आज की पीढ़ी बबीता को करिश्मा और करीना की मां के रूप में पहचानती है। इस पीढ़ी को शायद यह पता भी न होगा कि तीन-चार दशक पहले यही बबीता खुद एक जानी-मानी लोकप्रिय स्टार थीं। वह करिश्मा और करीना दोनों ही से कहीं ज्यादा खूबसूरत थीं और न जाने कितने सिने प्रेमी बबीता पर दिलो-जान से फिदा थे। बबीता अभिनेत्री साधना की चचेरी बहन हैं।
दोनों की शक्लो-सूरत भी इतनी मेल खाती थी कि कई फिल्मों में साधना बबीता जैसी लगीं, तो कभी-कभी बबीता की तस्वीरें देखकर साधना का भ्रम हुआ। बबीता के पिता हरि शिवदासानी खुद भी उस दौर के अच्छे चरित्र अभिनेता थे। उन्होंने एक ब्रिटिश महिला बारबरा से शादी की थी। शायद यही वजह थी कि बबीता भी किसी अंग्रेज मेम जैसी ही लगती थीं। "राज" बबीता की पहली साइन फिल्म थी, मगर उनकी पहली रिलीज फिल्म थी संजय खान के साथ "दस लाख"। "राज" फिल्म से बबीता की "किस गर्ल" कहकर पब्लिसिटी की गई थी। यह किस गर्ल लोगों के दिलो-दिमाग पर इस कदर छाई कि सुपरहिट "फर्ज" से जितेन्द्र के साथ उनकी हिट जोड़ी बन गई। "बनफूल", "औलाद", "अनमोल मोती", "बिखरे मोती", "एक हसीना दो दीवाने" जैसी जितेन्द्र-बबीता की जोड़ी वाली कई फिल्में आई। जितेन्द्र के साथ बबीता की जोड़ी वैसी ही हिट थी, जैसी बाद में श्रीदेवी और जयाप्रदा के साथ हुई। वैसे तो बबीता को साधना की तरह अपनी प्रतिभा को साबित कर दिखाने लायक फिल्में कभी नहीं मिलीं, फिर भी कुछ फिल्मों को बबीता की अच्छी फिल्में कहा जा सकता है।
राजेश खन्ना के साथ "डोली", धर्मेन्द्र के साथ "कब क्यों और कहां", "जितेन्द्र" के साथ "एक हसीना दो दीवाने", शशि कपूर के साथ "हसीना मान जाएगी", शम्मी कपूर के साथ "तुमसे अच्छा कौन है", विश्वजीत के साथ "किस्मत" और राजेन्द्र कुमार के साथ "अनजान" बबीता की हिट फिल्में थीं। रणधीर कपूर और बबीता बचपन के दोस्त थे। यही दोस्ती वक्त के साथ पहले प्यार और फिर शादी में बदली। "जीत" और "कल आज और कल" में रणधीर कपूर और बबीता नायक-नायिका के रूप में फिल्मी पर्दे पर दिखाई दिए।
रणधीर कपूर से बबीता की शादी के बाद कपूर खानदान की रीति को निभाते हुए बबीता ने फिल्मों को अलविदा कह दिया, मगर उनके दिल में कहीं एक चिंगारी दबी रह गई थी कि एक्टिंग में वह अपना कोई मुकाम नहीं बना पाई। अपनी यही अधूरी हसरत उन्होंने अपनी बेटियों के माध्यम से पूरी की। करिश्मा और करीना के फिल्मी करिअर को सही दिशा दिखाई, उनकी फिल्मों और कहानियों पर सुलझे हुए निर्णय लिए।
निजी जिंदगी में बबीता बहुत सख्त और उसूलों की पाबंद हैं। शायद यही वजह थी कि रणधीर कपूर की आरामतलब और बेफिक्र जिंदगी उन्हें रास न आई और वह उनके घर से बेटियों के साथ निकल गई। रणधीर कपूर से एक मुलाकात के दौरान बबीता के इस कदम के बारे में पूछा गया, तो रणधीर का जवाब था, "बबीता को तो किसी आर्मी के ऑफिसर से शादी करनी चाहिए थी। उसके उसूल और उसकी सख्ती...तौबा...तौबा।"
बबीता पर फिल्माए गीत आज भी जब कभी फिजा में गूंजते हैं, तो बबीता की याद दिला जाते हैं। जैसे "बेखुदी में सनम उठ गए जो कदम...", "आओ हुजूर तुमको सितारों में ले चलूं" और "रिमझिम के गीत सावन गाए..."।
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