंू, रो सकती हंू, हंस सकती हंू और साथ ही गुस्सा भी हो सकती हंू।

तो दर्शकों ने असली जूही को देखा?
हां, आपने असली जूही को देखा, क्योंकि अगर मैं कुछ भी बनावटी करती, तो दर्शकों को पता लग जाता। कोई भी तीन महीने तक बनावटी चीजें नहीं कर सकता। असल में अगर आपने ध्यान से देखा हो, तो मैं हमेशा एक-सा रही। मैंने लोगों को शुरू में माफ किया। मैंने पलट कर किसी के साथ झगड़ा नहीं किया। जब कभी भी मुझे लगा कि मैं कहीं गलत हंू, तो मैंने उनसे सॉरी कहा।

आप शो जीत जाएंगी, इसका अंदाजा था?
ईमानदारी की बात तो यह है कि मैंने सोचा ही नहीं था कि मैं जीत जाऊंगी। मैंने महसूस किया कि घर के भीतर इतना ड्रामा हो रहा था और मैं उसमें मुश्किल से ही भाग ले पा रही थी, इसलिए मेरे जीत जाने का तो सवाल ही नहीं उठता था। मुझे लगता था कि पूरे दिन मुझे रसोई में बर्तन धोते और खाना पकाते देखकर दर्शक ऊब गए होंगे। अब मैं दर्शकों को इस बात के लिए धन्यवाद देना चाहूंगी कि उन्होंने मेरी हर बात पर ध्यान दिया।

आप पुरस्कार राशि का क्या करेंगी?
मैंने अभी इस बारे में कुछ सोचा नहीं है, लेकिन मैं सोचती हंू कि मैं इसे अपने बच्चों के भविष्य और अपने भविष्य के लिए बचाकर रखना चाहंूगी। (मुस्कराती हैं)

फिर से बिग बॉस के प्रसिद्ध घर की तरफ लौटते हैं, आप ग्रीन रूम ग्रुप का हिस्सा थीं और कई लोगों ने इसे पसंद नहीं किया था,आप उसका हिस्सा क्यों बनी थीं?
बाहरी दुनिया में हम सबके कई दोस्त होते हैं, जिनके साथ हम वक्त बिताते हैं। बिग बॉस जैसे गेम शो में जब लोग अच्छे दोस्त बन जाते हैं, तो उन्हें ग्रुप मान लिया जाता है। लोग ये सोचते हैं कि एक ग्रुप के सदस्य दूसरे ग्रुप के खिलाफ षड़यंत्र रचते हैं, जो कि सही नहीं है।

स्काई ने करीबन हर एक से झगड़ा किया और वह हमेशा गलत साइड में था, आपने हमेशा उसको सहयोग किया, ऎसा क्यों?
घर में स्काई के आने से पहले मैंने कुछ अच्छे दोस्त बनाए थे, उनके साथ मेरे सम्बंधों में स्काई के घर में आने के बाद भी कोई बदलाव नहीं आया था। मेरी स्काई से दोस्ती रही है और दुर्भाग्य से उसके घर में कुछ लोगों से खराब सम्बंध थे, क्योंकि मुझे उनमें से किसी को चुनना था, तो मैंने स्काई को चुना, क्योंकि वह मेरा दोस्त था।

बिग बॉस के घर से आपने क्या सीखा?
मेरे लिए तो जिंदगीभर याद रखने वाला अनुभव रहा। मैं सोचती हंू कि बिग बॉस जैसा शो दोबारा मुझे कभी करने को नहीं मिलेगा। यह मेरा पहला शो था, जिसका पैकअप तीन महीने बाद हुआ है। अब तक मैंने जो शूटिंग की, उसमें ये सबसे लंबी शूटिंग थी। (मुस्कराती हैं) घर के भीतर हमें चीज और बटर जैसी चीजों को हासिल करने के लिए टास्क करने पड़ते थे। घर के भीतर रहकर मैंने जाना कि कई चीजों को हम अपना मान लेते हैं, जबकि वे बहुत कीमती होती हैं। मैंने महसूस किया कि अगर कॉफी, बटर, जैम जैसी चीजें हमारी जिंदगी में महत्वपूर्ण हैं, तो निश्चित तौर पर रिलेशनशिप तो और भी अधिक महत्वपूर्ण है और हमें इसे यूं ही नहीं खाना चाहिए।

आप घर के भीतर लंबे समय तक रहीं, घर के बाहर आने पर आपने कौन-सी बातों की कमी महसूस की?
पिछले तीन माह से मेरी जिंदगी बिग बॉस में ही सिमट गई थी। मुझे बिग बॉस के निर्घारित कार्यक्रम के अनुसार ही काम करना होता था और प्रत्येक शनिवार को हमें एलिमिनेशन का इंतजार होता था और प्रत्येक सोमवार को नोमिनेशन का। सोमवार से शुक्रवार तक हम अपने काम में व्यस्त रहते और हर सुबह एक गाने के साथ जागते थे, इसलिए बिग बॉस अब मेरे सिस्टम में हो गया है और सामान्य जिंदगी में लौटने में मुझे अभी थोड़ा वक्त लगेगा। फिर भी मैं खुश हंू कि अब मेरी नींद सुबह कुत्तों के भौंकने से नहीं खुलेगी, क्योंकि मेरे घर के बाहर कई सारे कुत्ते रहते हैं (हंसती है) ।

बिग बॉस के बाद की जिंदगी को आप किस तरह देखती हैं?
मैं इसे जिंदगी की दूसरी पारी के रूप में देखती हंू, क्योंकि वजन के कारण मैंने करीब एक साल तक कोई काम नहीं किया। सौभाग्य से, जब मैंने बिग बॉस के घर में प्रवेश किया, तब मैंने मेरा वजन दस किलो कम किया था और अब मेरा वजन पांच कि लो और कम हो गया है, इसलिए अब मैं बेटर शेप में हंू। कुल मिलाकर मैं खुश हंू।

क्या आप चाहती हैं कि आपके पति सचिन श्रॉफ बिग बॉस के अगले सीजन का हिस्सा हों?
मैं महसूस करती हंू कि मेरे मे पी फॉर पेशेन्स और सी का कंट्रोल नहीं है। बिग बॉस को धन्यवाद कि उसके घर में रहकर मैं धैर्य रखना और अपने पर नियंत्रण रखना सीख गई हंू। अगर मैं तीन माह बिग बॉस के घर में रह सकती हंू, तो सचिन निश्चित तौर पर छह माह वहां रह सकते हैं, क्योंकि उनमें जबरदस्त धैर्य है।
-रमेश दाधीच
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