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Tuesday, 07 February, 2012
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पचहत्तर पर गुलजार
Saturday, August 21, 2010, 10:35 hrs IST
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उन्हें बारिश की बूंदे बहुत लुभाती हैं...धरा में गिरती बूंदों से जो ध्वनि निकलती है, उसे गुलजार प्रकृति की असल व अनमोल संगीत रचना मानते हैं। वो हिंदी सिने जगत के सबसे जुदा गीतकार हैं। उन्हें टेनिस से बेहद लगाव है, शायद इसीलिए आज भी उनके दिन की शुरूआत टेनिस के साथ होती है। गुलजार कभी पिछड़ते नहीं... हमेशा जनरेशन के साथ चलना और बेहतरीन देना उनकी खासियत है। धन त नन... (कमीने) , दिल तो बच्चा है जी... (इश्कियां) और बहने दे...(रावण) हाल ही धूम मचाने वाली कुछ रचनाएं हैं। आखिर गुलजार समय के इतने अनुकूल कैसे बने रहते हैं? आइए, जानते हैं खुद उन्हीं की जुबानी...
एंटीक पीस हूं
मैं पूरी तरह एंटीक पीस हूं, आप चाहें तो मुझे ऎसा कह भी सकते हैं। मैं मानता हूं कि किसी बच्चे को समझने के लिए आपको बच्चा बनना पडेगा, उसके मानसिक स्तर पर आकर उससे बात करनी होगी। बस यही फलसफा है, किसी भी उम्र से जुड़ने के लिए... खुद को पूरी तरह पिघला दो और उसके स्तर पर आ जाओ। शायद यही वजह है कि मेरी रचना युवा पीढ़ी भी पसंद करती है।
मेरी उम्र हो गई क्या
"मेरे कुछ फैंस जब मुझसे कहते हैं कि हम स्कूल टाइम से आपके गाने सुन रहे हैं और उन्हीं को एंजॉय करते हुए बड़े हुए हैं...आज भी ये सिलसिला जारी है। उस समय मुझे अपनी उम्र पर आश्चर्य होता है।" तब मैं सोच में पड़ जाता हूं वाकई मेरी उम्र हो गई क्या!
सीखने की इच्छा बाकी है
दिल से, युवा और गुरू के बाद मणि रत्नम, ए.आर. रहमान और गुलजार की तिकड़ी ने रावण का म्यूजिक तैयार किया। जिसे काफी पसंद किया गया। इस पर गुलजार कहते हैं,"मेरी बचपन सी शरारत और कुछ नया खोजने की आदत जस की तस है। शायद इसी वजह से मैं लगातार काम भी कर पा रहा हूं। जब आपको लगता है कि आपने एक मुकाम हासिल कर लिया है या आप किसी मंजिल पर पहुंच गए हैं,उस स्थिति में आप किसी लायक नहीं रहते।"
घंुघराले बालों वाला
रहमान अद्भुत है। वह एक दौर है। हम अक्सर लोगों की कीमत और उनके महत्व को देर से समझते हैं, मगर रहमान इस मामले में लकी रहे। भगवान की असीम कृपा उन पर रही कि समय रहते उनकी कला को पहचान मिली और लोगों ने उन्हें सराहा। यह रहमान की मेहनत का ही नतीजा है कि भारतीय संगीत पश्चिम में अपनी धाक जमाने में सफल रहा। मुझे वह समय अच्छी तरह याद है, जब मैं रहमान से पहली बार मिला। उस समय वो अपने घंुघराले बालों के कारण बाल-गोपाल की तरह दिखता था। हम भी अक्सर उसे बाल-भगवान कहकर पुकारा करते थे। रहमान की बॉडी और सॉल किसी तानपुरे की तरह है, जिसके चारों ओर हर समय सुर और राग रहते हैं। वह बहुत ही अच्छा इंसान है। अगर वह एयरपोर्ट जा रहा हो और रास्ते में दरगाह पड़े, तो वह पहले वहां रूककर खुदा की इबादत करेगा उसके बाद ही अपने रास्ते पर बढ़ेगा। वह अपने विश्वास के रूप में अपने भगवान को साथ लेकर चलता है।
ठोक दे किल्ली
ठोक दे किल्ली...गाने के लिए कहा गया कि यह नक्सलियों का गीत है, जबकि मैं कहूंगा कि यह दलित वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया। दरअसल फिल्म में बीरा दलित वर्ग से होता है। कुछ लोगों ने बिना बात इसे पॉलिटिकल रंग देने की कोशिश की। मुझे नहीं लगता कि इसे दलित वर्ग का गीत बताकर मैं कुछ गलत कह रहा हूं। उन्होंने बहुत कुछ सहा और भुगता है।
गालिब की राह पर विशाल
आरडी बर्मन के बाद विशाल के साथ मैंने बहुत काम किया है। वह मेरे बेटे की तरह है। बहुत विनम्र है विशाल। मैंने कभी कोई आर्टिस्ट नहीं देखा, जो अपने काम को खुद रिजेक्ट कर दे, पर वह ऎसा करता है। एक अच्छी धुन तैयार करने और उसके लिए मेरे बोल लिख देने के बाद विशाल ने उसे रिजेक्ट कर दिया और नई धुन पर नए सिरे से काम किया। अपने ही काम को रिजेक्ट करने के मद्दे की तुलना मिर्जा गालिब से ही की जा सकती है। गालिब एक महान शायर, जिन्होंने अपने संकलन में मात्र 1000 शेर ही शामिल किए।
वह सवेरा आएगा
फिल्म राजनीति का मेरा लिखा गीत "धरती-धरती धान तेरे... अमेरिकी संगीतकार वाएन शार्प ने कम्पोज किया है। यह धरती मां को समर्पित गीत है, जिसमें उनकी सहनशक्ति और प्यार की गाथा है। मेरे दिल में बंटवारे की यादें आज भी ताजा हैं, तब मैं स्कूल बॉय था। मेरी वह यादें और उनसे जुड़ी मेरी भावनाओं को मैंने अपने प्ले खराशें, लकीरें और अट्ठन्नियां में भी उकेरने का प्रयास किया है। मुझे उम्मीद है कि वह दिन जरूर आएगा, जब राजनेता दोनों देशों की आवाम के बीच नहीं होंगे और हम लोग खुशी से रहेंगे। बेशक दोनों देशों की जनता के बीच किसी तरह की कोई रंजिश नहीं है। ऎसा कोई दिन नहीं, जब मैं पाकिस्तान फोन नहीं करता, वहां मेरे बहुत से दोस्त हैं। सांस्कृतिक तौर पर दोनों देश एक-दूसरे से बंधे हुए हैं। हमारे जेहन में उम्दा पाकिस्तानी संगीत और कविता, शायरी दौड़ती है।
प्यार एक अहसास
गुलजार के निर्देशन में बनी फिल्मों में महिला-पुरूष संबंधों की गहराई और संवेदनशीलता एक अलग अंदाज में होती है। फिल्म आंधी, ऎतराज, माचिस, हु तू तू इसके कुछ उदारण हैं। प्यार का असल मतलब क्या है, इस पर गुलजार फरमाते हैं, "सिर्फ अहसास है ये, रूह से महसूस करो, प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो। जहां तक महिलाओं की बात है, मैं उनका पूरा सम्मान करता हूं। यहां तक कि मैंने अपनी बेटी से भी कभी कठोरता से बात नहीं की। ऎसी कोई बात ही नहीं हुई, जिस पर मैं गुस्सा करूं। मैंने कभी मेघना के लिए "तू" संबोधन का इस्तेमाल नहीं किया, हमेशा "आप" से बात की।
प्रस्तुति: गरिमा सिंह
इनपुट्स: फिल्म फेयर
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