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Tuesday, 07 September, 2010
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प्रोमो का छलावा
Saturday, July 24, 2010, 13:09 hrs IST
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सितारों की बढ़ती दखलअंदाजी के चलते फिल्मों के प्रोमो का बदलता रंग... यह है मायावी दुनिया का मायावी जाल। अब वक्त आ गया है यह कहने का कि- जागो दर्शक जागो
मणि रत्नम की फिल्म "रावण" के फ्लॉप का मातम अभी तक जारी है। सौ करोड़ की इस फिल्म के बॉक्स ऑफिस में बुरी तरह से धराशायी होने की एक बड़ी वजह इसके प्रोमो को माना जा रहा है। इस प्रसंग में एक दिलचस्प तथ्य सामने आया है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी गोविंदा ने दबे-छुपे ढंग से यह आरोप लगाया है कि फिल्म के प्रोमो में उन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई, जिस वजह से दर्शकों का क्रेज काफी कम हुआ। बच्चन पर इससे पहले भी इस तरह के आरोप लगते रहे हैं। बच्चन बहू ऎश के लिए यह एक आम सी बात हो गई है। इंडस्ट्री में अब यह बात आम हो चुकी है कि ऎश अपने दबदबे को कायम रखने के लिए ज्यादा-से-ज्यादा फुटेज लेना चाहती हैं। एक विश्वस्त सूत्र का कहना है कि एक सोची समझी साजिश के तहत बच्चन ने बड़ी चतुराई के साथ पूरी फिल्म ही नहीं इसके प्रोमो में भी अपने आपको ज्यादा एक्सपोज करवा लिया। बच्चन की बात जाने दें, तो इस तरह के आरोप अक्षय, सैफ जैसे कई अभिनेताओं पर गाहे-बगाहे लगते रहे हैं। कभी "ओमकारा","रेस" और "टशन" के प्रोमो को लेकर भी सैफ की इसके अन्य अभिनेताओं से ठन गई थी। अब सैफ कहते हैं, "फिल्म के प्रोमो में किसे ज्यादा एक्सपोजर दिया जाएगा, यह पूरी तरह से निर्माता-निर्देशक तय करते हैं, इसमें मेरा नाम घसीटना एक फिजूल की सोच है।" बात वाजिब है, पर इन दिनों यह देखने को मिल रहा है कि बड़े फिल्म सितारे अपनी फिल्म के प्रोमो पर हावी होने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके चलते फिल्मों के प्रोमों दर्शकों के लिए एक छलावा बनते जा रहे हैं। अभी हाल में सोनम और इमरान की फिल्म "आई हेट लव स्टोरी" का प्रोमो देखकर कई दर्शक सिनेमा हाल की तरफ आकçष्ाüत हुए, पर नए निर्देशक पुनीत मल्होत्रा की इस फिल्म ने दर्शकों को बुरी तरह से हताश किया। अभिनेत्री सोनम की जबरदस्त फैन सृष्टि यादव ने जयपुर से मेल कर एफएम संवाददाता से शिकायत की है,"मैं तो इसके प्रोमो में सोनम के कुछेक सीन देखकर इसके प्रति मुग्ध हुई, पर पूरी फिल्म में सोनम का भद््दा लुक और खराब अभिनय ही मुझे नजर आया। आखिर फिल्म के प्रोमो हमें कब तक इस तरह से ठगते रहेंगे।"
देखा जाए, तो फिल्म प्रोमो को लेकर दर्शकों की यह शिकायत कोई नई नहीं है। अक्सर दर्शकों को सम्मोहित करने के चक्कर में इसमें जरूरत से ज्यादा अतिरंजना का सहारा लिया जाता है। अपने पैसे की पूरी वापसी की चाह में इस प्रोमो के छलावे में ही पड़कर दर्शक थिएटर की तरफ रूख करता है। कई फिल्मों को अपने कैमरे में कैद कर चुके पेशे से छायाकार नसीम अहमद अच्छा खासा मूड बनाकर अपने पास के एक मल्टीप्लैक्स थिएटर में "काइट््स" देखने गए। वो और उनके सहयोगी इसके प्रोमो से बहुत उत्साहित थे, इसलिए पूरी यूनिट के लोग पहले ही दिन इस फिल्म को देख लेना चाहते थे, मगर "काइट््स" देखने के बाद उनका पूरा मूड खराब हो गया। गुस्से से भरी उनकी प्रतिक्रिया थी," इसका प्रोमो दिखाकर रोशन ने हमें ठग लिया। समझ में नहीं आता कि रितिक ने इतनी बकवास फिल्म में कैसे काम कर लिया।" नसीम अहमद तो सिर्फ एक उदाहरण हैं। ऎसे लाखों सिने रसिक हैं, जो फिल्म का प्रचार या प्रोमो से खुश होकर ही किसी फिल्म को देखने का मन बनाते हैं। ये ऎसे दर्शक हैं, जिनके लिए आज की महंगाई में फिल्म एक खास मनोरंजन है, जो बहुत मूड बनाकर हर फिल्म देखने जाते हंै। पहले दिन किसी फिल्म को देखने का इनका मूड कई हफ्ते पहले तैयार हो जाता है। ऎसे में फिल्म का प्रोमो फिल्म के प्रति इनके आकष्ाüण की एक बड़ी वजह बन जाता है।
माना जाता है कि देश के अस्सी प्रतिशत दर्शक फिल्म का प्रोमो देखकर यह तय करते हैं कि उन्हें कौन-सी फिल्म देखनी चाहिए। लेकिन हाल के वष्ाोüü में ज्यादातर फिल्म के प्रोमो ने दर्शकों को हताश ही किया है। हल्ला बोल, चांदनी चौक टु चायना, लॅक , तीन पत्ती, अलादीन, दे दनादन, काइट्स, रावण, आदि कई फिल्मों के प्रोमो की बात करें, तो इनके भीतर की सच्चाई खुल जाएगी। ये बिल्कुल उस कहावत की तरह हैं कि, खोदा पहाड़, निकली चुहिया। अपनी फिल्मों में भव्यता के बेहद पक्षधर करण जौहर की पिछली कुछ फिल्मों के प्रोमो काफी सराहे गए थे। इनके जरिए करण ने बहुत खूबसूरती के साथ दर्शकों के सामने पूरी फिल्म का सार पेश किया था। करण बताते हैं, "कभी खुशी कभी गम हो" या जल्द रिलीज होने वाली "वी आर फैमिली", इनके प्रोमो में मैंने हमेशा फिल्म के मूड को पूरी ईमानदारी से पेश करने की कोशिश की है।" सच तो यह कि "कभी खुशी कभी गम" के अलावा उनकी पिछली सारी फिल्में वेक अप सिड, कुर्बान, माय नेम इज खान, आई हेट लवस्टोरीज आदि के प्रोमो दर्शकों के लिए महज एक मृगतृष्णा बन गए। यूटीवी के कर्ता-धर्ता रॉनी स्क्रूवाला फिल्म के प्रेामो में अतिरंजना की बात को कबूल करते है। कई बड़ी फिल्मों के निर्माता स्क्रूवाला कहते हैं "आप फिल्म के प्रोमो को छलावा मत कहिए। फिल्म को जोरदार ढंग से प्रचार करने के लिए इसके प्रोमो में कुछ "हाई फाई" वाले सीन रखना बेहद जरूरी है। हां, मैं इस बात के पक्ष में हूं कि इसमें ज्यादा अतिरंजना की मदद ना ली जाए। इसमें जितना हो सके अलग से कुछ कहने की कोशिश ना की जाए... ना ही इसमें किसी बड़े सितारे को ज्यादा अहमियत दी जाए। बेहतर स्थिति यह है कि आप फिल्म के कुछ महत्वपूर्ण दृश्यों को लेकर इसका प्रोमो तैयार कीजिए, ताकि फिल्म का पूरा मूड दर्शकों के सामने साफ हो जाए। हाल ही रिलीज अपनी फिल्म "तेरे बिन लादेन","राजनीति" आदि अपनी सारी छोटी-बड़ी फिल्मों का प्रोमो हमने इसी ढंग से तैयार किया है। बावजूद इसके कोई फिल्म दर्शकों को पसंद नहीं आती है, तो इसमें फिल्म के मूड पर कोई दोष्ा नहीं मढ़ सकते हैं। आखिर फिल्म के प्रचार में हम उसका पूरा सार तो पेश नहीं कर सकते।" बात पूरी तरह से वाजिब है। सभी इस सच्चाई से वाकिफ हैं कि प्रोमो फिल्म की सफलता की कोई गारंटी नहींं बनते हैं। फिल्म यदि बुरी होती है, तो दूसरे दिन से ही दर्शक कन्नी काटने लगते हैं।" बावजूद इसके इन दिनों प्रोमो को बहुत तार्किक ढंग से एक छलावे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई, खट््टा-मीठा, पीपली लाइव, दबंग, लफंगे परिंदे आदि कई फिल्मों के प्रोमो इधर दर्शकों का बड़ा क्रेज बन रहे हैं। वैसे इसका एक दूसरा पक्ष यह है कि कई बार प्रोमो फिल्म के बिजनेस के लिहाज से काफी फायदेमंद साबित होते हैं, जैसा कि हाल के दौर में "चक दे इंडिया", "वेलकम", "तारे जमीन पर","सिंह इज किंग","थ्री इडियट्स "राजनीति" आदि फिल्मों के मामले में हुआ। बड़े सितारों की इन फिल्मों के प्रोमो काफी दिलचस्प थे, जिसका फायदा यह हुआ कि इनकी ओपनिंग काफी शानदार रही। इधर आमिर खान प्रोडक्शन की फिल्म "पीपली लाइव" का प्रोमो दर्शकों के लिए विशेष्ा आर्कष्ाण का विष्ाय बना हुआ है। फिल्म के प्रोमो को अलग से शूट करने की बात को आमिर खान एक खास जरूरत मानते हैं। बहुत छोटे सितारे की यह फिल्म अपने सब्जेक्ट की वजह से सहज ही एक जिज्ञासा का विष्ाय बन गई है। खास तौर से इसका एक गीत "डायन महंगाई" आज की कमरतोड़ महंगाई के चलते बेहद प्रासंगिक बन गया है। आमिर कहते हैं,"खुद ज्यादा ना कहते हुए मैंने फिल्म के प्रोमो में ही इन सब बातों को हाईलाइट किया है। ताकि फिल्म के मूल सब्जेक्ट के साथ दर्शक सीधे जुडें।" संजीदा निर्देशक मिलन लुथरिया ने भी अपनी जल्द रिलीज वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई का प्रोमो काफी लुभावना बनाया है। लुथरिया कहते हैं," यह फिल्म मुंबई अंडरवल्र्ड के एक खास दौर की कहानी बयां करती है। ज्यादा फुटेज ना देते हुए इसका प्रोमो मैंने बहुत कट-टु-कट बनाया है।" 37 साल बाद प्रदर्शन का रास्ता देख रही अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा की मुख्य भूमिका से सजी फिल्म "यार मेरी जिंदगी" इधर सभी का क्रेज बनी हुई है। इसके नए निर्देशक अशोक गुप्ता मानते हैं कि शत्रुघ्न सिन्हा के विशेष्ा सहयोग के चलते यह फिल्म 37 साल बाद भी प्रदर्शित हो पा रही है। इस दौरान फिल्म के दोनों कलाकार बूढे हो चुके हैं। जल्द ही इसके दो प्रोमो विभिन्न चैनल्स पर दिखाए जाएंगे। कुछ पैचवर्क की शूटिंग कर शत्रुघ्न सिन्हा की मदद से उन्होंने इसका प्रोमो तैयार किया है। अशोक गुप्ता बताते हैं, "मैं मानता हूं कि इस फिल्म के प्रदर्शन में तीन दशक का वक्त लगा है, पर इसका सब्जेक्ट आज के हालात में भी काफी प्रासंगिक है। हम इन दोनों प्रोमो के जरिए यही बताना चाहते है। फिल्म के निर्माण में हुई अतिरिक्त देरी इस संदर्भ में कोई मायने नहीं रखती।" अशोक सिर्फ यह चाहते हैं कि दर्शक इसके प्रोमो को देखकर इस फिल्म के प्रति आकçष्ाüत हो। फिल्म के हिट होने का भाग्य तो इसके सम्पूर्ण प्रभाव पर ही निर्भर करेगा।"
पिछले साल की एक बड़ी हिट फिल्म "थ्री इडियट््स" के प्रोमो में निर्देशक राजकुमार हिरानी ने जो सिनेमाई ईमानदारी बरती थी, वो बात बहुत कम फिल्मों के प्रोमो में दिखाई पड़ता है। फिल्म के प्रोमो में उनकी व्यवसायिक सोच खुलकर सामने आती है। इसके निर्माता विद्यु विनोद चोपड़ा कहते हैं,"मैं इस बात को जानता हूं कि फिल्म के बारे में मेरे किसी भी मिथ्या प्रचार को दर्शक कभी नहींं भूलते हैं, इसलिए अच्छा यही है कि सच कहने से पीछे मत हटिए।" ऎसे में दूसरे निर्माताऔं को भी यह बात गंाठ बांध लेनी चाहिए कि फिल्म के प्रोमो सिर्फ क्षण भर के लिए दर्शकों को दिग्भ्रमित करते हैं। फिर क्यों ना फिल्म के प्रोमो के निर्माण में भी पूरी ईमानदारी बरती जाए।
-मुंबई से असीम चक्रवर्ती
एक लम्बे अरसे के बाद याहू हीरो शम्मी कपूर रूपहले परदे पर वापसी कर रहे हैं। रोचक बात यह है कि वो जिस फिल्म में काम करने के लिए राजी हुए हैं, उस फिल्म के नायक रणबीर कपूर होंगे। मतलब परदे पर दर्शक पहली बार दादा-पोते को एक साथ देखेंगे। जी हां, इम्तियाज अली ने अपनी फिल्म रॉकस्टार में दोनों को एक साथ साइन किया है। वाकई राज कपूर जिंदा होते, तो अपने पोते रणबीर और भाई शम्मी को एक साथ अभिनय करते देखकर कितना खुश होते। शम्मी का कहना है, मैं यह छोटा-सा रोल अपने पोते रणबीर की गुजारिश पर कर रहा हूं। हालांकि सप्ताह में तीन दिन मैं डायलिसिस पर रहता हूं, पर इम्तियाज ने मेरी परेशानियों को ध्यान में रखकर शूटिंग कार्यक्रम तय किया है। कहते हैं वक्त के साथ बदलाव को अपनाने में ही समझदारी है। इनसान जब बदलावों को आत्मसात करता है, तो उसे नई सूरतें,नई सीरतें और नई शैलियां दिखाई देती हैं। आज सिनेमा इसी रास्ते पर चल रहा है और बहुत अच्छा है।" पचास और साठ के दशक में रजत पटल पर अपनी अदाकारी की अमिट छाप छोड़ने वाले शम्मी कपूर आज के सिनेमा को तकनीकी दृष्टि से काफी उन्नत मानते हैं। खुद शम्मी ने नए जमाने की तकनीक को बहुत उत्साह से अपनाया है। ये काफी समय से इंटरनेट का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। अभिनय के अलावा उनकी जिंदगी में संगीत और खेलों की खास जगह है। फुटब्ाॉल और टेनिस उनके पसंदीदा खेल हैं। अपने दिलकश अंदाज और जबरदस्त अदाकारी की बदौलत फिल्म जगत में एक खास पहचान रखने वाले शम्मी खुद को बहुत खुशकिस्मत मानते हैं। बकौल शम्मी, "मेरी तकदीर बहुत अच्छी है कि मुझे अच्छे लोगों का साथ मिला। नासिर हुसैन की फिल्म तुमसा नहीं देखा मेरे हिस्से उस वक्त आई, जब मुझे एक अदद हिट की सख्त जरूरत थी। इससे ज्यादा खुशकिस्मती और क्या हो सकती है कि आज भी ढेरों लोग मुझे चाहते हैं और उनकी दुआएं मेरे साथ रहती हैं।"
बाप रे, आज के प्रोमो में कितने बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, मगर थिएटर में दर्शकों को एक साधारण-सी फिल्म देखने को मिलती है। मनोरंजन के लिए फिल्म पर अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करने वाला यही दर्शक फिल्म को फ्लॉप बनाता है। "माय नेम इज खान" देखकर थिएटर से निकलते हुए मैंने कई दर्शकों को यह कहते हुए सुना है- टिकट वापस कर दें, बहुत सडियल फिल्म है।
कोमल नाहटा
ट्रेड पंडित
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