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Wednesday, 08 February, 2012
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टीवी बीवी है,तो फिल्म गर्लफ्रैंड
Saturday, September 04, 2010, 11:18 hrs IST
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सहारा वन टेलीविजन पर प्रसारित धार्मिक धारावाहिक "माता की चौकी" ने आध्यात्मिक और नैतिकता में विश्वास करने वाले दर्शकों को काफी प्रेरित किया है। शुरूआत से लेकर अब तक धारावाहिक की कहानी में कई रोचक और दिलचस्प मोड़ आए। धारावाहिक के कलाकारों में मुस्कान अरोड़ा के बाद दमदार अभिनेता सुदेश बेरी का नाम उभरकर सामने आता है। गौरतलब है कि सुदेश बेरी ने इसमें शील कुमार की सशक्त भूमिका निभाई थी और माता की भक्त साक्षी के हाथों संहार के बाद उनके शरीर में एक आत्मा प्रवेश करती है और पैदा होता है मिट्टी से एक औगढ़ बाबा, जो अब अपने नए रूप में दर्शकों के सामने है। वह एक बार फिर माता की भक्त साक्षी से बदला लेने की कोशिश करेगा। अपने इस नए रूप और किरदार के बारे में सुदेश बेरी कहते हैं, "माता की चौकी" ने मुझे जिस मुकाम पर पहुंचाया है, उसके लिए मैं दर्शकों का शुक्रगुजार हूं। दर्शकों ने मेरी भूमिका में अलग-अलग शेड्स देखे हैं। मैं इसमें बुराई के रास्ते पर चलता हूं। कई बार मुझे दर्शकों से फीडबैक भी मिला है कि मेरे किरदार को वो अलग नजरिए से देखते हैं। मेरी हमेशा यह कोशिश रहती है कि अपने किरदार के रंग में पूरी तरह रंग जाऊं। दर्शकों ने शील कुमार से नफरत भी की है, शायद यही किरदार की असली पहचान है। धारावाहिक के निर्माताओं ने मुझे फिर से नई भूमिका देकर दर्शकों के समक्ष रूबरू होने का एक और मौका दिया है। मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मैं दर्शकों की उम्मीद पर खरा उतरूं ।"
"माता की चौकी" इस समय सहारा वन टेलीविजन का सबसे लोकप्रिय सीरियल है, लिहाजा इससे दुबारा जुड़कर मैं बेहद खुश हूं। मैंने इससे पहले भी कई सीरियल किए हैं, कर रहा हूं, लेकिन जो सुकून और खुशी शील कुमार की भूमिका करके मिली है मैं बयां नहीं कर सकता। यह भूमिका मेरे लिए शुरू से ही चुनौतीपूर्ण रही है। टेली जगत और हिंदी सिने जगत में मैं 1990 से कर रहा हूं। सुराग, अंदाज, कशिश, आरजू, जॉन, आहट, सैटरडे सस्पेंस, कहीं किसी रोज, अंबर धारा और अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो मेरे चर्चित सीरियल हैं। तकरीबन 40 फिल्मों में भी काम कर चुका हूं। टीवी मेरी बीवी है, तो फिल्में मेरी गर्लफ्रैंड। मेरे लिए टेलीविजन एक पगडंडी है, जिस पर चलकर मुझे एक लंबी पारी खेलनी है। मैं टीवी के साथ फिल्मों को भी प्राथमिकता देता हूं।
छोटे परदे और बड़े परदे के फर्क के बारे में सुदेश बेरी कहते हैं, टीवी पर काम करके हम रेत पर दौड़ते हैं और फिल्मों में काम करके जमीन पर । कलाकारों की इस लंबी कतार में मैंने जो जगह बनाई है, उसे मैं माता का आशीर्वाद मानता हूं। मैं भी माता का भक्त हूं, लेकिन मेरी भूमिका के बारे में मत सोचिए। मैं असल जिंदगी में सीधा-साधा इनसान हूं, जो दर्शकों के प्यार की वजह से एक अलग मुकाम पर पहुंच गया हूं। मेरी कोशिश है कि दर्शकों ने जो प्यार और सम्मान दिया है खुद को उसके योग्य साबित करता रहूं। -डी पॉल
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