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प्रेरणा बनकर हमेशा साथ रहीं
Sunday, November 27, 2011, 09:33 hrs IST
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भारतीय सिनेमा की पहली टॉम बॉय नायिका गीता बाली अपने दौर की मशहूर अभिनेत्री थीं। फिल्मों में उन्हें सबसे पहली ब्रेक निर्माता-निर्देशक केदार शर्मा ने अपनी फिल्म-सुहाग रात में दिया था। 1948 में प्रदर्शित सुहाग रात से लेकर 1956 में प्रदर्शित रंगीन रातें तक गीता बाली केदार शर्मा के जीवन की प्रेरणा बनी रहीं। इन नौ साल में गीता बाली के बगैर फिल्म की कल्पना तक उन्होंने नहीं की। केदार शर्मा गीता बाली से किस कदर अभिभूत और प्रभावित थे, इसका अंदाजा एक घटना से सहज लगाया जा सकता है...

केदार शर्मा ने एक फिल्म बनाई थी- बेदर्दी। एक वेश्या की कहानी पर बनीं इस फिल्म के नायक थे जसवंत। जसवंत गीता बाली के बहनोई थे। वे गीता बाली के सहारे फिल्मों में हीरो बनने की कोशिश में थे। गीता बाली के अनुरोध पर ही केदार शर्मा को उन्हें बेदर्दी में नायक बनाना पड़ा। उस समय केदार शर्मा ने गीता बाली से कहा था, जसवंत को अभिनय करना बिल्कुल नहीं आता और वे शायद ही फिल्मों में चल पाएं। इस पर उन्हें समझाने के अंदाज में गीता बाली ने कहा-शर्माजी, यह मेरे घर का मामला है। मेरी खातिर उसे हीरो बनाकर पेश कर दीजिए प्लीज। इस प्लीज पर केदार शर्मा कुर्बान हो गए और उन्होंने जसवंत को बेदर्दी में गीता बाली का नायक बना दिया।

इस दौरान गीता बाली और उनकी बहन ने अपनी फिल्म कम्पनी बाली सिस्टर्स की स्थापना की और इसके बैनर में रागरंग नामक फिल्म शुरू की। यह फिल्म उन्हीं का निर्माण थी, उनके घर का मामला थी। लिहाजा केदारा शर्मा को लगा, इसमें वे जसवंत को ही हीरो बनाएंगी। लेकिन अपने घर के हीरो को परे रख उन्होंने इस फिल्म का हीरो बनाया बशोक कुमार को। केदार शर्मा ने गीता बाली ेसे कहा, गीताजी मेरी फिल्म में तो आपने जसवंत को नायक बनाने पर मजबूर किया, लेकिन अपनी फिल्म में आपने अशोक कुमार को लिया।

इस पर बीता बोलीं, क्या करें शर्माजी। जसवंत के नाम पर फिल्म बिक नहीं सकती न। मजबूरन अशोक कुमार को लेना पड़ा। गीता बाली ने अपनी फिल्म की मार्केट का खयाल किया और जसवंत को हीरो बनाने के लिए केदार शर्मा को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। यह नुकसान उन्होंने उठाया सिर्फ गीता बाली की खातिर, मगर इसका अफसोस केदार शर्मा को बिलकुल भी नहीं था।

जब कोई औरत किसी कलाकार की प्रेरणा बनकर आती है, तो अपना खयाल किए बगैर बस, उसी कलाकार की कला के लिए जीना उसके लिए एक बड़ी तपस्या बन जाती है। कलाकार के साथ वफादार रहना अपने आप में एक तपस्या होती है। गीता बाली भी नौ साल तक केदार शर्मा की प्रेरणा बनी रहीं। बाद में उन्होंने शम्मी कपूर से विवाह कर लिया और एक बीमारी के कारण असमय ही इस संसार से विदा हो गई। केदार शर्मा गीता बाली को कभी नहीं भूल पाए। अतीत की यादों की धुंध पलकों पर पाले वे अपनी हर नई नायिका में गीता बाली की तलाश करते रहे। माधवी, बॉम्बी से लेकर सपना सारंग तक अपनी हर नवोदित नायिका में केदार शर्मा उन्हें ढूंढते रहे। हर बार एक ही बात उनके होंठो पर आई, देख रहे हैं? यह मेरी नई हीरोइन। है न बिल्कुल गीता बाली जैसी।

-ठाकुरदास खत्री
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