Daily News
Saturday, 19 May, 2012
 |   |   |   |   |   |   |   |   |   |   | 
जो कुछ किया प्रेरणा का प्रतीक रहा...
Sunday, January 08, 2012, 10:43 hrs IST
Email Print Comment min  max | Bookmark and Share
Left
FM-Special-article03
Left
चेहरे पर भोलापन, बड़ी-बड़ी आंखें, गुलाबी होंठ, सब कुछ मिलाकर चांद के समान मुस्कुराता हुआ चेहरा, जब आंखों के सामने घूमता है, तो याद आती हैं अभिनेत्री नंदा। साठ और सत्तर के दशक की इस खूबसूरत और मासूम अदाकारा ने अपने कॅरियर की शुरूआत बाल-कलाकार के रूप में की थी। बाद में वे सफल नायिका बनीं और फिर चरित्र-अभिनेत्री। अपने संवेदनशील अभिनय से उन्होंने कई फिल्मों में अपनी भूमिकाओं को बखूबी जीवंत किया है। नंदा के फिल्मी-जीवन की कहानी आइए जानते हैं, उन्हीं के शब्दों में...

तियां प्राय: मिली-जुली होती हैं। कुछ सुख के क्षणों की होती हैं और कुछ दुख के क्षणों की। कोई भी दुखद घडियों को याद करना नहीं चाहता। लेकिन यह हो कहां पाता है? एक बार विचारों का सिलसिला जो शुरू हुआ, तो स्मृतियां अपने आप चलचित्रों की भांति दिमाग में आती-जाती हैं। मैंने प्राय: उन क्षणों को भूल जाने की कोशिश की है, जब जिंदगी बहुत कठिन हो गई थी, लेकिन लाख चाहने पर भी मैं उन चित्रों की याद को अपने मन से नहीं निकाल सकती।
मुझे अपने पिताजी की बहुत कम याद है। अनेक प्रकार की घटनाओं में से सिर्फ एक ही याद रह गई है। पिताजी मेरे लिए दादा थे और फिल्मी दुनिया के लिए मास्टर विनायक, मराठी फिल्मों के मशहूर निर्माता-निर्देशक।

घर में सात भाई-बहनों में मैं सबसे छोटी थी। मुझे नृत्य और अभिनय का शौक बचपन से ही था। जब मैं छह साल की थी, तब दादा ने मुझे अपनी मराठी फिल्म में काम करने को कहा, तो पहले मैंने इनकार कर दिया, मगर बाद में मां के समझाने पर राजी हो गई। उस फिल्म में मैंने एक लड़के की भूूमिका की थी। उस समय मैं इतनी सयानी तो थी नहीं कि अभिनय-कला के विष्ाय में कुछ जानती समझती... इसलिए मुझे याद नहीं कि मैंने दादा की फिल्म में किस तरह का अभिनय किया। बाद में मैंने उनकी एक हिंदी फिल्म मंदिर में भी बतौर बाल-कलाकार काम किया। इन फिल्मों में मेरे अभिनय को काफी पसंद किया गया और मुझे बहुत-सी फिल्मों के प्रस्ताव मिले।

इस बीच हमारे घर की माली हालत काफी खराब हो गई और मुझे अपने भाई-बहनों के साथ चाचा के पास भेज दिया गया। मेरे चाचाजी हिंदी-मराठी फिल्मों के सुप्रसिद्ध फिल्मकार वी.शांताराम थे। उनके घर जाना भी एक शगुन था। उन्होंने मुझे प्रेरित किया और इस योग्य बनाया कि मैं घर के हालात को सम्भाल सकूं। उन्होंने ही मुझे पहली बार एक अच्छी और बड़ी भूमिका अपनी फिल्म तूफान और दीया में दी और शानदार ढंग से पर्दे पर पेश किया। यह पिल्म बेहद सफल रही और मैं नायिका के रूप में स्थापित हो गई। इस फिल्म में काम करने की जहां मुझे अपार खुशी थी, वहीं इस बात का दुख भी था कि फिल्म के प्रर्दशन से पहले ही पिताजी का देहांत हो गया था। काश, वे मेरी सफलता देख पाते...।

तूफान और दीया के बाद मैंने कई फिल्मों में काम किया। मसलन, साक्षी गोपाल, आंचल, काला बाजार, अपना घर, चांद मेरे आजा, आशिक, बेदाग, आकाशदीप, कहीं दीया जले कहीं दिल, अब्दुल्ला दीवाना, मेहंदी लगी मेरे हाथ, कानून, मेरा कसूर क्या है, तीन देवियां, जब जब फूल खिले, भाभी, धूल का फूल, आगरा रोड, छोटी बहन, दुल्हन, पहली रात, बरखा, अमर रहे प्यार, राजा साहब, नींद हमारी ख्बाव तुम्हारे, गुमनाम, अभिलाष्ाा, बड़ी दीदी, बेटी, कैसे कहूं, जुआरी, मुहब्बत इसको कहते हैं, रूठा ना करो, असलियत, वो दिन याद करो, द ट्रेन, धरती कहे पुकार के, हम दोनों, नर्तकी, परिवार, आज और कल, चार दीवारी, कैदी न.111, उसने कहा था, इत्तेफाक, अधिकार, शोर, जोरू का गुलाम, नया नशा, प्रेम रोग, आहिस्ता-आहिस्ता, मजदूर आदि।

मेरी अभिनीत सभी फिल्मों में मेरी भूमिकाएं आसान नहीं रहीं। अपनी भूमिकाओं को जीवंत बनाने के लिए मुझे कठिन परिश्रम करना पड़ा। मैं अपने अभिनय क्षेत्र में कहां तक सफल हुई हूं इस विष्ाय में मैं कुछ नहीं कह सकती। हां इतना जरूर कहंूगी कि जो कुछ मैंने किया, वह सदैव मेरी प्रेरणा का प्रतीक रहा है। अपने फिल्मी जीवन की कुछ स्मृतियों को मैं शब्दों में बांध नहीं सकती। मैंने संघष्ाü की घडियों को बड़ी कठिनाई से पार कर अपना मुकाम बनाया है। आज घर में सब सुख सुविधाएं और आराम के साधन हैं। फिल्म जगत में मिली सफलता और इन सबसे ऊपर कठिन भूमिकाओं को अभिनीत करने का आनंद है। मेरा जीवन मेरे अभिनय में विलीन हो गया है।
More Stories Top News
fm classic news पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई...
fm classic news एक्टिंग कोई खिलौना नहीं...
fm classic news चल चल रे नौजवान
fm classic news एक विवाहित स्त्री का अंतर्द्वद्व
fm classic news मेरी मौत काम करते हुए हो...
fm classic news पर्दे के पीछे की जिज्ञासा पर्दे पर लाई
fm classic news रूदन के पीछे छुपा कड़वा सच
fm classic news महानगर की चकाचौंध का कड़वा सच
fm classic news तुम-सा कोर्ई ना था...
fm classic news रोमांटिक फिल्मों का रूमानी नायक
Copyright © Daily News. All rights reserved.